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मुख्यमंत्री की सुरक्षा में उलझे रहे अधिकारी, तड़पते रहे मरीज

Thu, 29 Apr 2021 11:58 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 11:58 PM IST
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Officers involved in Chief Minister's security, patient suffering
जिले में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीरवार को जींद में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने जींद के नागरिक अस्पताल का भी दौरा किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा लोगों पर भारी पड़ गया। विशेषकर उन लोगों को जिनके परिजन अस्पताल में भर्ती हैं या फिर जिनके परिजनों को तुरंत उपचार की आवश्यकता थी। हालांकि मुख्यमंत्री का दौरा सिर्फ 15 मिनट का रहा, लेकिन इसके चलते लोगों को छह घंटे परेशानी झेलनी पड़ी। कई गंभीर मरीज तो सिटी स्कैन वार्ड के बाहर तड़पते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री की सुरक्षा व प्रोटोकॉल के चलते उनको अंदर नहीं जाने दिया गया। लोगों का यह दर्द मुख्यमंत्री पर उस समय फूट पड़ा जब उनकी वजह से व्यवस्था बिगड़ी।
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दरअसल एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा जींद का दौरा करने का कार्यक्रम बनाया गया था। इसके चलते प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां भी की थीं। ऐसे में अस्पताल के नए भवन में भर्ती कोरोना मरीजों के परिजनों को सुबह आठ बजे ही बाहर निकाल दिया गया। मुख्यमंत्री दोपहर 12:45 बजे नागरिक अस्पताल पहुंचे तो लोगों ने बताया कि यहां ऐसे ही मरीजों को भर्ती करवाया जाता है जो खाने-पीने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद उनको पानी तक नहीं पहुंचाने दिया जा रहा है। कई लोग ऐसे भी रहे, जिन्हें सिटी स्कैन वार्ड में प्रवेश ही नहीं मिल पाया।
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मीडिया के हस्तक्षेप के बाद खुले आम लोगों के लिए अस्पताल के द्वार
खटकड़ की रहने वाली ओमपति के 38 वर्षीय बेटे प्रदीप के सीने में दर्द था। उसे सांस लेने में भी दिक्कत थी। वह अपने बेटे को लेकर अस्पताल पहुंची तो प्रदीप का सिटी स्कैन करवाने के लिए कहा गया। लेकिन वह जब सिटी स्कैन के लिए नए भवन में जाने लगा तो यहां दरवाजा बंद मिला। प्रदीप के परिजन काफी देर तक दरवाजा पीटते रहे, लेकिन नहीं खोला गया। इसके बाद मीडिया ने इसकी कवरेज शुरू की तो मुख्यमंत्री सुरक्षा के अधिकारी हरकत में आए और दरवाजा खोल दिया गया।
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व्यवस्था देखकर रोना आता है
वहीं जींद निवासी नरेंद्र दलाल के भाई व मां को कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया है। नरेंद्र के अनुसार सुबह आठ बजे ही उन्हें बाहर निकाल दिया गया था। अस्पताल द्वारा दिए जाने वाले खाने को भी सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। पानी तक अंदर नहीं जाने दिया। मुख्यमंत्री ने कभी ऐसा नहीं कहा होगा, लेकिन ऐसी व्यवस्था देखकर रोना आ रहा है।
युवक ने लगाई गुहार, अधिकारियों ने टाला
इस दौरान एक युवक ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई कि वह कंडेला गांव के पास एक ईंट भट्ठे पर काम करता है। उसकी मां बीमार है। लेकिन मालिक इलाज के लिए पैसे नहीं दे रहा। इसके अलावा उसके साथ मारपीट की जाती है। जबरन उसका धर्म बदलवाया जा रहा है। यह शिकायत कर रहे युवक को अधिकारियों ने टाल दिया और कहा कि वे उसकी समस्या का समाधान करवाएंगे। मुख्यमंत्री के जाते ही युवक अस्पताल में ही घूमता नजर आया।

अस्पताल में नहीं हो रही सुनवाई
अर्बन इस्टेट निवासी संजना के पिता गंभीर रूप से बीमार हैं। संजना ने बताया कि पिता को लेकर वह रात में आई थी, लेकिन यहां कोई देखभाल नहीं हुई। इसके बाद वह सुबह फिर से अस्पताल लेकर आई तो चिकित्सकों ने भर्ती करने से मना कर दिया। हालांकि काफी मिन्नत करने के बाद कुछ दवा दी है।
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