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खटाई में पड़ी अटल पार्क की योजना
jind
Updated Fri, 21 Oct 2016 12:21 AM IST
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अटल पार्क की साइट, जिस पर लावारिस पशुओं का कब्जा है।
- फोटो : bureau
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दो साल पहले जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई अटल पार्क की योजना अब खटाई में पड़ती नजर आ रही है। अब पशुपालन विभाग यहां वेटनरी कॉलेज या वेटरी विश्वविद्यालय का रीजनल सेंटर बनाने पर विचार कर रहा है। दो साल में पशुपालन विभाग को करीब दस लाख रुपये का फटका भी लग चुका है। सफीदों रोड स्थित पशुपालन विभाग की आठ एकड़ जमीन पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से पार्क बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। उस समय के डीसी अजीत बालाजी जोशी ने 72 घंटे में पार्क निर्माण का दावा किया, लेकिन ऐन मौके पर पशुपालन विभाग ने काम रुकवा दिया। तब से ही पार्क पर अनिश्चितताओं के बादल मंडरा रहे थे। अब पशुपालन विभाग के महानिदेशक ने पत्र भेजकर अधिकारियों से पूछा है कि क्या प्रस्तावित अटल पार्क के पास कोई ओर पार्क है। इस पर अधिकारियों ने पास के हुडा पार्क की जगह बताई है। वहीं विभाग भूमि की स्थिति के बारे भी पूछा है, जो कि शहर की प्राइम लोकेशन है। ऐसे में पार्क का निर्माण होने का मामला खटाई में पड़ रहा है।
विभाग को दस लाख का फटका
अटल पार्क की जमीन को पशुपालन विभाग हर साल ठेके पर देता रहा है। जिस समय पार्क का निर्माण शुरू हुआ, यहां गेहूं की फसल तैयार हो रही थी, लेकिन प्रशासन ने फसल को बर्बाद कर यहां पार्क निर्माण शुरू करवा दिया। इससे से हर साल होने वाली करीब चार लाख रुपये की राशि विभाग को नहीं मिल रही है।
आ सकते हैं अच्छे दिन
शीर्ष सूत्रों के अनुसार पशुपालन विभाग फिलहाल इस जमीन को विभाग के लिए ही प्रयोग करना चाहता है। इसके तहत यहां वेटनरी डिप्लोमा कोर्स या हिसार की लाला लाजपत राय पशु विज्ञान यूनिवर्सिटी का रीजनल सेंटर बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह जींद के लिए बड़ी परियोजना होगी।
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ट्रांसफर नहीं हो पाई जमीन
पार्क का निर्माण रुकने के बाद डीसी ने हुडा को यह जमीन अपने अधीन लेकर पार्क बनवाने का प्रस्ताव भेजा, लेकिन यह नामंजूर हो गया। इसके बाद नगर परिषद से पार्क तैयार करने की योजना बनी, लेकिन पशुपालन विभाग की जमीन नगर परिषद को ट्रांसफर नहीं हो सकी। सूत्रों के अनुसार यह जमीन पशुपालन विभाग ने खरीदी है, ऐसे में यह ट्रांसफर नहीं हो सकती। अब या तो पार्क विकसित करने वाली एजेंसी को जमीन खरीदनी पड़ेगी, या फिर मंत्री मंडल ही इस के ट्रांसफर कर सकता है। यह बेहद लंबी प्रक्रिया है।
जल्द हो निर्माण
पशुपालन विभाग की जमीन पर पार्क बनाने की प्रक्रिया से काफी राहत मिली थी, लेकिन अब मायूसी है। यहां पार्क का निर्माण होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी।
सतीश, निवासी।
आफत बनी साइट
फिलहाल अटल पार्क की साइट आसपास के लोगों के लिए आफत बनी हुई है। यहां लावारिश पशु घुमते हैं। असामाजिक तत्वों का भी जमवाड़ा रहता है।
संजीव पौड़िया
विभाग के अधिकारियों ने पार्क को लेकर कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, यह जानकारी मुहैया करवा दी गई है। आगे इस साइट पर क्या फैसला होगा, यह तय नहीं है, लेकिन पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर नहीं हो पाई है।
- डॉ. आरके नरवाल, उप पशुपालन निदेशक।
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विभाग को दस लाख का फटका
अटल पार्क की जमीन को पशुपालन विभाग हर साल ठेके पर देता रहा है। जिस समय पार्क का निर्माण शुरू हुआ, यहां गेहूं की फसल तैयार हो रही थी, लेकिन प्रशासन ने फसल को बर्बाद कर यहां पार्क निर्माण शुरू करवा दिया। इससे से हर साल होने वाली करीब चार लाख रुपये की राशि विभाग को नहीं मिल रही है।
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आ सकते हैं अच्छे दिन
शीर्ष सूत्रों के अनुसार पशुपालन विभाग फिलहाल इस जमीन को विभाग के लिए ही प्रयोग करना चाहता है। इसके तहत यहां वेटनरी डिप्लोमा कोर्स या हिसार की लाला लाजपत राय पशु विज्ञान यूनिवर्सिटी का रीजनल सेंटर बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह जींद के लिए बड़ी परियोजना होगी।
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ट्रांसफर नहीं हो पाई जमीन
पार्क का निर्माण रुकने के बाद डीसी ने हुडा को यह जमीन अपने अधीन लेकर पार्क बनवाने का प्रस्ताव भेजा, लेकिन यह नामंजूर हो गया। इसके बाद नगर परिषद से पार्क तैयार करने की योजना बनी, लेकिन पशुपालन विभाग की जमीन नगर परिषद को ट्रांसफर नहीं हो सकी। सूत्रों के अनुसार यह जमीन पशुपालन विभाग ने खरीदी है, ऐसे में यह ट्रांसफर नहीं हो सकती। अब या तो पार्क विकसित करने वाली एजेंसी को जमीन खरीदनी पड़ेगी, या फिर मंत्री मंडल ही इस के ट्रांसफर कर सकता है। यह बेहद लंबी प्रक्रिया है।
जल्द हो निर्माण
पशुपालन विभाग की जमीन पर पार्क बनाने की प्रक्रिया से काफी राहत मिली थी, लेकिन अब मायूसी है। यहां पार्क का निर्माण होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी।
सतीश, निवासी।
आफत बनी साइट
फिलहाल अटल पार्क की साइट आसपास के लोगों के लिए आफत बनी हुई है। यहां लावारिश पशु घुमते हैं। असामाजिक तत्वों का भी जमवाड़ा रहता है।
संजीव पौड़िया
विभाग के अधिकारियों ने पार्क को लेकर कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, यह जानकारी मुहैया करवा दी गई है। आगे इस साइट पर क्या फैसला होगा, यह तय नहीं है, लेकिन पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर नहीं हो पाई है।
- डॉ. आरके नरवाल, उप पशुपालन निदेशक।