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नई टेक्नोलॉजी अपना अधिक आमदनी कर सकते हैं किसान : डॉ. विजय
Tue, 06 Feb 2024 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 06 Feb 2024 12:11 AM IST
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जींद। उद्यान विभाग की तरफ से नरवाना के गांव धरौदी में सोमवार को जिलास्तरीय प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका विषय प्राकृतिक खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ाना रहा। प्राकृतिक खेती पर आधारित कार्यशाला में जिला उद्यान अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत की।
उन्होंने कहा कि अब किसानों को खेती में बदलाव लागने की जरूरत है। इस बदलाव में प्राकृतिक तरीके से बागवानी खेती सबसे बेहतर विकल्प है। बागवानी में नई-नई टेक्नोलॉजी अपनाकर किसान अधिक आमदनी ले सकते हैं। जब हम प्राकृतिक खेती करेंगे तो खेत में यूरिया, डीपीई और कोई भी कीटनाशक नहीं डालेंगे तो खेत में मौजूद केंचुएं अपना परिवार बढ़ाएंगे। एक एकड़ में लाखों की संख्या में केंचुए बिना पैसे के मजदूर की तरह दिन-रात काम करते हैं। केंचुए सारी जमीन को मुलायम बना देते हैं। वह नीचे की जमीन को उलट कर ऊपर ला देते हैं। इससे सभी खनिच पदार्थ ऊपर आ जाते हैं और खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। इस दौरान सेवानिवृत्त ब्लॉक कृषि अधिकारी व प्राकृतिक खेती विशेषक्ष डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को जिवामृत, बीजामृत आदि जैविक उत्पाद बनाने की संपूर्ण जानकारी दी। कार्यशाला में 250 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर एसडीओ डॉ. बलजीत लाठर, उद्यान विकास अधिकारी डॉ. दीपक कुमार भी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि अब किसानों को खेती में बदलाव लागने की जरूरत है। इस बदलाव में प्राकृतिक तरीके से बागवानी खेती सबसे बेहतर विकल्प है। बागवानी में नई-नई टेक्नोलॉजी अपनाकर किसान अधिक आमदनी ले सकते हैं। जब हम प्राकृतिक खेती करेंगे तो खेत में यूरिया, डीपीई और कोई भी कीटनाशक नहीं डालेंगे तो खेत में मौजूद केंचुएं अपना परिवार बढ़ाएंगे। एक एकड़ में लाखों की संख्या में केंचुए बिना पैसे के मजदूर की तरह दिन-रात काम करते हैं। केंचुए सारी जमीन को मुलायम बना देते हैं। वह नीचे की जमीन को उलट कर ऊपर ला देते हैं। इससे सभी खनिच पदार्थ ऊपर आ जाते हैं और खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। इस दौरान सेवानिवृत्त ब्लॉक कृषि अधिकारी व प्राकृतिक खेती विशेषक्ष डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को जिवामृत, बीजामृत आदि जैविक उत्पाद बनाने की संपूर्ण जानकारी दी। कार्यशाला में 250 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर एसडीओ डॉ. बलजीत लाठर, उद्यान विकास अधिकारी डॉ. दीपक कुमार भी मौजूद रहे।
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