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होनी को कोई भी टाल नहीं सकता : अहिरका
Fri, 23 May 2025 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 23 May 2025 01:26 AM IST
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जींद। असमर्थ महिला कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक पंडित रामनिवास अहिरका ने नरवाना रोड पर ट्रस्ट के कार्यालय में गायत्री यज्ञ के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि होनी को कोई नहीं टाल सकता।
उन्होंने कहा कि एक दिन पांडवों के पोते जन्मेजय ने वेद व्यास से कहा कि मुनिवर यदि कृष्ण भगवान थे तो उन्होंने महाभारत के युद्ध को क्यों नहीं रोका। वेद व्यास ने कहा कि बेटा आज तक होनी को कोई भी नहीं टाल सका।
आज से 5 वर्ष बाद तुम दक्षिण दिशा में शिकार खेलने जाओगे, वहां समुद्र के किनारे तुम्हें एक सुंदर युवती मिलेगी। तुम उसे पटरानी मत बनाना, वरना वह आपकी मृत्यु का कारण बनेगी। जन्मेजय ने होनी को टालने के लिए उसी दिन से शिकार खेलना बंद कर दिया, लेकिन ठीक 5 वर्ष बाद उसने-अपने मन को समझाया कि उत्तर दिशा में शिकार खेलने में क्या हर्ज है, लेकिन शिकार दौड़ते-दौड़ते राजा को दक्षिण दिशा में ले गया। मन को समझाते-समझाते जन्मेजय से वे सभी काम हुए, जिन्हें करने से वेद व्यास ने मना किया था।
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आखिर विवाह संस्कार कराने के बाद अचानक हवा के तेज झोंके से रानी का चीर, उसके सिर से उतर गया और युवा रानी के सुंदर मुख को देखकर हंसने लगे। राजा ने क्रोध से सभी के सिर उनकी धड़ से अलग कर दिए। राजा को ब्रह्म हत्या के दोष से तुरंत कोढ़ लग गया और कई उपायों के बावजूद भी उसकी मृत्यु का कारण बना। संवाद
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उन्होंने कहा कि एक दिन पांडवों के पोते जन्मेजय ने वेद व्यास से कहा कि मुनिवर यदि कृष्ण भगवान थे तो उन्होंने महाभारत के युद्ध को क्यों नहीं रोका। वेद व्यास ने कहा कि बेटा आज तक होनी को कोई भी नहीं टाल सका।
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आज से 5 वर्ष बाद तुम दक्षिण दिशा में शिकार खेलने जाओगे, वहां समुद्र के किनारे तुम्हें एक सुंदर युवती मिलेगी। तुम उसे पटरानी मत बनाना, वरना वह आपकी मृत्यु का कारण बनेगी। जन्मेजय ने होनी को टालने के लिए उसी दिन से शिकार खेलना बंद कर दिया, लेकिन ठीक 5 वर्ष बाद उसने-अपने मन को समझाया कि उत्तर दिशा में शिकार खेलने में क्या हर्ज है, लेकिन शिकार दौड़ते-दौड़ते राजा को दक्षिण दिशा में ले गया। मन को समझाते-समझाते जन्मेजय से वे सभी काम हुए, जिन्हें करने से वेद व्यास ने मना किया था।
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आखिर विवाह संस्कार कराने के बाद अचानक हवा के तेज झोंके से रानी का चीर, उसके सिर से उतर गया और युवा रानी के सुंदर मुख को देखकर हंसने लगे। राजा ने क्रोध से सभी के सिर उनकी धड़ से अलग कर दिए। राजा को ब्रह्म हत्या के दोष से तुरंत कोढ़ लग गया और कई उपायों के बावजूद भी उसकी मृत्यु का कारण बना। संवाद