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Jind News: नागपाश में बांध हनुमान जी रावण की सभा में ले गया मेघनाद
Wed, 01 Oct 2025 02:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 01 Oct 2025 02:39 AM IST
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30जेएनभी33-हनुमान को बंदी बनाए हुए मेघनाथ। स्रोत आयोजक
नरवाना। हुडा ग्राउंड में चल रही श्री भारतीय कला केंद्र की रामलीला में लंका दहन का रोमांचक दृश्य प्रस्तुत किया गया। मंचन इतना प्रभावी रहा कि दर्शक खुद को कथा का हिस्सा मान बैठे और पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
रामलीला के पहले दृश्य में रावण अशोक वाटिका में सीता को बहलाने की कोशिश करता है लेकिन माता सीता उसके छल-कपट के आगे झुकती नहींं। क्रोधित रावण जैसे ही तलवार उठाता है। त्रिजटा बीच में आकर रोक देती है। दुखी सीता आत्महत्या का विचार करती हैं तभी संकटमोचक हनुमान वहां पहुंचते हैं। पहले तो माता सीता उन्हें पहचानने से इनकार करती हैं। जब हनुमान प्रभु श्रीराम का दिया आभूषण दिखाते हैं तो वह भावुक होकर उन पर विश्वास कर लेती हैं।
इसके बाद मंचन में हनुमान जी का पराक्रम देखने को मिला। उन्होंने वाटिका के फल तोड़कर बाग को तहस-नहस कर दिया। जम्बुमाली और अक्षय कुमार को रणभूमि में धूल चटा दी। रोमांचक दृश्य तब आया जब मेघनाद नागपाश में बांध हनुमान जी को लंकापति रावण की सभा में प्रस्तुत किया।
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यहां हनुमान जी और रावण के बीच तीखे संवाद हुए। हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया गया। आग लगते ही हनुमान जी ने पूरी लंका को जला डाला। मंच पर सोने की लंका जलते देख दर्शक भावविभोर हो उठे। अंत में, रावण ने अपने भाई विभीषण पर शक जताते हुए दरबार से अपमानित कर निकाल दिया। मंचन के दौरान हनुमान जी की वीरता पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रहीं।
रामलीला का शुभारंभ नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन सुदेश चोपड़ा, सराफा एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा, नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ. देवेंद्र बिंदलिश, विश्वकर्मा धर्मशाला के पूर्व प्रधान बलविंदर धीमान, ठेकेदार जय भगवान मित्तल, रिपन गर्ग, भारत अग्रवाल व मार्केट कमेटी के उपप्रधान सत्य प्रकाश सैनी ने किया। अतिथियों को क्लब प्रधान व कलाकारों ने मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया। मंच संचालन राकेश शर्मा और रामनिवास जैन ने किया।
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रामलीला के पहले दृश्य में रावण अशोक वाटिका में सीता को बहलाने की कोशिश करता है लेकिन माता सीता उसके छल-कपट के आगे झुकती नहींं। क्रोधित रावण जैसे ही तलवार उठाता है। त्रिजटा बीच में आकर रोक देती है। दुखी सीता आत्महत्या का विचार करती हैं तभी संकटमोचक हनुमान वहां पहुंचते हैं। पहले तो माता सीता उन्हें पहचानने से इनकार करती हैं। जब हनुमान प्रभु श्रीराम का दिया आभूषण दिखाते हैं तो वह भावुक होकर उन पर विश्वास कर लेती हैं।
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इसके बाद मंचन में हनुमान जी का पराक्रम देखने को मिला। उन्होंने वाटिका के फल तोड़कर बाग को तहस-नहस कर दिया। जम्बुमाली और अक्षय कुमार को रणभूमि में धूल चटा दी। रोमांचक दृश्य तब आया जब मेघनाद नागपाश में बांध हनुमान जी को लंकापति रावण की सभा में प्रस्तुत किया।
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यहां हनुमान जी और रावण के बीच तीखे संवाद हुए। हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया गया। आग लगते ही हनुमान जी ने पूरी लंका को जला डाला। मंच पर सोने की लंका जलते देख दर्शक भावविभोर हो उठे। अंत में, रावण ने अपने भाई विभीषण पर शक जताते हुए दरबार से अपमानित कर निकाल दिया। मंचन के दौरान हनुमान जी की वीरता पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रहीं।
रामलीला का शुभारंभ नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन सुदेश चोपड़ा, सराफा एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा, नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ. देवेंद्र बिंदलिश, विश्वकर्मा धर्मशाला के पूर्व प्रधान बलविंदर धीमान, ठेकेदार जय भगवान मित्तल, रिपन गर्ग, भारत अग्रवाल व मार्केट कमेटी के उपप्रधान सत्य प्रकाश सैनी ने किया। अतिथियों को क्लब प्रधान व कलाकारों ने मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया। मंच संचालन राकेश शर्मा और रामनिवास जैन ने किया।

30जेएनभी33-हनुमान को बंदी बनाए हुए मेघनाथ। स्रोत आयोजक