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15 दिनों से नहीं बिका धान, जलाने का प्रयास किया तो हुई खरीद
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धान की ढेरी पर डीजल डालने वाले किसान दिलबाग को रोकते आढ़ती। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। सफीदों की अनाज मंडी में किसानों के धान की बेकद्री हो रही है। इसका नया मामला उस समय सामने आया, जब कुरड़ गांव निवासी किसान दिलबाग ने धान की ढेरी पर डीजल डालकर जलाने का प्रयास किया। हालांकि विवाद बढ़ता देख मंडी अधिकारियों ने तुरंत धान की खरीद करवा दी।
किसान का कहना है कि वह 16 अक्तूबर को मंडी में धान लेकर आया था। इसका गेट पास कट चुका है, लेकिन अधिकारी अभी भी धान में नमी बताकर खरीदने से मना करते रहे। कुछ लोगों ने प्रति क्विंटल 300 रुपये देने पर धान बिकवाने की बात कही। इससे परेशान होकर दिलबाग ने मंडी में ही धान की ढेरी पर ट्रैक्टर से डीजल निकालकर छिड़क दिया। हालांकि इससे पहले कुछ लोगों ने दिलबाग को पकड़ कर रोक दिया।
वही,ं हाट गांव निवासी किसान रणधीर ने भी कहा कि 15 दिनों से उनका पीआर धान नहीं बिक रहा है। पीआर धान की सरकारी खरीद है। किसानों का कहना है कि अधिकारी रिश्वत लेने के चक्कर में धान में अधिक नमी बताते रहते हैं। किसानों ने कहा कि धान पूरी तरह से सूखा हुआ है। विवाद के बाद मार्केट कमेटी सचिव जगजीत कादियान व खरीद एजेंसी एचडब्ल्यूसी एजेंसी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर खरीद करवा दी। इस दौरान जांच में पाया गया कि इस ढेरी में महज 14 प्रतिशत नमी थी, जबकि सरकार ने 17 प्रतिशत नमी वाले धान को खरीदने के आदेश दिए हैं। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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गड़बड़ी सामने आने के बाद बचते रहे अधिकारी
हालांकि किसान द्वारा धान की ढेरी को आग लगाने के प्रयास से पहले अधिकारी धान में अधिक नमी बता रहे थे, लेकिन इसके बाद जैसे ही मीडिया में मामला आया तो आनन फानन में धान को खरीद लिया गया। इससे यहां मौजूद अन्य किसानों ने भी कहा कि अधिकारी अपनी गड़बड़ी को दबाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
अधिक नमी के कारण नहीं हुई थी खरीद
सफीदों मार्केट कमेटी के सचिव जगजीत सिंह ने कहा कि मंडी में आई ढेरी की नियमित रूप से जांच होती है। इस ढेरी में भी पहले नमी की मात्रा तय सीमा से अधिक थी। इसके चलते नहीं खरीदी गई। जैसे ही नमी कम हुई, धान की खरीद हो गई है। यदि किसी किसान को समस्या आ रही है तो वह शिकायत कर सकता है। इसकी जांच करवाई जाएगी।
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किसान का कहना है कि वह 16 अक्तूबर को मंडी में धान लेकर आया था। इसका गेट पास कट चुका है, लेकिन अधिकारी अभी भी धान में नमी बताकर खरीदने से मना करते रहे। कुछ लोगों ने प्रति क्विंटल 300 रुपये देने पर धान बिकवाने की बात कही। इससे परेशान होकर दिलबाग ने मंडी में ही धान की ढेरी पर ट्रैक्टर से डीजल निकालकर छिड़क दिया। हालांकि इससे पहले कुछ लोगों ने दिलबाग को पकड़ कर रोक दिया।
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वही,ं हाट गांव निवासी किसान रणधीर ने भी कहा कि 15 दिनों से उनका पीआर धान नहीं बिक रहा है। पीआर धान की सरकारी खरीद है। किसानों का कहना है कि अधिकारी रिश्वत लेने के चक्कर में धान में अधिक नमी बताते रहते हैं। किसानों ने कहा कि धान पूरी तरह से सूखा हुआ है। विवाद के बाद मार्केट कमेटी सचिव जगजीत कादियान व खरीद एजेंसी एचडब्ल्यूसी एजेंसी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर खरीद करवा दी। इस दौरान जांच में पाया गया कि इस ढेरी में महज 14 प्रतिशत नमी थी, जबकि सरकार ने 17 प्रतिशत नमी वाले धान को खरीदने के आदेश दिए हैं। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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गड़बड़ी सामने आने के बाद बचते रहे अधिकारी
हालांकि किसान द्वारा धान की ढेरी को आग लगाने के प्रयास से पहले अधिकारी धान में अधिक नमी बता रहे थे, लेकिन इसके बाद जैसे ही मीडिया में मामला आया तो आनन फानन में धान को खरीद लिया गया। इससे यहां मौजूद अन्य किसानों ने भी कहा कि अधिकारी अपनी गड़बड़ी को दबाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
अधिक नमी के कारण नहीं हुई थी खरीद
सफीदों मार्केट कमेटी के सचिव जगजीत सिंह ने कहा कि मंडी में आई ढेरी की नियमित रूप से जांच होती है। इस ढेरी में भी पहले नमी की मात्रा तय सीमा से अधिक थी। इसके चलते नहीं खरीदी गई। जैसे ही नमी कम हुई, धान की खरीद हो गई है। यदि किसी किसान को समस्या आ रही है तो वह शिकायत कर सकता है। इसकी जांच करवाई जाएगी।