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Jind News: जींद की जनता ने चुने कांग्रेस के तीन सांसद, नहीं खिला कमल
Wed, 05 Jun 2024 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 05 Jun 2024 12:09 AM IST
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सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की जीत के बाद विजयी निशान बनातेसतपाल ब्रह्मचारी के भाई डॉ. सु
जींद। जिले के पांच विधानसभा के लोगों ने तीन लोकसभा सीटों के लिए मतदान किया। इसमें सोनीपत, हिसार तथा सिरसा शामिल हैं। तीनों लोस सीटों पर कांग्रेस ने बाजी मारी है।
विधानसभा के हिसाब से देखे तो जाट बाहुल्य विस उचाना, जुलाना तथा नरवाना के मतदाता कांग्रेस के साथ गए। अच्छी बढ़त यहां पर मतदाताओं ने कांग्रेस को दी, जबकि जींद तथा सफीदों विस भाजपा के साथ गई है। सफीदों तथा जींद विस में पिछले लोस के बजाय मार्जिन काफी कम रहा। सीधे तौर पर जिले में भाजपा की माइक्रो मैनेजमेंट पर कांग्रेस की देशी फिल्डिंग भारी पड़ गई।
वर्ष 2019 लोस चुनाव में जीद विस से भाजपा को लगभग 47 हजार की जीत हासिल की थी। जो 2024 में सिमट कर 3161 रह गई है। सफीदों विस में वर्ष 2019 में 45 हजार की लीड भाजपा को मिली भी, जो अब 5331 तक सिमट गई है। जुलाना से 2019 में भाजपा को 18 हजार की लीड मिली थी। जो अब कांग्रेस को साढ़े 24 हजार से लीड दे रही है। यानी सीधे तौर पर समीकरणों में बदलाव हुआ है।
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हिसार लोस के तहत आने वाले उचाना विस में वर्ष 2019 में भाजपा को 47 हजार लीड मिली थी, जबकि अब कांग्रेस को यहां से लगभग साढ़े 37 हजार की लीड मिली है। इसी प्रकार सिरसा लोस सीट की नरवाना विस से वर्ष 2019 में भाजपा को 51 हजार की लीड मिली थी। अब नरवाना विस से कांग्रेस को लगभग साढ़े 15 हजार की लीड दी है।
सोनीपत लोस के अंतर्गत आने वाली सफीदों तथा जींद विस की बात करें तो जाट वोट बैंक ने कांग्रेस के पक्ष में जबरदस्त वोटिंग की, जबकि स्थानीय प्रत्याशी होने के बाद गैर जाट जातियों ने उतना साथ नहीं दिया। दोनों सीटों पर शहर हार-जीत का फैसला करते हैं। ग्रामीण अंचल में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन रहा, जबकि भाजपा की लाज शहरों ने बचाई है। जुलाना विस के वोटरों ने इस बार कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग कर बाजी पलट दी। इससे कांग्रेस प्रत्याशी को लगभग साढ़े 24 हजार की लीड दी है। हालांकि पिछले दस साल में तीनों विधानसभा में नेशनल हाईवे का जाल बिछा है, लेकिन रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं। कोई बड़ा उद्योग जिले में नहीं लगा। कृषि मुद्दों को लेकर जाट बाहुल्य किसान बेल्ट पर भाजपा सरकार के प्रति जबरदस्त रोष रहा है। कांग्रेस का जिलास्तर पर संगठन नहीं होने के बाद भी लोगों ने अपने स्तर पर चुनाव लड़ा और भाजपा की माइक्रो मैनेजमेंट को धराशायी कर दिया।
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विधानसभा के हिसाब से देखे तो जाट बाहुल्य विस उचाना, जुलाना तथा नरवाना के मतदाता कांग्रेस के साथ गए। अच्छी बढ़त यहां पर मतदाताओं ने कांग्रेस को दी, जबकि जींद तथा सफीदों विस भाजपा के साथ गई है। सफीदों तथा जींद विस में पिछले लोस के बजाय मार्जिन काफी कम रहा। सीधे तौर पर जिले में भाजपा की माइक्रो मैनेजमेंट पर कांग्रेस की देशी फिल्डिंग भारी पड़ गई।
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वर्ष 2019 लोस चुनाव में जीद विस से भाजपा को लगभग 47 हजार की जीत हासिल की थी। जो 2024 में सिमट कर 3161 रह गई है। सफीदों विस में वर्ष 2019 में 45 हजार की लीड भाजपा को मिली भी, जो अब 5331 तक सिमट गई है। जुलाना से 2019 में भाजपा को 18 हजार की लीड मिली थी। जो अब कांग्रेस को साढ़े 24 हजार से लीड दे रही है। यानी सीधे तौर पर समीकरणों में बदलाव हुआ है।
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हिसार लोस के तहत आने वाले उचाना विस में वर्ष 2019 में भाजपा को 47 हजार लीड मिली थी, जबकि अब कांग्रेस को यहां से लगभग साढ़े 37 हजार की लीड मिली है। इसी प्रकार सिरसा लोस सीट की नरवाना विस से वर्ष 2019 में भाजपा को 51 हजार की लीड मिली थी। अब नरवाना विस से कांग्रेस को लगभग साढ़े 15 हजार की लीड दी है।
सोनीपत लोस के अंतर्गत आने वाली सफीदों तथा जींद विस की बात करें तो जाट वोट बैंक ने कांग्रेस के पक्ष में जबरदस्त वोटिंग की, जबकि स्थानीय प्रत्याशी होने के बाद गैर जाट जातियों ने उतना साथ नहीं दिया। दोनों सीटों पर शहर हार-जीत का फैसला करते हैं। ग्रामीण अंचल में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन रहा, जबकि भाजपा की लाज शहरों ने बचाई है। जुलाना विस के वोटरों ने इस बार कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग कर बाजी पलट दी। इससे कांग्रेस प्रत्याशी को लगभग साढ़े 24 हजार की लीड दी है। हालांकि पिछले दस साल में तीनों विधानसभा में नेशनल हाईवे का जाल बिछा है, लेकिन रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं। कोई बड़ा उद्योग जिले में नहीं लगा। कृषि मुद्दों को लेकर जाट बाहुल्य किसान बेल्ट पर भाजपा सरकार के प्रति जबरदस्त रोष रहा है। कांग्रेस का जिलास्तर पर संगठन नहीं होने के बाद भी लोगों ने अपने स्तर पर चुनाव लड़ा और भाजपा की माइक्रो मैनेजमेंट को धराशायी कर दिया।