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Jind News: मरम्मत में डेढ़ लाख नहीं लगाए, ऑक्सीजन पर खर्च हो गए 12 लाख
Thu, 03 Aug 2023 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 03 Aug 2023 11:48 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। उपकरणों की सर्विस नहीं होने के कारण नागरिक अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट पांच महीने से बंद पड़ा है। इसकी सर्विस पर डेढ़ लाख रुपये खर्च होने हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग को आज तक इसके लिए बजट नहीं मिला। अस्पताल में प्रतिदिन ऑक्सीजन सिलिंडर पर आठ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। पांच महीने में अबतक 12 लाख रुपये ऑक्सीजन पर खर्च हो चुके हैं।
नागरिक अस्पताल में 2021 में प्रधानमंत्री केयर फंड से लगा ऑक्सीजन प्लांट पिछले पांच महीने से खराब है। इस ऑक्सीजन प्लांट की सर्विस होनी है। इस पर डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास बजट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय से बजट की मांग की है, लेकिन बजट मिला। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन 20 ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदने पड़ रहे हैं। प्रत्येक ऑक्सीजन सिलिंडर पर 400 रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन आठ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। पांच महीने में अब तक 12 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यदि ऑक्सीजन प्लांट ठीक होता तो ये 12 लाख रुपये खर्च नहीं होते। बार-बार सिलिंडर बदलने के कारण मरीजों व अस्पताल कर्मचारियों काे भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नागरिक अस्पताल में जब ऑक्सीजन प्लांट लगा था, तब स्वास्थ्य विभाग के लोगों ने सोचा था कि अब अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडरों की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसी ऑक्सीजन प्लांट से काम चल जाएगा। यह ऑक्सीजन प्लांट पिछले ढाई साल में कई बार खराब हो चुका है। बार-बार खराब होने के कारण इस ऑक्सीजन प्लांट के भरोसे मरीजों को नहीं रखा जा सकता। इसलिए स्वास्थ्य विभाग अपनी वैकल्पिक व्यवस्था ऑक्सीजन सिलिंडराें के जरिये तैयार रखता है।
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बॉक्स
इमरजेंसी वार्ड व 100 बेड पर होती है सप्लाई
नागरिक अस्पताल 200 बेड का है। 100 बेड की व्यवस्था नई बिल्डिंग में है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आपातकाल के लिए पुरानी बिल्डिंग में भी 100 बेड की व्यवस्था की है। पुरानी बिल्डिंग में सामान्य रोगियों को दाखिल करने की सुविधा है। पुरानी बिल्डिंग में ही इमरजेंसी वार्ड है। इमरजेंसी वार्ड व अन्य पुरानी बिल्डिंग में इस ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। जब यह ऑक्सीजन प्लांट खराब होता है तो सिलिंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई दी जाती है।
ऑक्सीजन प्लांट में कोई तकनीकी खराबी आई है। इससे अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। इंजीनियर ने मरम्मत का खर्च डेढ़ लाख रुपये बताया है। जैसे ही बजट मिलेगा, प्लांट की मरम्मत करा दी जाएगी।-डॉ. जितेंद्र कादियान, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
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जींद। उपकरणों की सर्विस नहीं होने के कारण नागरिक अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट पांच महीने से बंद पड़ा है। इसकी सर्विस पर डेढ़ लाख रुपये खर्च होने हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग को आज तक इसके लिए बजट नहीं मिला। अस्पताल में प्रतिदिन ऑक्सीजन सिलिंडर पर आठ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। पांच महीने में अबतक 12 लाख रुपये ऑक्सीजन पर खर्च हो चुके हैं।
नागरिक अस्पताल में 2021 में प्रधानमंत्री केयर फंड से लगा ऑक्सीजन प्लांट पिछले पांच महीने से खराब है। इस ऑक्सीजन प्लांट की सर्विस होनी है। इस पर डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास बजट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय से बजट की मांग की है, लेकिन बजट मिला। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन 20 ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदने पड़ रहे हैं। प्रत्येक ऑक्सीजन सिलिंडर पर 400 रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन आठ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। पांच महीने में अब तक 12 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यदि ऑक्सीजन प्लांट ठीक होता तो ये 12 लाख रुपये खर्च नहीं होते। बार-बार सिलिंडर बदलने के कारण मरीजों व अस्पताल कर्मचारियों काे भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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नागरिक अस्पताल में जब ऑक्सीजन प्लांट लगा था, तब स्वास्थ्य विभाग के लोगों ने सोचा था कि अब अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडरों की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसी ऑक्सीजन प्लांट से काम चल जाएगा। यह ऑक्सीजन प्लांट पिछले ढाई साल में कई बार खराब हो चुका है। बार-बार खराब होने के कारण इस ऑक्सीजन प्लांट के भरोसे मरीजों को नहीं रखा जा सकता। इसलिए स्वास्थ्य विभाग अपनी वैकल्पिक व्यवस्था ऑक्सीजन सिलिंडराें के जरिये तैयार रखता है।
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इमरजेंसी वार्ड व 100 बेड पर होती है सप्लाई
नागरिक अस्पताल 200 बेड का है। 100 बेड की व्यवस्था नई बिल्डिंग में है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आपातकाल के लिए पुरानी बिल्डिंग में भी 100 बेड की व्यवस्था की है। पुरानी बिल्डिंग में सामान्य रोगियों को दाखिल करने की सुविधा है। पुरानी बिल्डिंग में ही इमरजेंसी वार्ड है। इमरजेंसी वार्ड व अन्य पुरानी बिल्डिंग में इस ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। जब यह ऑक्सीजन प्लांट खराब होता है तो सिलिंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई दी जाती है।
ऑक्सीजन प्लांट में कोई तकनीकी खराबी आई है। इससे अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। इंजीनियर ने मरम्मत का खर्च डेढ़ लाख रुपये बताया है। जैसे ही बजट मिलेगा, प्लांट की मरम्मत करा दी जाएगी।-डॉ. जितेंद्र कादियान, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।