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नोट बंदी की मार से मजदूर हो रहे बेकार
jind
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:19 AM IST
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एसबीओपी सफीदों गेट की एटीएम पर लगी लोगों की भीड़।
- फोटो : bureau
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नोटबंदी के 28 दिन बाद मजदूरों पर भी इसका व्यापक असर पड़ना शुरू हो गया है। इससे असंगठित क्षेत्र के करीब सात हजार मजदूर बेकार हो गए हैं। इनमें निर्माण क्षेत्र में और जींद की प्रसिद्ध ट्रक बाडी मेकिंग इंडस्ट्री में काम करने वाले मजदूर हैं। मजदूरों को समय पर पैसा नहीं मिलने के कारण कई प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौट गए हैं। अब इसका असर इस उद्योग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जो मजदूर बचे हैं, उनके सामने भी रोजी रोटी का संकट आन खड़ा हुआ है। वहीं ट्रक बॉडी के काम लगे व्यवसायियों के अनुसार काम महज 20 प्रतिशत तक सिमट गया है। पिछले कुछ सालों में जींद में ट्रक बाडी उद्योग तेजी से विकसित हुआ है। जींद में करीब 100 ट्रक बॉडी मेकर हैं, जिनमें करीब तीन हजार मजदूर काम करते थे। नोट बंदी के बाद इन मजदूरों के सामने पेट पालने तक का संकट आ खड़ा हुआ और अधिकतर मजदूर अपने घर को लौट गए। इस उद्योग में कुशल कारीगर राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आते हैं। ट्रक बाडी उद्योग के मालिकों के अनुसार मजदूरों को समय पर पैसा नहीं दिया जा सका, इससे 50 प्रतिशत से अधिक मजदूर वापस घरों को लौट गए हैं। इसका असर उनके काम पर भी पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार एक ट्रक की- बाडी तैयार करने में दस लोग लगते हैं। ऐसे में ये लोग दस दिन में ट्रक की बाडी तैयार होती है। अब एक ट्रक की बाडी तैयार करने में अधिकतर तीन से चार लोग ही काम कर रहे हैं। ऐसे में गाड़ी करीब एक महीने में तैयार हो रही है।
निर्माण मजदूर भी खाली, प्रवासी मजदूर कर रहे हैं घरों का रुख
निर्माण क्षेत्र में करीब चार हजार मजदूर प्रतिदिन चौक पर चार हजार मजदूर काम की तलाश में आते थे। अब इनकी संख्या करीब आधी रह गई है। इनमें से भी चुनिंदा लोगों को ही काम मिल पाता है।
नकदी में होता है भुगतान
असंगठित क्षेत्र में अधिकतर मजदूरों को काम समाप्त करने पर शाम को ही भुगतान कर दिया जाता है। मजदूरी 400 से 600 रुपये प्रतिदिन है। यदि दो मजदूरों से भी कोई काम करवाता है तो उसे 800 से 1200 रुपये चाहिए। बैंक से पैसे मिल भी जाएं तो दो हजार रुपये का नोट मिलता है। इससे भुगतान करवाना संभव नहीं है। वहीं पैसे नहीं होने के कारण निर्माण कार्य रुक गए हैं। ऐसे में मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। इसका व्यापक असर पड़ रहा है।
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- कपूर सिंह, तहसील सचिव, सीआईटीयू
चौपट हो गया काम
नोटबंदी से काम चौपट हो गया है। पैसे नहीं होने से पीछे से माल नहीं मिल रहा है। वहीं मजदूरों को भी पैसे नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते काफी मजदूर घरों को लौट गए हैं। एक समय में जींद में करीब 500 ट्रकों की बाडी बनाई जाती है, लेकिन अब माल नहीं मिलने से अधिकतर ट्रक खड़े हैं। लेबर को भी भारी परेशानी आ रही है। यदि चेक से भी भुगतान करें तो मजदूर को पैसे निकलवाने के लिए पूरा दिन लाइन में लगना पड़ता है। इससे मजदूरों की संख्या आधी से भी कम रह गई है।
- रहीमुदीन, ट्रक बॉडी मेकर
बैंकों में नकदी का संकट जारी
28वें दिन भी बैंकों और एटीएम में नकदी का संकट जारी रहा। एक्सिस बैंक, आईडीबीआई, पीएनबी, एसबीओपी सफीदों गेट, एसबीआई रोहतक रोड, एसबीआई सिटी सेंटर, एसबीआई रानी तालाब के अलावा एक्सिस बैंक की एटीएम, एसबीओपी सफीदों गेट, एसबीआई रोहतक रोड और रानी तालाब स्थित एसबीआई जैसी कुछ चुनिंदा एटीएम से ही कैश की निकासी हो सकी। वहीं बैंक से सिर्फ दो हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक की नकदी मिली।
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निर्माण मजदूर भी खाली, प्रवासी मजदूर कर रहे हैं घरों का रुख
निर्माण क्षेत्र में करीब चार हजार मजदूर प्रतिदिन चौक पर चार हजार मजदूर काम की तलाश में आते थे। अब इनकी संख्या करीब आधी रह गई है। इनमें से भी चुनिंदा लोगों को ही काम मिल पाता है।
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नकदी में होता है भुगतान
असंगठित क्षेत्र में अधिकतर मजदूरों को काम समाप्त करने पर शाम को ही भुगतान कर दिया जाता है। मजदूरी 400 से 600 रुपये प्रतिदिन है। यदि दो मजदूरों से भी कोई काम करवाता है तो उसे 800 से 1200 रुपये चाहिए। बैंक से पैसे मिल भी जाएं तो दो हजार रुपये का नोट मिलता है। इससे भुगतान करवाना संभव नहीं है। वहीं पैसे नहीं होने के कारण निर्माण कार्य रुक गए हैं। ऐसे में मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। इसका व्यापक असर पड़ रहा है।
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- कपूर सिंह, तहसील सचिव, सीआईटीयू
चौपट हो गया काम
नोटबंदी से काम चौपट हो गया है। पैसे नहीं होने से पीछे से माल नहीं मिल रहा है। वहीं मजदूरों को भी पैसे नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते काफी मजदूर घरों को लौट गए हैं। एक समय में जींद में करीब 500 ट्रकों की बाडी बनाई जाती है, लेकिन अब माल नहीं मिलने से अधिकतर ट्रक खड़े हैं। लेबर को भी भारी परेशानी आ रही है। यदि चेक से भी भुगतान करें तो मजदूर को पैसे निकलवाने के लिए पूरा दिन लाइन में लगना पड़ता है। इससे मजदूरों की संख्या आधी से भी कम रह गई है।
- रहीमुदीन, ट्रक बॉडी मेकर
बैंकों में नकदी का संकट जारी
28वें दिन भी बैंकों और एटीएम में नकदी का संकट जारी रहा। एक्सिस बैंक, आईडीबीआई, पीएनबी, एसबीओपी सफीदों गेट, एसबीआई रोहतक रोड, एसबीआई सिटी सेंटर, एसबीआई रानी तालाब के अलावा एक्सिस बैंक की एटीएम, एसबीओपी सफीदों गेट, एसबीआई रोहतक रोड और रानी तालाब स्थित एसबीआई जैसी कुछ चुनिंदा एटीएम से ही कैश की निकासी हो सकी। वहीं बैंक से सिर्फ दो हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक की नकदी मिली।