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Jind News: जींद आगमन पर सीएम का विरोध करेंगी मिड-डे मील वर्कर
Wed, 07 Aug 2024 01:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 07 Aug 2024 01:22 AM IST
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जींद। मिड-डे मिल वर्कर यूनियन ने मंगलवार को ऑनलाइन बैठक कर मुख्यमंत्री के जींद में तीज महोत्सव के आयोजन का विरोध करने का निर्णय लिया।
यूनियन जिला प्रधान कैलाश और जिला सचिव सुनीता ने बताया कि 28 जुलाई को हरियाणा की शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने फरीदाबाद में वर्करों के बीच आकार एक सप्ताह में मांगों पर बात करने के लिए कहा था, लेकिन 10 दिन से अधिक समय होने के बाद भी उनका कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अब वह मुख्यमंत्री के तीज महोत्सव का विरोध करने के लिए मजबूर हैं। मिड-डे मिल वर्कर और उनकी समस्या पर विभाग और प्रदेश सरकार का ध्यान नहीं है। बुधवार का जो आयोजन महिलाओं के नाम पर हैं वह सरकार का ढकोसला है, क्योंकि सरकार मिड-डे मिल वर्करों का शोषण कर रही है। वर्करों को न समय पर कोई मानदेय मिल रहा है और न उनकी मांगों की सुनवाई हो रही है। मिड-डे मील वर्कर्स को 10 के बजाय 12 महीने का वेतन देने, वर्दी भत्ता में बढ़ोत्तरी करने, रिटायरमेंट पर दो लाख रुपये देने तथा आयुष्मान में शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही उन्होंने कहा की इन सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करके आगामी दिनों में निर्णय लेने के लिए कहा था। इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब मिड-डे मिल वर्कर सरकार और विभाग के आश्वासन ने मानने वाली नहीं हैं। यदि सरकार अब भी नहीं मानी तो आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को खमियाजा भुगतना पड़ेगा।
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यूनियन जिला प्रधान कैलाश और जिला सचिव सुनीता ने बताया कि 28 जुलाई को हरियाणा की शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने फरीदाबाद में वर्करों के बीच आकार एक सप्ताह में मांगों पर बात करने के लिए कहा था, लेकिन 10 दिन से अधिक समय होने के बाद भी उनका कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अब वह मुख्यमंत्री के तीज महोत्सव का विरोध करने के लिए मजबूर हैं। मिड-डे मिल वर्कर और उनकी समस्या पर विभाग और प्रदेश सरकार का ध्यान नहीं है। बुधवार का जो आयोजन महिलाओं के नाम पर हैं वह सरकार का ढकोसला है, क्योंकि सरकार मिड-डे मिल वर्करों का शोषण कर रही है। वर्करों को न समय पर कोई मानदेय मिल रहा है और न उनकी मांगों की सुनवाई हो रही है। मिड-डे मील वर्कर्स को 10 के बजाय 12 महीने का वेतन देने, वर्दी भत्ता में बढ़ोत्तरी करने, रिटायरमेंट पर दो लाख रुपये देने तथा आयुष्मान में शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही उन्होंने कहा की इन सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करके आगामी दिनों में निर्णय लेने के लिए कहा था। इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब मिड-डे मिल वर्कर सरकार और विभाग के आश्वासन ने मानने वाली नहीं हैं। यदि सरकार अब भी नहीं मानी तो आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को खमियाजा भुगतना पड़ेगा।