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मंडियों में धान की आवक बढ़ी, नमी के चलते नहीं हो पा रही खरीद
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मंडी में आए पीआर धान की नमी की मीटर से जांच करते किसान नेता।
- फोटो : Jind
जींद। किसानों के विरोध के चलते सरकार ने पीआर धान की खरीद का एलान तो कर दिया है। लेकिन अभी भी धान बेचने के लिए किसानों को पसीना बहाना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मंडी में पहुंच रहे धान में 25 प्रतिशत तक नमी है। जबकि सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान खरीदने के आदेश दिए हैं। इसके चलते अभी पूरी तरह जिले में धान की खरीद शुरू नहीं हो पाई है।
जींद की अनाज मंडी में अब तक करीब 300 क्विंटल धान पहुंचा है, लेकिन खरीद नहीं हुई है। सबसे अधिक धान नरवाना की मंडी में 40 हजार क्विंटल पहुंचा है। इसके बाद सफीदों में करीब आठ हजार क्विंटल, अलेवा में करीब एक हजार व उचाना व जींद में करीब 500 क्विंटल धान पहुंचा है। खरीद के मामले में नरवाना मंडी में 2195 क्विंटल व नरवाना की ही धमतान मंडी में 1200 क्विंटल धान की खरीद हुई है। सफीदों में 280 क्विंटल व उचाना में 400 क्विटल धान खरीदा गया है।
मौसम ने बढ़ाई चिंता
एक ओर तो किसानों का धान मंडियों में पहुंच रहा है, वहीं मौसम भी बदल रहा है। सोमवार रात को क्षेत्र में कई जगह बूंदाबांदी हुई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि मंडी में पड़ा धान भीग जाता है तो इसको सूखने में अधिक समय लगेगा। इसके अलावा मंडियों में कपास, बाजरा व बासमती धान भी आ रहा है। सरकारी खरीद के अलावा अन्य फसलों के भीगने के कारण इनकी गुणवत्ता व भाव पर भी असर पड़ेगा।
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जींद मार्केट कमेटी सचिव संजीव कुमार ने बताया कि अभी तक मंडियों में पहुंचे धान में नमी मात्रा 25 प्रतिशत तक आ रही है। नियमानुसार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीदा जाना है। किसान के सामने ही नमी की जांच होती है। ऐसे में किसानों को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
किसान नेताओं ने मीटर लेकर जांचा तो नमी मिली 20 से 25 प्रतिशत तक
उचाना। तीन अक्तूबर से चल रही पीआर धान की खरीद को लेकर किसान नेता आजाद पालवां की अगुवाई में किसान मंडी पहुंचे। यहां पर पीआर खरीद में नमी के नाम पर किसानों को परेशान किए जाने के आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया गया।
फसल की नमी के लिए जब मार्केट कमेटी के नमी जांच मीटर से किसान नेताओं ने नमी को जांचा तो नमी निर्धारित 17 प्रतिशत से अधिक मिली। यहां पर कई ढेरियों पर किसान नेता किसानों के साथ इस मीटर को लेकर गए, लेकिन अधिकांश की नमी निर्धारित की गई नमी से अधिक मिली। आजाद पालवां ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नमी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है। इस पर किसान मंडी पहुंचे। यहां पर वह किसानों से मिले। मीटर लेकर नमी की जांच की तो ढेरियों में नमी अधिक मिली। किसानों को अगर खरीद के नाम पर परेशान किया गया तो सहन नहीं किया जाएगा। पालवां ने कहा कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कहते थे कि अगर एमएसपी किसानों को नहीं मिला तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। आज बाजरा को भावांतर योजना में शामिल सरकार ने किया है। मंडी में 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक बाजरा बिक रहा है। सरकार अगर 600 रुपये प्रति क्विंटल किसान को देगी भी तो किसान को 200 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति क्विंटल नुकसान हो रहा है। अब किसानों को निर्धारित एमएसपी नहीं मिल रहा है, इसलिए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला अपने पद से इस्तीफा दें।
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जींद की अनाज मंडी में अब तक करीब 300 क्विंटल धान पहुंचा है, लेकिन खरीद नहीं हुई है। सबसे अधिक धान नरवाना की मंडी में 40 हजार क्विंटल पहुंचा है। इसके बाद सफीदों में करीब आठ हजार क्विंटल, अलेवा में करीब एक हजार व उचाना व जींद में करीब 500 क्विंटल धान पहुंचा है। खरीद के मामले में नरवाना मंडी में 2195 क्विंटल व नरवाना की ही धमतान मंडी में 1200 क्विंटल धान की खरीद हुई है। सफीदों में 280 क्विंटल व उचाना में 400 क्विटल धान खरीदा गया है।
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मौसम ने बढ़ाई चिंता
एक ओर तो किसानों का धान मंडियों में पहुंच रहा है, वहीं मौसम भी बदल रहा है। सोमवार रात को क्षेत्र में कई जगह बूंदाबांदी हुई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि मंडी में पड़ा धान भीग जाता है तो इसको सूखने में अधिक समय लगेगा। इसके अलावा मंडियों में कपास, बाजरा व बासमती धान भी आ रहा है। सरकारी खरीद के अलावा अन्य फसलों के भीगने के कारण इनकी गुणवत्ता व भाव पर भी असर पड़ेगा।
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जींद मार्केट कमेटी सचिव संजीव कुमार ने बताया कि अभी तक मंडियों में पहुंचे धान में नमी मात्रा 25 प्रतिशत तक आ रही है। नियमानुसार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीदा जाना है। किसान के सामने ही नमी की जांच होती है। ऐसे में किसानों को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
किसान नेताओं ने मीटर लेकर जांचा तो नमी मिली 20 से 25 प्रतिशत तक
उचाना। तीन अक्तूबर से चल रही पीआर धान की खरीद को लेकर किसान नेता आजाद पालवां की अगुवाई में किसान मंडी पहुंचे। यहां पर पीआर खरीद में नमी के नाम पर किसानों को परेशान किए जाने के आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया गया।
फसल की नमी के लिए जब मार्केट कमेटी के नमी जांच मीटर से किसान नेताओं ने नमी को जांचा तो नमी निर्धारित 17 प्रतिशत से अधिक मिली। यहां पर कई ढेरियों पर किसान नेता किसानों के साथ इस मीटर को लेकर गए, लेकिन अधिकांश की नमी निर्धारित की गई नमी से अधिक मिली। आजाद पालवां ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नमी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है। इस पर किसान मंडी पहुंचे। यहां पर वह किसानों से मिले। मीटर लेकर नमी की जांच की तो ढेरियों में नमी अधिक मिली। किसानों को अगर खरीद के नाम पर परेशान किया गया तो सहन नहीं किया जाएगा। पालवां ने कहा कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कहते थे कि अगर एमएसपी किसानों को नहीं मिला तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। आज बाजरा को भावांतर योजना में शामिल सरकार ने किया है। मंडी में 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक बाजरा बिक रहा है। सरकार अगर 600 रुपये प्रति क्विंटल किसान को देगी भी तो किसान को 200 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति क्विंटल नुकसान हो रहा है। अब किसानों को निर्धारित एमएसपी नहीं मिल रहा है, इसलिए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला अपने पद से इस्तीफा दें।