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हरियाणा में लंपी वायरस चर्म रोग अभी शुरुआती दौर में : श्रवण गर्ग
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सफीदों। हरियाणा में लंपी नामक बीमारी अभी शुरुआती दौर में है तथा सरकार, गोसेवा आयोग व पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट पर है। यह बात हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने कही। वह शुक्रवार को अपने कैंप ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
गर्ग ने कहा कि लंपी वायरस चर्म रोग ने अफ्रीकी देशों से शुरू होकर पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश किया है। इस बीमारी ने गुजरात, राजस्थान व पंजाब में भयंकर रूप दिखाया है तथा अब हरियाणा में अपने पांव पसारने शुरू किए हैं। इस बीमारी की आहट भर से मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कृषि मंत्री जेपी दलाल, वह स्वयं तथा पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। हरियाणा में अभी यह बीमारी विकराल स्थिति में नहीं है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले सिरसा, कैथल व अंबाला है। प्रदेश में अब तक लगभग छह हजार गोवंश इस बीमारी से पीड़ित है तथा करीब 50 गोवंश की मौत हो चुकी है। अगर स्थिति को इसी प्रकार से काबू रख लिया गया तो हालात आगे खराब नहीं होंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की गोशालाओं में इस बीमारी से संबंधित दवाइयां भेज दी गई हैं तथा गोवंश के वैक्सीनेशन का कार्य शुरू करवा दिया है। सबसे ज्यादा प्राथमिकता उन गोशालाओं को दी जा रही है, जहां पर यह बीमारी दस्तक दे चुकी है। सड़कों पर बेसहारा फिरते गोवंश के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस इस समस्या से निजात के लिए जिला व उपमंडल स्तर पर अधिकारियों से बैठक हो चुकी हैं तथा जैसे ही इस बीमारी से छुटकारा मिलेगा, तत्काल बेसहारा गोवंश को सड़कों से गोशालाओं व नंदीशालाओं में व्यवस्थित रूप से आश्रय दिया जाएगा। इसके लिए कई स्थानों पर टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
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गर्ग ने कहा कि लंपी वायरस चर्म रोग ने अफ्रीकी देशों से शुरू होकर पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश किया है। इस बीमारी ने गुजरात, राजस्थान व पंजाब में भयंकर रूप दिखाया है तथा अब हरियाणा में अपने पांव पसारने शुरू किए हैं। इस बीमारी की आहट भर से मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कृषि मंत्री जेपी दलाल, वह स्वयं तथा पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। हरियाणा में अभी यह बीमारी विकराल स्थिति में नहीं है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले सिरसा, कैथल व अंबाला है। प्रदेश में अब तक लगभग छह हजार गोवंश इस बीमारी से पीड़ित है तथा करीब 50 गोवंश की मौत हो चुकी है। अगर स्थिति को इसी प्रकार से काबू रख लिया गया तो हालात आगे खराब नहीं होंगे।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश की गोशालाओं में इस बीमारी से संबंधित दवाइयां भेज दी गई हैं तथा गोवंश के वैक्सीनेशन का कार्य शुरू करवा दिया है। सबसे ज्यादा प्राथमिकता उन गोशालाओं को दी जा रही है, जहां पर यह बीमारी दस्तक दे चुकी है। सड़कों पर बेसहारा फिरते गोवंश के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस इस समस्या से निजात के लिए जिला व उपमंडल स्तर पर अधिकारियों से बैठक हो चुकी हैं तथा जैसे ही इस बीमारी से छुटकारा मिलेगा, तत्काल बेसहारा गोवंश को सड़कों से गोशालाओं व नंदीशालाओं में व्यवस्थित रूप से आश्रय दिया जाएगा। इसके लिए कई स्थानों पर टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
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