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15 फरवरी के बाद किसी भी फ्रंटलाइन कर्मी को नहीं दी जाएगी पहली डोज
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जींद। कोरोना को हराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाया वैक्सीनेशन का चक्रव्यूह कमजोर हो गया है। प्रथम में शामिल करीब सात हजार स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने अभी कोरोना का टीका नहीं लगवाया है। वहीं, मंगलवार से विभाग फ्रंटलाइन कर्मियों को दूसरी डोज देने की तैयार में जुट गया है। अभियान शुरू हुए करीब एक महीना हो चुका है, लेकिन अभी तक लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। अभी तक जिले में करीब पांच हजार ने ही टीका लगवाया है। अब विभाग ने फैसला लिया है कि 15 फरवरी के बाद किसी भी फ्रंटलाइन वर्कर को पहली डोज नहीं लगाई जाएगी।
बता दें कि 16 जनवरी से जिले में कोरोना वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू हो गया था। जिन लोगों को 16 जनवरी को पहली डोज लगी थी, दूसरी डोज उसके 28 दिन बाद लगानी होती है। इसलिए इन लोगों को अब 16 फरवरी से दूसरी डोज लगाने की स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी कर ली है। जिले में कोरोना वैक्सीन की डोज लगभग 62.2 प्रतिशत लोगों को ही लगी है। यह बहुत ही कम है। इनमें सबसे अधिक आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर ऐसी हैं, जिन्होंने इस वैक्सीन से दूरी बनाए रखी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को जागरूक करने के लिए बैठकें की लेकिन इसके बावजूद कम ही आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर ने वैक्सीन लगवाई है। अब स्वास्थ्य विभाग इनको छोड़कर आगे कदम बढ़ा रहा है।
वैक्सीन की काफी डोज हुई बेकार
कोरोना वैक्सीन की एक वॉयल में दस डोज होती हैं। यह दस लोगों को लगाई जाती है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि जब कोई वॉयल खुल जाती है तो उसकी डोज को अधिक से अधिक चार घंटे तक प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद यह डोज खराब हो जाती है। ऐसा काफी जगह हुआ है, जब एक वॉयल खोलने के बाद उसमें से केवल एक ही व्यक्ति को डोज लग पाई। इस कारण बाकी डोज खराब हुई है।
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15 फरवरी के बाद फ्रंट लाइन वर्कर को पहली डोज नहीं लगाई जाएगी। मंगलवार से दूसरी डोज लगाने की तैयारी कर ली है। जहां तक डोज खराब होने का प्रश्न है, यह दूसरी डोज लगाने के बाद ही पता चलेगा कि कितनी डोज खराब हुई हैं। दूसरी डोज लगाने के लिए बहुत कम स्थानों पर वैक्सीनेशन का काम किया जाएगा।
- डॉ. नवनीत सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।
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बता दें कि 16 जनवरी से जिले में कोरोना वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू हो गया था। जिन लोगों को 16 जनवरी को पहली डोज लगी थी, दूसरी डोज उसके 28 दिन बाद लगानी होती है। इसलिए इन लोगों को अब 16 फरवरी से दूसरी डोज लगाने की स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी कर ली है। जिले में कोरोना वैक्सीन की डोज लगभग 62.2 प्रतिशत लोगों को ही लगी है। यह बहुत ही कम है। इनमें सबसे अधिक आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर ऐसी हैं, जिन्होंने इस वैक्सीन से दूरी बनाए रखी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को जागरूक करने के लिए बैठकें की लेकिन इसके बावजूद कम ही आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर ने वैक्सीन लगवाई है। अब स्वास्थ्य विभाग इनको छोड़कर आगे कदम बढ़ा रहा है।
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वैक्सीन की काफी डोज हुई बेकार
कोरोना वैक्सीन की एक वॉयल में दस डोज होती हैं। यह दस लोगों को लगाई जाती है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि जब कोई वॉयल खुल जाती है तो उसकी डोज को अधिक से अधिक चार घंटे तक प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद यह डोज खराब हो जाती है। ऐसा काफी जगह हुआ है, जब एक वॉयल खोलने के बाद उसमें से केवल एक ही व्यक्ति को डोज लग पाई। इस कारण बाकी डोज खराब हुई है।
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15 फरवरी के बाद फ्रंट लाइन वर्कर को पहली डोज नहीं लगाई जाएगी। मंगलवार से दूसरी डोज लगाने की तैयारी कर ली है। जहां तक डोज खराब होने का प्रश्न है, यह दूसरी डोज लगाने के बाद ही पता चलेगा कि कितनी डोज खराब हुई हैं। दूसरी डोज लगाने के लिए बहुत कम स्थानों पर वैक्सीनेशन का काम किया जाएगा।
- डॉ. नवनीत सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।