{"_id":"62cb231c660bab7c3c21927c","slug":"more-workload-on-doctors-sick-system-needs-treatment-jind-news-rtk6519682137","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिकित्सकों पर ज्यादा काम का भार, बीमार व्यवस्था को ‘उपचार’ की दरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिकित्सकों पर ज्यादा काम का भार, बीमार व्यवस्था को ‘उपचार’ की दरकार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। नागरिक अस्पताल में तैनात चिकित्सकों के लिए एक तरफ कुआं है तो दूसरी तरफ खाई है। अस्पताल में 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 17 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। इन सभी चिकित्सकों पर ओपीडी की भी जिम्मेदारी है और अन्य कार्यक्रमों की भी। यदि ओपीडी में नहीं बैठें तो कार्यक्रमों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा सकता। यदि कार्यक्रमों की तरफ ध्यान दिया तो ओपीडी सही तरीके से नहीं हो सकती। किसी न किसी दिन कोई न कोई चिकित्सक प्रधान चिकित्सा अधिकारी से अपना कार्यक्रम छोड़ने तथा ओपीडी की तरफ ध्यान देने की बात कहता रहा है लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यक्रमों से छुट्टी नहीं मिल पाई है।
पिछले दिनों नागरिक अस्पताल से एक बच्चे को रेफर किया गया था। एंबुलेंस चालक जब बच्चे को पीजीआई रोहतक ले जा रहा था तो बच्चे की मौत हो गई। आरोप लगाए गए कि एंबुलेंस में ईएमटी नहीं था। बच्चा ऑक्सीजन पर था तो बीच रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गई। जब चालक दूसरा ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने लगा तो इस बीच बच्चे की मौत हो गई। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। एंबुलेंस के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान हैं। डॉ. जेके मान के पास लगभग दस कार्यक्रमों के कार्यभार हैं। इस मामले में उनके खिलाफ भी जांच चल रही है। इसको देखते हुए नागरिक अस्पताल में तैनात चिकित्सक भी अब डरने लगे हैं कि कहीं किसी कार्यक्रम में कोई दिक्कत हुई तो उन पर गाज गिर सकती है। इसी चिंता के कारण चिकित्सक ओपीडी भी करते हैं और अपने कार्यक्रमों को भी चला रहे हैं। कई चिकित्सक प्रतिदिन अपनी चिंता जाहिर भी करते हैं लेकिन प्रधान चिकित्सा अधिकारी भी चिकित्सकों की कमी से बेबस दिखाई देते हैं।
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को हो रही परेशानी
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण चिकित्सकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब भी कोई चिकित्सक किसी कार्यक्रम के लिए बाहर जाता है तो उसकी ओपीडी के सामने मरीजों की लाइन लग जाती है और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कोई चिकित्सक ऑपरेशन थिएटर में होता है तो भी ऐसी ही स्थिति बन जाती है।
विज्ञापन
इन 17 चिकित्सकों पर ओपीडी और कार्यक्रमों का भी कार्यभार
1. डॉ. राजेश भोला के पास ओपीडी के अलावा सबसे अधिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी है। वह दिनभर ओपीडी भी करते हैं तथा इसके अलावा नागरिक अस्पताल के सभी प्रकार के प्रशासनिक कार्य, आरटीआई, दिव्यांगता बोर्ड, इंटर्नशिप, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा, आउटसोर्स कर्मचारियों तथा सिक्योरिटी गार्ड को भी संभालते हैं। इसके अलावा कोई जांच का कार्य हो तो भी वे ही देखते हैं।
2. एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल एनस्थेसिया के चिकित्सक हैं। कोई भी ऑपरेशन हो, उनको मरीज को एनस्थेसिया देना पड़ता है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में कोरोना के वह नोडल अधिकारी हैं।
3. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया ओपीडी भी करते हैं तथा उनके पास एनएचएम का कार्यभार भी है। इसके अलावा वह शिशु वार्ड के इंचार्ज भी हैं।
4. एसएमओ डॉ. मंजूबाला स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। पूरा दिन वह ओपीडी करती हैं तथा उनके पास गायनी वार्ड का भी अतिरिक्त कार्यभार है।
5. वरिष्ठ दंत सर्जन डॉ. नीतू ओपीडी भी करती हैं तथा डॉ. राजेश भोला की अनुपस्थिति में उनके कार्य देखती हैं। इसके अलावा वह सफाई व्यवस्था का निरीक्षण भी करती हैं।
6. एसएमओ डॉ. सुषमलता स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं तथा ओपीडी भी करती हैं। उनके पास ऑपरेशन थिएटर का कार्यभार हैं तथा वह ऑक्सीजन, ईसीजी तथा जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संबधी काम भी देखती हैं।
7. मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनिता पूरा दिन ओपीडी करती हैं। इसके अलावा उनके पास कोविड मृत्यु का ऑडिट का कार्य, मेडिकल सर्टिफिकेट व मेडिकल वार्ड का चार्ज भी है।
8. मेडिकल ऑफिसर डॉ. अजय चालिया के पास ब्लड बैंक, डायलसिसि, जनरेटर सेट, आईपीएचल का कार्यभार भी है। वह आयुष्मान भारत योजना के भी नोडल अधिकारी हैं।
9. मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रदीप हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। वह ओपीडी भी करते हैं तथा मरीजों के ऑपरेशन भी करते हैं। इसके अलावा उनके पास सीटी स्कैन, एक्सरे, हड्ड्ी रोग वार्ड का कार्यभार भी है।
10. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संतलाल ओपीडी भी करते हैं तथा ऑपरेशन भी करते हैं। उनके पास फ्लू कार्नर, कोरोना सैंपलिंग तथा मोबाइल टीमों का कार्यभार भी है।
11. डॉ. विशाल वर्मा एनेस्थेसिया के चिकित्सक हैं, वह ऑपरेशन के समय मरीजों को बेहोश करते हैं तथा उनके पास पीएसए प्लांट का कार्यभार भी है।
12. दंत सर्जन डॉ. विशाल पोरस पूरा दिन ओपीडी भी करते हैं तथा वह ई-संजीवनी व बीएमडब्ल्यू के नोडल अधिकारी भी हैं।
13. दंत सर्जन डॉ. पूनम मान ओपीडी भी करते हैं तथा वह ई-उपचार व एनक्वास की नोडल अधिकारी भी हैं।
14. सर्जन डॉ. चंद्रमोहन ओपीडी भी करते हैं तथा मरीजों के ऑपरेशन भी करते हैं। इसके अलावा वह सर्जिकल वार्ड के प्रभारी भी हैं।
15. मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. संकल्प ओपीडी भी करते हैं। इसके अलावा मरीजों की काउंसलिंग करते हैं। वह एसकेएस के सदस्य सचिव भी हैं।
16. डॉ. सीमा बाल रोग विशेषज्ञ हैं तथा पूरा दिन ओपीडी करती हैं। इसके अलावा उनके पास एसएनसीयू तथा जन्म एवं मृत्यु का कार्यभार भी है।
17. ईएनटी डॉ. बृजेंद्र ओपीडी करते हैं तथा मरीजों के ऑपरेशन भी करते हैं। प्रतिदिन डॉ. बृजेंद्र की अकेले ही ओपीडी 200 के पार होती है। इसके अलावा उनके पास इमरजेंसी वार्ड, पोस्टमार्टम, बिजली पानी की व्यवस्था का अतिरिक्त कार्यभार है।
नागरिक अस्पताल में 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। फिलहाल उनके पास केवल 17 चिकित्सक हैं। इनसे ही काम चलाया जा रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण ही इन सभी को अतिरिक्त कार्यभार दिए गए हैं। चिकित्सकों की मांग को लेकर स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखे जा चुके हैं। उम्मीद है जल्द ही चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी।
-डॉ. लोकवीर, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
विज्ञापन
जींद। नागरिक अस्पताल में तैनात चिकित्सकों के लिए एक तरफ कुआं है तो दूसरी तरफ खाई है। अस्पताल में 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 17 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। इन सभी चिकित्सकों पर ओपीडी की भी जिम्मेदारी है और अन्य कार्यक्रमों की भी। यदि ओपीडी में नहीं बैठें तो कार्यक्रमों की तरफ ध्यान नहीं दिया जा सकता। यदि कार्यक्रमों की तरफ ध्यान दिया तो ओपीडी सही तरीके से नहीं हो सकती। किसी न किसी दिन कोई न कोई चिकित्सक प्रधान चिकित्सा अधिकारी से अपना कार्यक्रम छोड़ने तथा ओपीडी की तरफ ध्यान देने की बात कहता रहा है लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यक्रमों से छुट्टी नहीं मिल पाई है।
पिछले दिनों नागरिक अस्पताल से एक बच्चे को रेफर किया गया था। एंबुलेंस चालक जब बच्चे को पीजीआई रोहतक ले जा रहा था तो बच्चे की मौत हो गई। आरोप लगाए गए कि एंबुलेंस में ईएमटी नहीं था। बच्चा ऑक्सीजन पर था तो बीच रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गई। जब चालक दूसरा ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने लगा तो इस बीच बच्चे की मौत हो गई। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। एंबुलेंस के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान हैं। डॉ. जेके मान के पास लगभग दस कार्यक्रमों के कार्यभार हैं। इस मामले में उनके खिलाफ भी जांच चल रही है। इसको देखते हुए नागरिक अस्पताल में तैनात चिकित्सक भी अब डरने लगे हैं कि कहीं किसी कार्यक्रम में कोई दिक्कत हुई तो उन पर गाज गिर सकती है। इसी चिंता के कारण चिकित्सक ओपीडी भी करते हैं और अपने कार्यक्रमों को भी चला रहे हैं। कई चिकित्सक प्रतिदिन अपनी चिंता जाहिर भी करते हैं लेकिन प्रधान चिकित्सा अधिकारी भी चिकित्सकों की कमी से बेबस दिखाई देते हैं।
विज्ञापन
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को हो रही परेशानी
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण चिकित्सकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब भी कोई चिकित्सक किसी कार्यक्रम के लिए बाहर जाता है तो उसकी ओपीडी के सामने मरीजों की लाइन लग जाती है और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कोई चिकित्सक ऑपरेशन थिएटर में होता है तो भी ऐसी ही स्थिति बन जाती है।
विज्ञापन
इन 17 चिकित्सकों पर ओपीडी और कार्यक्रमों का भी कार्यभार
1. डॉ. राजेश भोला के पास ओपीडी के अलावा सबसे अधिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी है। वह दिनभर ओपीडी भी करते हैं तथा इसके अलावा नागरिक अस्पताल के सभी प्रकार के प्रशासनिक कार्य, आरटीआई, दिव्यांगता बोर्ड, इंटर्नशिप, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा, आउटसोर्स कर्मचारियों तथा सिक्योरिटी गार्ड को भी संभालते हैं। इसके अलावा कोई जांच का कार्य हो तो भी वे ही देखते हैं।
2. एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल एनस्थेसिया के चिकित्सक हैं। कोई भी ऑपरेशन हो, उनको मरीज को एनस्थेसिया देना पड़ता है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में कोरोना के वह नोडल अधिकारी हैं।
3. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया ओपीडी भी करते हैं तथा उनके पास एनएचएम का कार्यभार भी है। इसके अलावा वह शिशु वार्ड के इंचार्ज भी हैं।
4. एसएमओ डॉ. मंजूबाला स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। पूरा दिन वह ओपीडी करती हैं तथा उनके पास गायनी वार्ड का भी अतिरिक्त कार्यभार है।
5. वरिष्ठ दंत सर्जन डॉ. नीतू ओपीडी भी करती हैं तथा डॉ. राजेश भोला की अनुपस्थिति में उनके कार्य देखती हैं। इसके अलावा वह सफाई व्यवस्था का निरीक्षण भी करती हैं।
6. एसएमओ डॉ. सुषमलता स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं तथा ओपीडी भी करती हैं। उनके पास ऑपरेशन थिएटर का कार्यभार हैं तथा वह ऑक्सीजन, ईसीजी तथा जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संबधी काम भी देखती हैं।
7. मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनिता पूरा दिन ओपीडी करती हैं। इसके अलावा उनके पास कोविड मृत्यु का ऑडिट का कार्य, मेडिकल सर्टिफिकेट व मेडिकल वार्ड का चार्ज भी है।
8. मेडिकल ऑफिसर डॉ. अजय चालिया के पास ब्लड बैंक, डायलसिसि, जनरेटर सेट, आईपीएचल का कार्यभार भी है। वह आयुष्मान भारत योजना के भी नोडल अधिकारी हैं।
9. मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रदीप हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। वह ओपीडी भी करते हैं तथा मरीजों के ऑपरेशन भी करते हैं। इसके अलावा उनके पास सीटी स्कैन, एक्सरे, हड्ड्ी रोग वार्ड का कार्यभार भी है।
10. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संतलाल ओपीडी भी करते हैं तथा ऑपरेशन भी करते हैं। उनके पास फ्लू कार्नर, कोरोना सैंपलिंग तथा मोबाइल टीमों का कार्यभार भी है।
11. डॉ. विशाल वर्मा एनेस्थेसिया के चिकित्सक हैं, वह ऑपरेशन के समय मरीजों को बेहोश करते हैं तथा उनके पास पीएसए प्लांट का कार्यभार भी है।
12. दंत सर्जन डॉ. विशाल पोरस पूरा दिन ओपीडी भी करते हैं तथा वह ई-संजीवनी व बीएमडब्ल्यू के नोडल अधिकारी भी हैं।
13. दंत सर्जन डॉ. पूनम मान ओपीडी भी करते हैं तथा वह ई-उपचार व एनक्वास की नोडल अधिकारी भी हैं।
14. सर्जन डॉ. चंद्रमोहन ओपीडी भी करते हैं तथा मरीजों के ऑपरेशन भी करते हैं। इसके अलावा वह सर्जिकल वार्ड के प्रभारी भी हैं।
15. मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. संकल्प ओपीडी भी करते हैं। इसके अलावा मरीजों की काउंसलिंग करते हैं। वह एसकेएस के सदस्य सचिव भी हैं।
16. डॉ. सीमा बाल रोग विशेषज्ञ हैं तथा पूरा दिन ओपीडी करती हैं। इसके अलावा उनके पास एसएनसीयू तथा जन्म एवं मृत्यु का कार्यभार भी है।
17. ईएनटी डॉ. बृजेंद्र ओपीडी करते हैं तथा मरीजों के ऑपरेशन भी करते हैं। प्रतिदिन डॉ. बृजेंद्र की अकेले ही ओपीडी 200 के पार होती है। इसके अलावा उनके पास इमरजेंसी वार्ड, पोस्टमार्टम, बिजली पानी की व्यवस्था का अतिरिक्त कार्यभार है।
नागरिक अस्पताल में 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। फिलहाल उनके पास केवल 17 चिकित्सक हैं। इनसे ही काम चलाया जा रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण ही इन सभी को अतिरिक्त कार्यभार दिए गए हैं। चिकित्सकों की मांग को लेकर स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखे जा चुके हैं। उम्मीद है जल्द ही चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी।
-डॉ. लोकवीर, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।