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जिंदगी में कभी किसी चीज को बेकार मत समझना : लब्धि प्रभा
Thu, 21 Sep 2023 12:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 21 Sep 2023 12:20 PM IST
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जैन स्थानक में महापर्व संवत्सरी के अगले दिन पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
उचाना। जैन धर्म के महापर्व संवत्सरी के अगले दिन तेरापंथ भवन उचाना मंडी में प्रार्थना सभा आयोजित की गई। शहर के साथ-साथ आस-पास के गांवों से पहुंच कर पौषद (व्रत) रखने वाले श्रद्धालुओं ने प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया।
लब्धि प्रभा ने कहा कि वर्षा पहाड़ पर होती है, लेकिन पहाड़ कभी नहीं भरते। वह सदा रीते के रीते रहते हैं। नदी, नाले, गड्ढे भर जाते हैं। जो खाली होते हैं, वे ही भरते हैं। संतों के प्रवचन में पहाड़ बनकर मत आना, अहंकार लेकर मत माना। खाली आओगे तो संत तुम्हें लबालब भर देंगे। संत तुम्हें कोई उपदेश नहीं देंगे, बल्कि जीवन का उद्देश्य बताएंगे। आदेश नहीं देंगे, बल्कि आचरण का पाठ पढ़ाएंगे।
प्रवचन तो एक बहाना है, बल्कि ये संत तुम्हें कंस से हंस व हंस से परमहंस बनाने के लिए आए है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी किसी को बेकार मत समझना। जो बंद घड़ी होती है, रोज दो बार सही समय बताती है। लोग कहते हैं दुख बुरा होता है। जब भी आता है रुलाता-तड़पाता है पर हम कहते है दुख अच्छा होता है। जब भी आता है कुछ ना कुछ सिखा देता है। शरीर मिट्टी का बना हुआ है। इससे ज्यादा यारी करना ठीक नहीं। तुम चिन्मय हो, शरीर पैकिंग है और आत्मा उसके अंदर रखा माल है। कीमत पैकिंग की नहीं होती, बल्कि सामान की होती है। पैकिंग तो उतार कर अलग कर दिया जाता है या फेंक दिया जाता है। नजर सामान पर रहती है क्योंकि सामान महत्वपूर्ण है। दो चीजें हैं एक बैंक बैलेंस और दूसरा ब्रेन बैलेंस। आप कहते हैं मुझे बैंक बैलेंस चाहिए। जब ब्रेन बैलेंस ही नहीं रहेगा तो बैंक बैलेंस का क्या करेगा? जब शरीर में आत्मा ही नहीं रहेगी तो शरीर किस काम का।
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उचाना। जैन धर्म के महापर्व संवत्सरी के अगले दिन तेरापंथ भवन उचाना मंडी में प्रार्थना सभा आयोजित की गई। शहर के साथ-साथ आस-पास के गांवों से पहुंच कर पौषद (व्रत) रखने वाले श्रद्धालुओं ने प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया।
लब्धि प्रभा ने कहा कि वर्षा पहाड़ पर होती है, लेकिन पहाड़ कभी नहीं भरते। वह सदा रीते के रीते रहते हैं। नदी, नाले, गड्ढे भर जाते हैं। जो खाली होते हैं, वे ही भरते हैं। संतों के प्रवचन में पहाड़ बनकर मत आना, अहंकार लेकर मत माना। खाली आओगे तो संत तुम्हें लबालब भर देंगे। संत तुम्हें कोई उपदेश नहीं देंगे, बल्कि जीवन का उद्देश्य बताएंगे। आदेश नहीं देंगे, बल्कि आचरण का पाठ पढ़ाएंगे।
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प्रवचन तो एक बहाना है, बल्कि ये संत तुम्हें कंस से हंस व हंस से परमहंस बनाने के लिए आए है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी किसी को बेकार मत समझना। जो बंद घड़ी होती है, रोज दो बार सही समय बताती है। लोग कहते हैं दुख बुरा होता है। जब भी आता है रुलाता-तड़पाता है पर हम कहते है दुख अच्छा होता है। जब भी आता है कुछ ना कुछ सिखा देता है। शरीर मिट्टी का बना हुआ है। इससे ज्यादा यारी करना ठीक नहीं। तुम चिन्मय हो, शरीर पैकिंग है और आत्मा उसके अंदर रखा माल है। कीमत पैकिंग की नहीं होती, बल्कि सामान की होती है। पैकिंग तो उतार कर अलग कर दिया जाता है या फेंक दिया जाता है। नजर सामान पर रहती है क्योंकि सामान महत्वपूर्ण है। दो चीजें हैं एक बैंक बैलेंस और दूसरा ब्रेन बैलेंस। आप कहते हैं मुझे बैंक बैलेंस चाहिए। जब ब्रेन बैलेंस ही नहीं रहेगा तो बैंक बैलेंस का क्या करेगा? जब शरीर में आत्मा ही नहीं रहेगी तो शरीर किस काम का।
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