{"_id":"6a947dfbc20fedc2b10fb955","slug":"more-than-50-primary-schools-are-waiting-for-benches-children-are-studying-on-the-ground-jind-news-c-199-1-sroh1009-159390-2026-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: बेंचों के इंतजार में 50 से ज्यादा प्राइमरी स्कूल, जमीन पर बैठकर पढ़ रहे नौनिहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: बेंचों के इंतजार में 50 से ज्यादा प्राइमरी स्कूल, जमीन पर बैठकर पढ़ रहे नौनिहाल
विज्ञापन
30जेएनडी29: पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक गांव के स्कूल में बैंचों की कमी के कारण जमीन पर बैठकर पढ़
जींद। जिले के 50 से अधिक राजकीय प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे विद्यार्थियों को को पर्याप्त बेंच नहीं मिलने के कारण गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन स्कूलों में 500 से अधिक बेंचों की जरूरत है।
शिक्षा विभाग की ओर से पिछले माह स्कूलों से बेंचों की डिमांड मांगी गई थी। स्कूलों ने अपनी जरूरत के अनुसार मांग भेज भी दी लेकिन अब तक बेंचों की सप्लाई नहीं हो पाई है। कई स्कूलों में बच्चों को मजबूरी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
स्कूलों के अध्यापकों का कहना है कि बेंचों की जरूरत को लेकर साल में दो बार डिमांड भेजी जाती है। इसके बावजूद लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा। जिले में कुल 423 राजकीय प्राइमरी स्कूल हैं जिनमें करीब 3200 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें से 50 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में बैठने के लिए पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं हैं।
विज्ञापन
कुछ स्कूलों में पुराने और टूटे बेंच होने के कारण भी बच्चों को बैठने में परेशानी होती है। स्कूल शिक्षकों के अनुसार छोटे बच्चों के लिए लंबे समय तक जमीन पर बैठकर पढ़ना आसान नहीं है। गर्मियों में फर्श गर्म होने और सर्दियों में ठंडा होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। बारिश के मौसम में भी समस्या और बढ़ जाती है।
बाक्स
अध्यापकों से बैंचों की कमी को लेकर डिमांड ली गई है। इसको मुख्यालय भेजा गया है। उम्मीद है कि स्कूलों में जरूरत के अनुसार जल्द ही बैंच पहुंचाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
-मुन्नी देवी, जिला शिक्षा अधिकारी जींद।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग की ओर से पिछले माह स्कूलों से बेंचों की डिमांड मांगी गई थी। स्कूलों ने अपनी जरूरत के अनुसार मांग भेज भी दी लेकिन अब तक बेंचों की सप्लाई नहीं हो पाई है। कई स्कूलों में बच्चों को मजबूरी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
विज्ञापन
स्कूलों के अध्यापकों का कहना है कि बेंचों की जरूरत को लेकर साल में दो बार डिमांड भेजी जाती है। इसके बावजूद लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा। जिले में कुल 423 राजकीय प्राइमरी स्कूल हैं जिनमें करीब 3200 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें से 50 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में बैठने के लिए पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं हैं।
विज्ञापन
कुछ स्कूलों में पुराने और टूटे बेंच होने के कारण भी बच्चों को बैठने में परेशानी होती है। स्कूल शिक्षकों के अनुसार छोटे बच्चों के लिए लंबे समय तक जमीन पर बैठकर पढ़ना आसान नहीं है। गर्मियों में फर्श गर्म होने और सर्दियों में ठंडा होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। बारिश के मौसम में भी समस्या और बढ़ जाती है।
बाक्स
अध्यापकों से बैंचों की कमी को लेकर डिमांड ली गई है। इसको मुख्यालय भेजा गया है। उम्मीद है कि स्कूलों में जरूरत के अनुसार जल्द ही बैंच पहुंचाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
-मुन्नी देवी, जिला शिक्षा अधिकारी जींद।