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Jind News: नप ने पांच हजार बंदर पकड़वाए, फिर भी आतंक बरकरार
Mon, 02 Sep 2024 02:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 02 Sep 2024 02:51 AM IST
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01जेएनडी28-शहर की एक कॉलोनी में मकानों पर लगाई गई ग्रिल। संवाद
जींद। शहर में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदर रोजाना बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को शिकार बना रहे हैं, लेकिन अभी शहरवासियों को बंदरों से निजात मिलने वाली नहीं है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के चलते नगर परिषद अभी इनको पकड़ने के लिए नए टेंडर नहीं लगा सकती। इसको लेकर विधानसभा चुनाव के बाद ही टेंडर लगाए जाएंगे।
नगर परिषद बंदरों को पकड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च कर चुकी है, मगर इनकी संख्या कम नहीं हो रही है। नगर परिषद ने कुछ माह पहले इनको पकड़ने का ठेका दिया था। ठेकेदार को प्रति बंदर 1700 रुपये दिए गए थे। नगर परिषद के अधिकारियों ने दावा किया था कि एजेंसी ने पांच हजार बंदर पकड़ कर जंगल में छोड़े हैं। पांच हजार का ठेका होने के कारण एजेंसी ने उतने बंद पकड़कर काम बंद कर दिया। दोबारा अभियान शुरू करवाने के लिए नगर परिषद को फिर से टेंडर करना होगा या मौजूदा एजेंसी से ये काम करवाने के लिए अनुमति लेनी होगी। ये प्रक्रिया विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव हो पाएगी। बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा बीड़ बड़ा वन के साथ लगती कॉलोनी अजमेर बस्ती, खेम नगर, बुढ़ा बाबा बस्ती, बाल आश्रम बस्ती, भूपेंद्र नगर में है।
नागरिक अस्पताल में हर माह आ रहे 50 से ज्यादा मामले
शहरवासी बंदरों के आतंक से कई साल से परेशान हैं। नागरिक अस्पताल में हर माह बंदर के काटने के 50 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। बंदर छतों पर बैठे रहते हैं, जिससे बच्चे और महिलाएं छत पर जाने से डरती हैं। स्कीम नंबर 56, पांच, छह और 19, अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड सहित कई कॉलोनियों में लोगों ने बंदरों से बचने के लिए घर पर लोहे व स्टील के जाल लगाए हुए हैं। लोगों की बार-बार नगर परिषद से मांग करने के बावजूद तीन साल तक शहर में बंदर पकड़ने का अभियान बंद रहा। पार्षदों ने हाउस की बैठकों में मुद्दा उठाया, जिसके बाद बंदर पकड़ने का ठेका दिया गया था। पिछले कुछ समय से एजेंसी ने बंदर पकड़ने का अभियान बंद किया हुआ है।
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बड़ा बीड़ वन से आ रहे बंदर
शहर के नजदीक बड़ा बीड़ वन है। जहां हजारों बंदर रहते हैं। वन में दूसरे जिलों से भी बंदर छोड़ जाते हैं। यहां से ही बंदर शहर की कॉलोनियों में घुस जाते हैं। शहर में नगर परिषद के पांच हजार बंदर पकड़वाने के बावजूद अभियान बेअसर होने का ये बड़ा कारण माना जा रहा है।
नरवाना में भी अभियान हुआ बंद
कुछ माह पहले नरवाना शहर में भी बंदर पकड़ने का अभियान शुरू हुआ था, लेकिन कुछ दिन बाद ही एजेंसी काम छोड़ दिया। कारण यह है कि जींद में टेंडर लेने वाली एजेंसी को ही नरवाना में बंदर पकड़ने का काम दिया गया था। इसके बाद एजेंसी ने वहां काम बंद कर दिया था, लेकिन उसके बाद दोबारा अभियान शुरू नहीं हो पाया है।
एजेंसी को जितने बंदर पकड़ने का लक्ष्य दिया गया था उतने पकड़ कर काम बंद कर दिया है। आचार संहिता के दौरान टेंडर नहीं कर सकते। आचार संहिता हटने के बाद टेंडर देकर दोबारा अभियान चलाया जाएगा। -ऋषिकेश चौधरी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जींद।
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नगर परिषद बंदरों को पकड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च कर चुकी है, मगर इनकी संख्या कम नहीं हो रही है। नगर परिषद ने कुछ माह पहले इनको पकड़ने का ठेका दिया था। ठेकेदार को प्रति बंदर 1700 रुपये दिए गए थे। नगर परिषद के अधिकारियों ने दावा किया था कि एजेंसी ने पांच हजार बंदर पकड़ कर जंगल में छोड़े हैं। पांच हजार का ठेका होने के कारण एजेंसी ने उतने बंद पकड़कर काम बंद कर दिया। दोबारा अभियान शुरू करवाने के लिए नगर परिषद को फिर से टेंडर करना होगा या मौजूदा एजेंसी से ये काम करवाने के लिए अनुमति लेनी होगी। ये प्रक्रिया विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव हो पाएगी। बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा बीड़ बड़ा वन के साथ लगती कॉलोनी अजमेर बस्ती, खेम नगर, बुढ़ा बाबा बस्ती, बाल आश्रम बस्ती, भूपेंद्र नगर में है।
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नागरिक अस्पताल में हर माह आ रहे 50 से ज्यादा मामले
शहरवासी बंदरों के आतंक से कई साल से परेशान हैं। नागरिक अस्पताल में हर माह बंदर के काटने के 50 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। बंदर छतों पर बैठे रहते हैं, जिससे बच्चे और महिलाएं छत पर जाने से डरती हैं। स्कीम नंबर 56, पांच, छह और 19, अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड सहित कई कॉलोनियों में लोगों ने बंदरों से बचने के लिए घर पर लोहे व स्टील के जाल लगाए हुए हैं। लोगों की बार-बार नगर परिषद से मांग करने के बावजूद तीन साल तक शहर में बंदर पकड़ने का अभियान बंद रहा। पार्षदों ने हाउस की बैठकों में मुद्दा उठाया, जिसके बाद बंदर पकड़ने का ठेका दिया गया था। पिछले कुछ समय से एजेंसी ने बंदर पकड़ने का अभियान बंद किया हुआ है।
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बड़ा बीड़ वन से आ रहे बंदर
शहर के नजदीक बड़ा बीड़ वन है। जहां हजारों बंदर रहते हैं। वन में दूसरे जिलों से भी बंदर छोड़ जाते हैं। यहां से ही बंदर शहर की कॉलोनियों में घुस जाते हैं। शहर में नगर परिषद के पांच हजार बंदर पकड़वाने के बावजूद अभियान बेअसर होने का ये बड़ा कारण माना जा रहा है।
नरवाना में भी अभियान हुआ बंद
कुछ माह पहले नरवाना शहर में भी बंदर पकड़ने का अभियान शुरू हुआ था, लेकिन कुछ दिन बाद ही एजेंसी काम छोड़ दिया। कारण यह है कि जींद में टेंडर लेने वाली एजेंसी को ही नरवाना में बंदर पकड़ने का काम दिया गया था। इसके बाद एजेंसी ने वहां काम बंद कर दिया था, लेकिन उसके बाद दोबारा अभियान शुरू नहीं हो पाया है।
एजेंसी को जितने बंदर पकड़ने का लक्ष्य दिया गया था उतने पकड़ कर काम बंद कर दिया है। आचार संहिता के दौरान टेंडर नहीं कर सकते। आचार संहिता हटने के बाद टेंडर देकर दोबारा अभियान चलाया जाएगा। -ऋषिकेश चौधरी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जींद।

01जेएनडी28-शहर की एक कॉलोनी में मकानों पर लगाई गई ग्रिल। संवाद

01जेएनडी28-शहर की एक कॉलोनी में मकानों पर लगाई गई ग्रिल। संवाद

01जेएनडी28-शहर की एक कॉलोनी में मकानों पर लगाई गई ग्रिल। संवाद