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Jind News: राजनीतिक जमीन बचाने के लिए अब विधानसभा बची
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जींद। पूरे हरियाणा में बांगर के शेर के नाम से विख्यात पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के हाथ कांग्रेस के टिकट वितरण के बाद खाली रह गए। जिस समय वह भाजपा में थे, उस समय भाजपा का जजपा से गठबंधन था। बीरेंद्र सिंह को दुष्यंत चौटाला खतरा नजर आ रहे थे, इसलिए वह बार-बार भाजपा हाईकमान से गठबंधन तोड़ने की अपील करते थे। अब गठबंधन टूटा, बीरेंद्र सिंह भाजपा में भी नहीं रहे और अपने बेटे को फिर से सांसद बनाने की जिस उम्मीद के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे, वह भी टूट गई। अब बीरेंद्र सिंह को अपनी राजनीतिक बचानी है तो उनको विधानसभा में टिकट हासिल करना होगा और जीत भी दर्ज करनी होगी।
1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने घोषणा की थी कि बीरेंद्र सिंह को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन राजीव गांधी की असमय मौत हो गई तो बीरेंद्र सिंह की आशाओं पर भी पानी फिर गया। कांग्रेस में अनदेखी के चलते बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कहा और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा में भेजा और केंद्रीय इस्पात मंत्री बनाया। इसके अलावा उनके बेटे बृजेंद्र सिंह को हिसार से लोकसभा का टिकट भी दिया। बृजेंद्र सिंह भी मोदी लहर में जीते और हिसार से सांसद बने। कुछ दिन पहले बीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर भी अनदेखी के आरोप लगाए और फिर घर वापसी कर ली। उनकी पत्नी पूर्व विधायक प्रेमलता ने लगातार बयान दिए कि बृजेंद्र सिंह को हिसार या सोनीपत से कांग्रेस की टिकट मिलेगी, लेकिन कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा की तो उनमें बृजेंद्र सिंह का नाम नहीं था। इसके बाद सोशल मीडिया पर हास्य के फोटो वायरल हुए।
कभी कांग्रेस में बांटते थे टिकट, खुद के बेटे को नहीं मिली
बीरेंद्र सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। एक समय था, जब कांग्रेस में टिकटों के वितरण में वह अहम भूमिका निभाते थे। वह हिमाचल व उत्तराखंड के प्रभारी भी रहे। बीरेंद्र सिंह 52 साल के अपने राजनीतिक सफर में पांच बार विधायक, एक बार लोकसभा व दो बार राज्यसभा सदस्य रहे। हरियाणा और केंद्र में मंत्री भी रहे। अपने मुखर अंदाज के चलते बीरेंद्र सिंह हमेशा सुर्खियों में रहे। चाहे वह पूर्व सीएम भजनलाल रहे हों या उनके फुफेरे भाई पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सभी को उन्होंने आड़े हाथों लिया।
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28 को जींद में बीरेंद्र सिंह के साथियों की बैठक
अब 28 अप्रैल को जींद के एक होटल में बीरेंद्र सिंह के साथियों ने बैठक बुलाई है। इस बैठक में निवर्तमान सांसद बृजेंद्र सिंह भी शामिल होंगे। इस बैठक का एजेंडा क्या रहेगा और इसमें क्या निर्णय लिया जाएगा, इसका तो किसी ने खुलासा नहीं किया है, लेकिन बैठक में काफी महत्पूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।
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1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने घोषणा की थी कि बीरेंद्र सिंह को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन राजीव गांधी की असमय मौत हो गई तो बीरेंद्र सिंह की आशाओं पर भी पानी फिर गया। कांग्रेस में अनदेखी के चलते बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कहा और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा में भेजा और केंद्रीय इस्पात मंत्री बनाया। इसके अलावा उनके बेटे बृजेंद्र सिंह को हिसार से लोकसभा का टिकट भी दिया। बृजेंद्र सिंह भी मोदी लहर में जीते और हिसार से सांसद बने। कुछ दिन पहले बीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर भी अनदेखी के आरोप लगाए और फिर घर वापसी कर ली। उनकी पत्नी पूर्व विधायक प्रेमलता ने लगातार बयान दिए कि बृजेंद्र सिंह को हिसार या सोनीपत से कांग्रेस की टिकट मिलेगी, लेकिन कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा की तो उनमें बृजेंद्र सिंह का नाम नहीं था। इसके बाद सोशल मीडिया पर हास्य के फोटो वायरल हुए।
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कभी कांग्रेस में बांटते थे टिकट, खुद के बेटे को नहीं मिली
बीरेंद्र सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। एक समय था, जब कांग्रेस में टिकटों के वितरण में वह अहम भूमिका निभाते थे। वह हिमाचल व उत्तराखंड के प्रभारी भी रहे। बीरेंद्र सिंह 52 साल के अपने राजनीतिक सफर में पांच बार विधायक, एक बार लोकसभा व दो बार राज्यसभा सदस्य रहे। हरियाणा और केंद्र में मंत्री भी रहे। अपने मुखर अंदाज के चलते बीरेंद्र सिंह हमेशा सुर्खियों में रहे। चाहे वह पूर्व सीएम भजनलाल रहे हों या उनके फुफेरे भाई पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सभी को उन्होंने आड़े हाथों लिया।
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28 को जींद में बीरेंद्र सिंह के साथियों की बैठक
अब 28 अप्रैल को जींद के एक होटल में बीरेंद्र सिंह के साथियों ने बैठक बुलाई है। इस बैठक में निवर्तमान सांसद बृजेंद्र सिंह भी शामिल होंगे। इस बैठक का एजेंडा क्या रहेगा और इसमें क्या निर्णय लिया जाएगा, इसका तो किसी ने खुलासा नहीं किया है, लेकिन बैठक में काफी महत्पूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।