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आतंकवादियों के ग्रेनेड हमले में शहीद हुआ कुलदीप
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
Updated Mon, 08 Dec 2014 12:30 AM IST
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जम्मू कश्मीर के उड़ी सेक्टर में आतंकियों के हमले में शहीद कुलदीप ने आतंकवादियों का मुंहतोड़ जवाब दिया था। गन प्वाइंट पर तैनात कुलदीप और उनके अन्य साथियों पर करीब छह आतंकवादियों ने हमला कर दिया।
इसके बाद दोनों तरफ से चलने वाली गोलियों की तड़तड़ाहट से घाटी गूंज उठी। शहीद कुलदीप के साथी लायंस नायक गुरविंद्र सिंह ने बताया कि एकदम हुए हमले से सभी जवान सकते में थे। इसके बाद भी सभी लोगों ने सूझबूझ के साथ मोर्चा संभालकर जवाबी कार्रवाई कर आतंकवादियों को पीछे हटने को मजबूर कर दिया।
इसी दौरान आतंकवादियों ने अचानक उनके बंकर पर ग्रेनेड से हमला किया। बंकर पर ग्रेनेड फटने के कारण वहां आग लग गई। इससे चारों तरफ धुआं फैल गया। इसी हमले में कुलदीप वीरगति को प्राप्त हो गया। लायंस नायक गुरविंद्र ने बताया कि कुलदीप बड़ा ही हंसमुख और मिलनसार था। वह सभी के साथ हंसी-खुशी से रहता था।
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2008 में हुआ था सेना में भर्ती
शहीद कुलदीप अप्रैल 2008 में सिख रेजिमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। इस समय कुलदीप लायंस नायक के पद पर जम्मू के उड़ी सेक्टर में तैनात था। शहीद कुलदीप की शादी वर्ष 2012 में नरवाना के हमरीगढ़ निवासी रेखा के साथ हुई थी।
शहीद कुलदीप का 18 माह का बेटा दीप है। इस समय परिवार में 70 वर्षीय पिता मोलड़राम, 65 वर्षीय मां अंगूरी देवी, बड़ा भाई चुड़ियाराम, मंझला भाई वजीर सिंह और छोटी बहन यशवंती है।
शहीद कुलदीप की पिता से हुई थी आखिरी बात
जम्मू कश्मीर में देश की रक्षा के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले शहीद कुलदीप ने अंतिम बार मोबाइल पर अपने पिता मोलड़राम से बात की थी। कुलदीप ने बृहस्पतिवार शाम को अपने पिता के मोबाइल पर फोन किया था। इस दौरान कुलदीप ने अपने पिता मोलड़राम से परिवार की राजी खुशी पूछी थी।
कुलदीप के पिता मोलड़राम ने बताया कि कुलदीप के साथ करीब तीन मिनट तक हुई। बातचीत के दौरान कुलदीप ने यह भी कहा था कि जल्द ही छुट्टी लेकर घर आऊंगा और यशवंती के रिश्ते की बात को आगे बढ़ाएंगे। शुक्रवार शाम को परिजनों को कुलदीप के वीरगति को प्राप्त होने का समाचार मिला।
गांव के युवाओं को देता था सेना में भर्ती होने की प्रेरणा
शहीद के दोस्त दलजीत और संजीव कुमार ने बताया कि कुलदीप उनका सहपाठी था और पढ़ाई के साथ-साथ कुलदीप की खेलों में काफी रुचि थी। कबड्डी कुलदीप का पसंदीदा खेल था।
दलजीत और संजीव ने बताया कि कुलदीप बड़ा ही मिलनसार था। गांव में छुट्टी आने के बाद वह अपने दोस्तों के साथ भी काफी समय बिताता था। कुलदीप गांव के युवाओं को फौज में भर्ती होने के लिए भी प्रेरित करता था। कुलदीप की प्रेरणा से गांव के ही कई युवा सेना में भर्ती हुए हैं।
ड्यूटी के पलों को परिवार के साथ करता था साझा
शहीद कुलदीप के मंझले भाई वजीर सिंह ने बताया कि कुलदीप छुट्टी आने के बाद उनके साथ ड्यूटी के पलों को अकसर साझा किया करता था। कुलदीप उन लोगों को जम्मू के हालात के बारे में बताया करता था। कुलदीप बताता था कि गोलीबारी तो वहां हर रोज का काम है।
वजीर सिंह ने बताया कि वह सेना में रहते हुए भी खेलों में काफी दिलचस्पी रखता था। इसी के चलते उसने सेना में खेलों में कई पदक भी जीते। खेलों के क्षणों को भी वह परिवार के लोगों के साथ साझा करता था।
मां बोली सो गया मेरा सेना का शेर
बेटे कुलदीप के शव को देखकर उसकी मां अंगूरी देवी के आंखों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। बेटे की शहादत पर मां अंगूरी देवी बेटे की अर्थी से लिपट कर बिलख- बिलख कर रो रहीं थीं। अंगूरी देवी के मुंह से, मेरे सेना के शेर शब्दों के अलावा कुछ और शब्द नहीं निकल पा रहे थे।
अंगूरी देवी ने कहा कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए काम आया। बहन यशवंती का कहना है कि उसे अपने भाई की शहादत पर गर्व है। जब भी उसका भाई छुट्टी आता था तो उसके साथ काफी बातें किया करता था और उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया करता था।
शहीद कुलदीप की पत्नी रेखा का कहना है कि उसको अपने पति की शहादत पर गर्व है। सभी मांओं को ऐसे ही लालों को जन्म देना चाहिए जो देश के लिए काम आ सकें। उसके पति ने अपने देश की रक्षा के लिए हंसते- हंसते अपने प्राणों की आहुति दी है। उसके पति की शहादत को देश कभी भूल नहीं पाएगा।
रेखा ने कहा कि वह अपने पति कुलदीप की तरह अपने बेटे दीप को भी देशभक्ति का पाठ पढ़ाकर सेना में भेजेगी।
अपने बेटे की शहादत पर है गर्व
शहीद कुलदीप के पिता मोलड़राम ने कहा कि उसे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है कि उसके बेटे का जीवन देश के काम आया। उसके बेटे कुलदीप का जितना जीवन था वह देश की रक्षा के लिए गुजरा।
कुलदीप ने जंग के मैदान में दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देते हुए अपने देश, प्रदेश अपने जिले तथा गांव का नाम रोशन किया है। मोलड़राम ने कहा कि ऐसा बेटा बड़े सौभाग्य से मिलता है।
स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कुलदीप का नाम
ब्रिगेडियर अमित लूंबा ने कहा कि कुलदीप ने देश के युवाओं के सामने एक उदाहरण पेश किया है। आर्मी की पॉलिसी के तहत अब कुलदीप के परिवार की पूरी जिम्मेदारी आर्मी की है।
ब्रिगेडियर ने कहा कि कुलदीप एक बहादुर सिपाही था और उसने पूरी ईमानदारी से अपना फर्ज पूरा किया है। देश के इतिहास में कुलदीप का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। शहीद कुलदीप के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित लूंबा ने कुलदीप के अंतिम संस्कार के बाद कुलदीप के पिता मोलड़राम को तिरंगा भेंट कर उनके पैर छूए।
इन लोगों ने दी श्रद्धांजलि
शहीद को सांसद दुष्यंत चौटाला, जुलाना के विधायक परमेंद्र ढुल, पूर्व एमएलए सतवेंद्र राणा, पूर्व विधायक रामपाल माजरा, सुरेंद्र एडवोकेट, विनोद गौतम, जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम वीरेंद्र सहरावत, डीएसपी सुरेश कुमार, नायब तहसीलदार लवजोत सिंह विर्क, अलेवा थाना प्रभारी तकदीर सिंह ने श्रद्धांजलि दी। सुबह करीब दस बजे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ शहीद कुलदीप का अंतिम संस्कार किया गया।
कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक नहीं पहुंचे
शहीद कुलदीप का गांव उचाना विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। कैबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह का पैतृक गांव भी डूमरखां इसी विधानसभा क्षेत्र में है। बीरेद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता उचाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। शहीद कुलदीप को श्रद्धांजलि देने न तो कैबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह पहुंचे और न ही विधायक प्रेमलता।
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इसके बाद दोनों तरफ से चलने वाली गोलियों की तड़तड़ाहट से घाटी गूंज उठी। शहीद कुलदीप के साथी लायंस नायक गुरविंद्र सिंह ने बताया कि एकदम हुए हमले से सभी जवान सकते में थे। इसके बाद भी सभी लोगों ने सूझबूझ के साथ मोर्चा संभालकर जवाबी कार्रवाई कर आतंकवादियों को पीछे हटने को मजबूर कर दिया।
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इसी दौरान आतंकवादियों ने अचानक उनके बंकर पर ग्रेनेड से हमला किया। बंकर पर ग्रेनेड फटने के कारण वहां आग लग गई। इससे चारों तरफ धुआं फैल गया। इसी हमले में कुलदीप वीरगति को प्राप्त हो गया। लायंस नायक गुरविंद्र ने बताया कि कुलदीप बड़ा ही हंसमुख और मिलनसार था। वह सभी के साथ हंसी-खुशी से रहता था।
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2008 में हुआ था सेना में भर्ती
शहीद कुलदीप अप्रैल 2008 में सिख रेजिमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। इस समय कुलदीप लायंस नायक के पद पर जम्मू के उड़ी सेक्टर में तैनात था। शहीद कुलदीप की शादी वर्ष 2012 में नरवाना के हमरीगढ़ निवासी रेखा के साथ हुई थी।
शहीद कुलदीप का 18 माह का बेटा दीप है। इस समय परिवार में 70 वर्षीय पिता मोलड़राम, 65 वर्षीय मां अंगूरी देवी, बड़ा भाई चुड़ियाराम, मंझला भाई वजीर सिंह और छोटी बहन यशवंती है।
शहीद कुलदीप की पिता से हुई थी आखिरी बात
जम्मू कश्मीर में देश की रक्षा के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले शहीद कुलदीप ने अंतिम बार मोबाइल पर अपने पिता मोलड़राम से बात की थी। कुलदीप ने बृहस्पतिवार शाम को अपने पिता के मोबाइल पर फोन किया था। इस दौरान कुलदीप ने अपने पिता मोलड़राम से परिवार की राजी खुशी पूछी थी।
कुलदीप के पिता मोलड़राम ने बताया कि कुलदीप के साथ करीब तीन मिनट तक हुई। बातचीत के दौरान कुलदीप ने यह भी कहा था कि जल्द ही छुट्टी लेकर घर आऊंगा और यशवंती के रिश्ते की बात को आगे बढ़ाएंगे। शुक्रवार शाम को परिजनों को कुलदीप के वीरगति को प्राप्त होने का समाचार मिला।
गांव के युवाओं को देता था सेना में भर्ती होने की प्रेरणा
शहीद के दोस्त दलजीत और संजीव कुमार ने बताया कि कुलदीप उनका सहपाठी था और पढ़ाई के साथ-साथ कुलदीप की खेलों में काफी रुचि थी। कबड्डी कुलदीप का पसंदीदा खेल था।
दलजीत और संजीव ने बताया कि कुलदीप बड़ा ही मिलनसार था। गांव में छुट्टी आने के बाद वह अपने दोस्तों के साथ भी काफी समय बिताता था। कुलदीप गांव के युवाओं को फौज में भर्ती होने के लिए भी प्रेरित करता था। कुलदीप की प्रेरणा से गांव के ही कई युवा सेना में भर्ती हुए हैं।
ड्यूटी के पलों को परिवार के साथ करता था साझा
शहीद कुलदीप के मंझले भाई वजीर सिंह ने बताया कि कुलदीप छुट्टी आने के बाद उनके साथ ड्यूटी के पलों को अकसर साझा किया करता था। कुलदीप उन लोगों को जम्मू के हालात के बारे में बताया करता था। कुलदीप बताता था कि गोलीबारी तो वहां हर रोज का काम है।
वजीर सिंह ने बताया कि वह सेना में रहते हुए भी खेलों में काफी दिलचस्पी रखता था। इसी के चलते उसने सेना में खेलों में कई पदक भी जीते। खेलों के क्षणों को भी वह परिवार के लोगों के साथ साझा करता था।
मां बोली सो गया मेरा सेना का शेर
बेटे कुलदीप के शव को देखकर उसकी मां अंगूरी देवी के आंखों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। बेटे की शहादत पर मां अंगूरी देवी बेटे की अर्थी से लिपट कर बिलख- बिलख कर रो रहीं थीं। अंगूरी देवी के मुंह से, मेरे सेना के शेर शब्दों के अलावा कुछ और शब्द नहीं निकल पा रहे थे।
अंगूरी देवी ने कहा कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए काम आया। बहन यशवंती का कहना है कि उसे अपने भाई की शहादत पर गर्व है। जब भी उसका भाई छुट्टी आता था तो उसके साथ काफी बातें किया करता था और उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया करता था।
शहीद कुलदीप की पत्नी रेखा का कहना है कि उसको अपने पति की शहादत पर गर्व है। सभी मांओं को ऐसे ही लालों को जन्म देना चाहिए जो देश के लिए काम आ सकें। उसके पति ने अपने देश की रक्षा के लिए हंसते- हंसते अपने प्राणों की आहुति दी है। उसके पति की शहादत को देश कभी भूल नहीं पाएगा।
रेखा ने कहा कि वह अपने पति कुलदीप की तरह अपने बेटे दीप को भी देशभक्ति का पाठ पढ़ाकर सेना में भेजेगी।
अपने बेटे की शहादत पर है गर्व
शहीद कुलदीप के पिता मोलड़राम ने कहा कि उसे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है कि उसके बेटे का जीवन देश के काम आया। उसके बेटे कुलदीप का जितना जीवन था वह देश की रक्षा के लिए गुजरा।
कुलदीप ने जंग के मैदान में दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देते हुए अपने देश, प्रदेश अपने जिले तथा गांव का नाम रोशन किया है। मोलड़राम ने कहा कि ऐसा बेटा बड़े सौभाग्य से मिलता है।
स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कुलदीप का नाम
ब्रिगेडियर अमित लूंबा ने कहा कि कुलदीप ने देश के युवाओं के सामने एक उदाहरण पेश किया है। आर्मी की पॉलिसी के तहत अब कुलदीप के परिवार की पूरी जिम्मेदारी आर्मी की है।
ब्रिगेडियर ने कहा कि कुलदीप एक बहादुर सिपाही था और उसने पूरी ईमानदारी से अपना फर्ज पूरा किया है। देश के इतिहास में कुलदीप का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। शहीद कुलदीप के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित लूंबा ने कुलदीप के अंतिम संस्कार के बाद कुलदीप के पिता मोलड़राम को तिरंगा भेंट कर उनके पैर छूए।
इन लोगों ने दी श्रद्धांजलि
शहीद को सांसद दुष्यंत चौटाला, जुलाना के विधायक परमेंद्र ढुल, पूर्व एमएलए सतवेंद्र राणा, पूर्व विधायक रामपाल माजरा, सुरेंद्र एडवोकेट, विनोद गौतम, जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम वीरेंद्र सहरावत, डीएसपी सुरेश कुमार, नायब तहसीलदार लवजोत सिंह विर्क, अलेवा थाना प्रभारी तकदीर सिंह ने श्रद्धांजलि दी। सुबह करीब दस बजे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ शहीद कुलदीप का अंतिम संस्कार किया गया।
कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक नहीं पहुंचे
शहीद कुलदीप का गांव उचाना विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। कैबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह का पैतृक गांव भी डूमरखां इसी विधानसभा क्षेत्र में है। बीरेद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता उचाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। शहीद कुलदीप को श्रद्धांजलि देने न तो कैबिनेट मंत्री बीरेंद्र सिंह पहुंचे और न ही विधायक प्रेमलता।