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Jind News: नागरिक अस्पताल में बंदरों का आतंक, मरीजों व स्वास्थ्यकर्मियों की बढ़ी परेशानी
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03जेएनडी25: नागरिक अस्पताल में घूमते बंदर। स्रोत: स्वास्थ्य कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
जींद। नागरिक अस्पताल में बंदरों के बढ़ते आतंक को लेकर स्वास्थ्य सुपरीवाइजर संघ ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। जिला प्रशासन और नगर परिषद अधिकारियों को भेजे गए पत्र में अस्पताल परिसर में बंदरों की वजह से मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया गया है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में बंदर घूमते रहते हैं। कई बार बंदर लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। इतना ही नहीं, बंदरों की ओर से वार्डों और कमरों में घुसकर मरीजों को परेशान करने, अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
कर्मचारियों को भी अपने कार्यालयों में काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए पहले भी कई बार जिला प्रशासन और नगर परिषद को अवगत कराया गया था।
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बंदर पकड़ने वाली टीम अस्पताल पहुंची भी लेकिन कुछ बंदरों को पकड़ने के बाद कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। मांग की गई है कि बंदर पकड़ने वाली टीम को दोबारा भेजकर अस्पताल परिसर को बंदरों से मुक्त कराया जाए ताकि मरीजों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके तथा अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
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स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में बंदर घूमते रहते हैं। कई बार बंदर लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। इतना ही नहीं, बंदरों की ओर से वार्डों और कमरों में घुसकर मरीजों को परेशान करने, अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
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कर्मचारियों को भी अपने कार्यालयों में काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए पहले भी कई बार जिला प्रशासन और नगर परिषद को अवगत कराया गया था।
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बंदर पकड़ने वाली टीम अस्पताल पहुंची भी लेकिन कुछ बंदरों को पकड़ने के बाद कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। मांग की गई है कि बंदर पकड़ने वाली टीम को दोबारा भेजकर अस्पताल परिसर को बंदरों से मुक्त कराया जाए ताकि मरीजों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके तथा अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।