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Jind News: पराली जलाने में नरवाना टॉप पर, 24 गांव रेड जोन में
Sun, 26 Nov 2023 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 26 Nov 2023 11:48 PM IST
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26जेएनडी01-खोखली गांव के खेतों में लगी पराली में आग बुझाने पहुंची कृषि विभाग की टीम। संवाद
जींद। जिले में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रतिदिन पराली जलाने वाले किसानों पर सख्ती कर जुर्माना लगाया जा रहा है लेकिन उसके बावजूद भी किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब तक जिले में 272 मामले पराली जलाने के आ चुके हैं। इनमें 271 किसानों पर छह लाख 27 हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। अभी जिले के 24 गांव पराली जलाने के मामले में रेड जोन में हैं।
पराली जलाने पर नरवाना प्रथम स्थान पर है, जहां 104 किसानों के चालान किए जा चुके हैं। वहीं उचाना दूसरे स्थान पर है, जहां 71 किसानों के चालान किए गए हैं। विभाग को हरसेक एप से अब तक कुल 329 जगह फायर लोकेशन मिली हैं। विभाग के जांच करने पर 271 जगह आग लगी मिली। कृषि विभाग को अलेवा में 32, जींद में 19, जुलाना में 17, पिल्लूखेड़ा में 16, सफीदों में 37, नरवाना में 131, उचाना में 77 फायर लोकेशन मिली है। जब टीमें मौके पर पहुंची तो अलेवा में 23, जींद में 11, जुलाना में 16, पिल्लूखेड़ा में 14, सफीदों में 32, नरवाना में 104, उचाना में 72 जगह आग लगी मिली। टीमों को जिलेभर में कुल फायर लोकेश 329 मिली और 272 जगह आग लगी पाई गई। हालांकि वर्ष 2022 में विभाग को 492 लोकेशन मिली थी जबकि इस वर्ष 329 जगह लोकेशन मिली। रविवार को जींद जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 256 रहा, जो बेहद गंभीर (लंबे समय तक एक्सपोजर पर ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ) की श्रेणी में आता है।
किसानों पर लगाया जुर्माना
ब्लॉक
चालान किए
जुर्माना वसूला
अलेवा
23
52500
जींद
11
25000
जुलाना
16
27500
पिल्लूखेड़ा
14
35000
सफीदों
32
80000
नरवाना
104
252500
उचाना
71
155000
कुल
271
627500
ये भी जानिये...
पराली जलाने से मीथेन, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बनडाईऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर जैसी गैसों का उत्सर्जन होता है। इससे वायुमंडल में धुंध सी छा जाती है जो पर्यावरण और मनुष्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। वहीं पराली जलाने से राख पैदा होती है, जहां पराली जलाई जाती है, उस जगह पर पाई जाने वाले सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता या उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
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पराली के धुएं से फेफड़े की समस्या, सांस लेने में तकलीफ, कैंसर समेत अन्य रोग, दिल के मरीजों को समस्या, आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थमा और हाईपर टेंशन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
-- डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल जींद
जहां भी पराली जलाने की लोकेशन मिलती है वहीं विभागीय टीमें कार्रवाई कर रही हैं। पराली जलाने पर दो एकड़ भूमि तक 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा रहा है।
-- डॉ. गिरिश नागपाल, कृषि उपनिदेशक, जींद
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पराली जलाने पर नरवाना प्रथम स्थान पर है, जहां 104 किसानों के चालान किए जा चुके हैं। वहीं उचाना दूसरे स्थान पर है, जहां 71 किसानों के चालान किए गए हैं। विभाग को हरसेक एप से अब तक कुल 329 जगह फायर लोकेशन मिली हैं। विभाग के जांच करने पर 271 जगह आग लगी मिली। कृषि विभाग को अलेवा में 32, जींद में 19, जुलाना में 17, पिल्लूखेड़ा में 16, सफीदों में 37, नरवाना में 131, उचाना में 77 फायर लोकेशन मिली है। जब टीमें मौके पर पहुंची तो अलेवा में 23, जींद में 11, जुलाना में 16, पिल्लूखेड़ा में 14, सफीदों में 32, नरवाना में 104, उचाना में 72 जगह आग लगी मिली। टीमों को जिलेभर में कुल फायर लोकेश 329 मिली और 272 जगह आग लगी पाई गई। हालांकि वर्ष 2022 में विभाग को 492 लोकेशन मिली थी जबकि इस वर्ष 329 जगह लोकेशन मिली। रविवार को जींद जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 256 रहा, जो बेहद गंभीर (लंबे समय तक एक्सपोजर पर ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ) की श्रेणी में आता है।
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किसानों पर लगाया जुर्माना
ब्लॉक
चालान किए
जुर्माना वसूला
अलेवा
23
52500
जींद
11
25000
जुलाना
16
27500
पिल्लूखेड़ा
14
35000
सफीदों
32
80000
नरवाना
104
252500
उचाना
71
155000
कुल
271
627500
ये भी जानिये...
पराली जलाने से मीथेन, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बनडाईऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर जैसी गैसों का उत्सर्जन होता है। इससे वायुमंडल में धुंध सी छा जाती है जो पर्यावरण और मनुष्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। वहीं पराली जलाने से राख पैदा होती है, जहां पराली जलाई जाती है, उस जगह पर पाई जाने वाले सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इससे फसलों की पैदावार कम हो जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता या उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
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पराली के धुएं से फेफड़े की समस्या, सांस लेने में तकलीफ, कैंसर समेत अन्य रोग, दिल के मरीजों को समस्या, आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थमा और हाईपर टेंशन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
जहां भी पराली जलाने की लोकेशन मिलती है वहीं विभागीय टीमें कार्रवाई कर रही हैं। पराली जलाने पर दो एकड़ भूमि तक 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा रहा है।