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Jind News: संस्कृति दिवस पर बच्चों ने दिखाई लोक कला और परंपरा की झलक
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21जेएनडी16: संस्कृति दिवस पर हरियाणवी परिधानों में छोटे विद्यार्थी। स्रोत : अध्यापक
जींद। निपुण मिशन के तहत चल रहे क्लास रेडिनेस कार्यक्रम में बुधवार को संस्कृति दिवस उत्साह और रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ मनाया। कार्यक्रम में बच्चों ने लोक नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भारत की विविध संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। बच्चों की प्रस्तुतियों ने शिक्षकों और अभिभावकों का मन मोह लिया।
जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने बताया कि संस्कृति दिवस मनाने का उद्देश्य बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उनमें अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी संस्कृति को समझते हैं तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी पहचान को मजबूती से स्वीकार करते हैं। कार्यक्रम में बच्चों ने अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया।
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किसी ने हरियाणवी पहनावा अपनाया तो किसी ने पंजाबी, राजस्थानी और गुजराती संस्कृति की झलक पेश की। मंच पर बच्चों ने लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिन पर उपस्थित लोग तालियां बजाने को मजबूर हो गए।
बच्चों ने पारंपरिक खान-पान से जुड़ी वस्तुओं और व्यंजनों का भी प्रदर्शन किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के भोजन की विशेषताओं और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही लोक कहानियों और लोकगीतों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति और पुरानी परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
क्लास रेडिनेस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को बिना किसी दबाव के खेल-खेल में सीखने का अवसर देना है। गीत-संगीत, कहानी और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए बच्चों की रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलता है।
अभिभावकों और शिक्षकों में भी दिखा उत्साह
जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति किसी भी समाज की मजबूत नींव होती हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने के साथ-साथ उनमें सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी विकसित करते हैं। कार्यक्रम को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर देते हैं।
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जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने बताया कि संस्कृति दिवस मनाने का उद्देश्य बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उनमें अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है।
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उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी संस्कृति को समझते हैं तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी पहचान को मजबूती से स्वीकार करते हैं। कार्यक्रम में बच्चों ने अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया।
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किसी ने हरियाणवी पहनावा अपनाया तो किसी ने पंजाबी, राजस्थानी और गुजराती संस्कृति की झलक पेश की। मंच पर बच्चों ने लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिन पर उपस्थित लोग तालियां बजाने को मजबूर हो गए।
बच्चों ने पारंपरिक खान-पान से जुड़ी वस्तुओं और व्यंजनों का भी प्रदर्शन किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के भोजन की विशेषताओं और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही लोक कहानियों और लोकगीतों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति और पुरानी परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
क्लास रेडिनेस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को बिना किसी दबाव के खेल-खेल में सीखने का अवसर देना है। गीत-संगीत, कहानी और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए बच्चों की रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलता है।
अभिभावकों और शिक्षकों में भी दिखा उत्साह
जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति किसी भी समाज की मजबूत नींव होती हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने के साथ-साथ उनमें सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी विकसित करते हैं। कार्यक्रम को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर देते हैं।