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Jind News: जी राम जी कानून के खिलाफ वामपंथी दलों ने डीसी दफ्तर पर प्रदर्शन कर जलाईं प्रतियां
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22जेएनडी01: जी राम जी कानून की लघु सचिवालय के बाहर प्रतियां जलाते हुए। स्रोत : संगठन
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। केंद्र की सरकार की ओर से लाए गए विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन अधिनियम 2025 के विरोध में सोमवार को सीपीआई (एम) और सीपीआई के कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने जी राम जी कानून को “काला कानून” बताया।
इसी दौरान उन्होंने जी राम जी कानून की प्रतियां जलाईं और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल रद्द करने की मांग की। पुराने बस अड्डा पर एकत्रित हुए मनरेगा मजदूरों और वामपंथी कार्यकर्ताओं ने जनसभा के बाद जुलूस निकालकर लघु सचिवालय तक मार्च किया।
जनसभा की संयुक्त अध्यक्षता सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता कॉमरेड प्रकाश चंद्र और सीपीआई के नेता सतपाल सरोहा ने की। नेताओं ने कहा कि जी राम जी कानून ग्रामीण मेहनतकशों के अधिकारों पर सीधा हमला है और यह मनरेगा जैसे अधिकार-आधारित कानून को समाप्त करने की साजिश है।
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सीपीआई (एम) के जिला सचिव कॉमरेड कपूर सिंह और सीपीआई के सचिव मनी राम ने कहा कि यह कानून 2005 के ऐतिहासिक मनरेगा को निरस्त कर उसकी जगह ले रहा है। लगाया कि संसद में भारी हंगामे के बीच जबरन पारित कराया गया और राष्ट्रपति की मंजूरी लेकर लागू किया गया।
उन्होंने कहा इस कानून के तहत 100 से 125 दिन रोजगार का दावा करते हुए जॉब कार्ड रेशनलाइजेशन के नाम पर लाखों परिवारों को बाहर करना, पीक सीजन में 60 दिन तक काम निलंबित करना, अनिवार्य डिजिटल हाजिरी से बुजुर्गों, महिलाओं और अशिक्षित मजदूरों को वंचित करना, तथा फंडिंग पैटर्न को बदला गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार कम से कम 200 दिन काम और 800 रुपये प्रतिदिन दिहाड़ी की गारंटी दे व पूरी फंडिंग केंद्र सरकार वहन करे। इस अवसर पर सीपीआई(एम) के मास्टर बलबीर सिंह, सतबीर खरल, संदीप जाजवान, राजेश कुमार, सुरेश करसोला, पवन कुमार, अजैब, जोधा सरपंच मौजूद रहे।
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जींद। केंद्र की सरकार की ओर से लाए गए विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन अधिनियम 2025 के विरोध में सोमवार को सीपीआई (एम) और सीपीआई के कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने जी राम जी कानून को “काला कानून” बताया।
इसी दौरान उन्होंने जी राम जी कानून की प्रतियां जलाईं और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल रद्द करने की मांग की। पुराने बस अड्डा पर एकत्रित हुए मनरेगा मजदूरों और वामपंथी कार्यकर्ताओं ने जनसभा के बाद जुलूस निकालकर लघु सचिवालय तक मार्च किया।
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जनसभा की संयुक्त अध्यक्षता सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता कॉमरेड प्रकाश चंद्र और सीपीआई के नेता सतपाल सरोहा ने की। नेताओं ने कहा कि जी राम जी कानून ग्रामीण मेहनतकशों के अधिकारों पर सीधा हमला है और यह मनरेगा जैसे अधिकार-आधारित कानून को समाप्त करने की साजिश है।
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सीपीआई (एम) के जिला सचिव कॉमरेड कपूर सिंह और सीपीआई के सचिव मनी राम ने कहा कि यह कानून 2005 के ऐतिहासिक मनरेगा को निरस्त कर उसकी जगह ले रहा है। लगाया कि संसद में भारी हंगामे के बीच जबरन पारित कराया गया और राष्ट्रपति की मंजूरी लेकर लागू किया गया।
उन्होंने कहा इस कानून के तहत 100 से 125 दिन रोजगार का दावा करते हुए जॉब कार्ड रेशनलाइजेशन के नाम पर लाखों परिवारों को बाहर करना, पीक सीजन में 60 दिन तक काम निलंबित करना, अनिवार्य डिजिटल हाजिरी से बुजुर्गों, महिलाओं और अशिक्षित मजदूरों को वंचित करना, तथा फंडिंग पैटर्न को बदला गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार कम से कम 200 दिन काम और 800 रुपये प्रतिदिन दिहाड़ी की गारंटी दे व पूरी फंडिंग केंद्र सरकार वहन करे। इस अवसर पर सीपीआई(एम) के मास्टर बलबीर सिंह, सतबीर खरल, संदीप जाजवान, राजेश कुमार, सुरेश करसोला, पवन कुमार, अजैब, जोधा सरपंच मौजूद रहे।