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भागवत कथा सुनने से कटते हैं जन्म जन्मांतरों के पाप : अरविंद
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11जेएनडी35-कथा वाचक अरविंद शास्त्री। संवाद
उचाना। शहर के कन्या स्कूल के पास स्थित कान्हा सेवा सदन में दूसरे दिन भी श्रीमद्भागवत कथा हुई। इस दौरान कथा वाचक अरविंद शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा को सुनने से मनुष्य के जन्म जन्मांतरों के पाप कट जाते हैं। कथा श्रवण से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ और राजसूय यज्ञ करने का फल प्राप्त हो जाता है।
भगवान की भक्ति में ही शक्ति है। भागवत कथा सही मार्ग दिखाती है। भक्ति करनी है तो ध्रुव और भक्त प्रहलाद जैसी करो। भगवान हमेशा अपने भक्त को पाना चाहते हैं। कथावाचक ने कहा कि धरती पर पाप का भार बढ़ा तो भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया।
भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। जब मनुष्य अपने अहंकार, मोह और लोभ को त्याग कर भक्ति के मार्ग पर चलता है तभी उसके जीवन में सच्ची शांति और सुख का वास होता है।
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भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए शास्त्री ने कहा कि भगवान ने गोपियों और ग्वाल बालों के साथ खेल खेल में भी धर्म और प्रेम का संदेश दिया। धर्म का अर्थ केवल पूजा पाठ नहीं बल्कि सभी जीवों में ईश्वर का अंश मानकर व्यवहार करना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि फ ल भी अच्छा मिले। मनुष्य जैसे कर्म करता है वैसा फ ल मिलता है। कभी भी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए। किसी का बुरा मात्र सोचने से ही पाप के भागीदारी हम बन जाते है।
हमेशा किसी के बारे में सोचे तो अच्छा सोचे कभी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए। इस मौके पर रोशन लाल, विनोद बंसल, राजा बुडायन, सुनील बुडायन, सज्जन घोघडिय़ां, कैलाश बंसल, सुशील मित्तल, बाबूराम मखंड, हरिकेश छात्तर, निरंजन गर्ग, सत्यनारायण मखंड, कर्मबीर कापड़ो, सतपाल गर्ग, सतीशो देवी, सोनिया बंसल, उमा गर्र्ग, सोनिया गोयल, कविता ढुल, कविता वर्मा और रेखा श्योकंद मौजूद रहे।
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भगवान की भक्ति में ही शक्ति है। भागवत कथा सही मार्ग दिखाती है। भक्ति करनी है तो ध्रुव और भक्त प्रहलाद जैसी करो। भगवान हमेशा अपने भक्त को पाना चाहते हैं। कथावाचक ने कहा कि धरती पर पाप का भार बढ़ा तो भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया।
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भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। जब मनुष्य अपने अहंकार, मोह और लोभ को त्याग कर भक्ति के मार्ग पर चलता है तभी उसके जीवन में सच्ची शांति और सुख का वास होता है।
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भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए शास्त्री ने कहा कि भगवान ने गोपियों और ग्वाल बालों के साथ खेल खेल में भी धर्म और प्रेम का संदेश दिया। धर्म का अर्थ केवल पूजा पाठ नहीं बल्कि सभी जीवों में ईश्वर का अंश मानकर व्यवहार करना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि फ ल भी अच्छा मिले। मनुष्य जैसे कर्म करता है वैसा फ ल मिलता है। कभी भी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए। किसी का बुरा मात्र सोचने से ही पाप के भागीदारी हम बन जाते है।
हमेशा किसी के बारे में सोचे तो अच्छा सोचे कभी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए। इस मौके पर रोशन लाल, विनोद बंसल, राजा बुडायन, सुनील बुडायन, सज्जन घोघडिय़ां, कैलाश बंसल, सुशील मित्तल, बाबूराम मखंड, हरिकेश छात्तर, निरंजन गर्ग, सत्यनारायण मखंड, कर्मबीर कापड़ो, सतपाल गर्ग, सतीशो देवी, सोनिया बंसल, उमा गर्र्ग, सोनिया गोयल, कविता ढुल, कविता वर्मा और रेखा श्योकंद मौजूद रहे।

11जेएनडी35-कथा वाचक अरविंद शास्त्री। संवाद