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लंपी चर्म रोग वायरस : 38 केस मामले आए सामने, 48 पशु स्वस्थ हुए

Sat, 03 Sep 2022 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2022 12:39 AM IST
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Lumpy skin disease virus: 38 cases were reported, 48 animals recovered
लंपी चर्म रोग वायरस से ग्रस्त पशु। संवाद - फोटो : Jind
जींद। जिला में लंपी चर्म रोग वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन अब रिकवर करने वाले पशुओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार को 38 केस नए आए जबकि 48 पशु रिकवर हुए हैं। इसके अलावा अब तक कुल 2009 पशु इस वायरस से संक्रमित हुए हैं, जबकि 1003 ठीक हो चुके हैं।
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पशुपालन विभाग पशुओं का घर द्वार पर निशुल्क टीकाकरण करवा रहा है। इस रोग के कारण पशुओं में मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी कम है, फिर भी एहतियात के तौर पर मृत पशुओं का विस्तारण दो से ढ़ाई मीटर गहरा गड्ढा खोदकर करना चाहिए। मृत पशु को खुले में छोडने से संक्रमण व अन्य स्वास्थ्य पशुओं में फैल सकता है।
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पशु पालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक रविंद्र हुड्डा ने बताया कि लंपी चर्म रोग गोवंश में पाया जाता है। भैंसों में यह रोग न के बराबर है। इस वायरस का प्रसार गर्म व नम मौसम में मक्खी, मच्छर व चीचड़ के काटने से होता है। स्वस्थ्य पशु का संक्रमित पशु के संपर्क में आने से भी यह रोग होता है। यह रोग पशुओं से मनुष्य में नहीं फैलता इसलिए इसे घबराने की जरूरत नहीं है।
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ये हैं बीमारी के लक्षण
इस वायरस से संक्रमित पशुओं में पहले बुखार आता है, मुंह व नाक से स्राव निकलता है, दुग्ध उत्पादन कम हो जाता है, तत्पश्चात खाल के नीचे छोटी-छोटी गांठे बन सकती हैं, कुछ पशुओं में गले के नीचे गादी, छाती और पैरों में सूजन आ सकती है। इस तहत रोग के लक्षण दिखाई देने पर अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें बीमार पशु की उचित देखभाल करें। ईलाज से पशु 10-15 दिनों में पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाता है और दुग्ध उत्पादन भी सामान्य स्तर पर आ जाता है।
इन उपायों को अपनाएं पशु पालक
सरकार द्वारा स्वास्थ्य पशुओं का घर द्वार पर निशुल्क टीकाकरण करवाया जा रहा है। पशुओं के बाड़े को सूखा व साफ-सुथरा रखें, नियमित रूप से मक्खी और मच्छर रोधी दवाइयों का प्रयोग करें, बीमार पशु के गांव की नियमित रूप से लाल दवाई व फिटकरी से सफाई करें, बीमार पशु से उत्पादित दूध का सेवन उबालकर करना चाहिए, बीमार पशु के संपर्क में आने पर अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं, संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए पशुओं का आवागमन न किया जाए। इन पशुओं को मेले व तालाब में न लेकर जाए। इस रोग के कारण पशुओं में मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी कम है, फिर भी एहतियात के तौर पर मृत पशुओं का विस्तारण दो से ढाई मीटर गहरा गड्ढा खोदकर करना चाहिए। मृत पशु को खुले में छोड़ने से संक्रमण व अन्य स्वास्थ्य पशुओं में फैल सकता है।

लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) गोजातीय पशुओं में चमड़ी का रोग है। जो लंपी स्किन डिजीज वायरस के कारण होता है। उपशुओं को इस बीमारी से बचाव के लिए मुख्यालय द्वारा 89600 मिली लीटर वैक्सीन प्राप्त हुई है। जिसमें एक-एक एमएल की डोज पशुपालकों के गोवंश व गोशालाओं के पशुओं दी गई है, इस प्रकार अब तक जिला में कुल 86000 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया है। 118 गांवों तथा 10 गोशालाओं में 2009 गोवंश व छह भैंसों तथा 151 गोशाला के पशु इस बीमारी से पशु संक्रमित हुए हैं।
- डॉ. रविंद्र हुड्डा, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन एवं डेयरी विभाग
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