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धमकी को गंभीरता से लेता तो बच सकती थी कर्मबीर की जान
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कर्मबीर का घर, जहां पर उसे गोली मारी गई। संवाद
- फोटो : Jind
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कालवा गांव में दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस हाईवे में आई जमीन के पैसे के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में मृतक ने अदालत में केस किया हुआ था। इसमें पिछले काफी समय से परिवार के दोनों पक्षों में कई बार पंचायत भी हो चुकी थी। लेकिन उसमें समझौता नहीं हो सका था। 1.63 करोड़ रुपने ने परिवार के सदस्यों के बीच आने से पहले ही कर्मबीर की जिंदगी छीन ली। मृतक के परिजनों को इस बात का अंदेशा नहीं था कि पैसे के लालच में परिवार के सदस्य ऐसा करेंगे।
मृतक के भतीजे प्रवीन ने बताया कि उसको तथा उसके चाचा को दो दिन पहले भी आरोपियों ने समझौता नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इस धमकी को उन्होंने नजरअंदाज करते हुए कहा था कि अदालत का जो फैसला होगा वह मान्य होगा। अगर उन्हें हत्या करने का अंदेशा होता तो वह पहले ही पुलिस को शिकायत देकर सुरक्षा का प्रबंध करते। प्रवीण ने बताया कि आरोपियों ने उसके चाचा को मरवाने के लिए सुपारी दी होगी। जबकि उनके पास लाइसेंसी हथियार नहीं था। इससे साफ है कि हत्या की साजिश पहले से रची जा रही थी। जिसके चलते उन्होंने अवैध हथियार से उसके चाचा की हत्या की है। कर्मबीर का बेटा आईटीबीपी में सिपाही है और बेटी बीए कर रही है।
जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में आ चुकी थी राशि
परिजनों ने बताया कि पूरी राशि कर्मबीर के नाम से जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में आ चुकी थी। यह राशि कर्मबीर के खाते में डाली जानी थी। लेकिन इससे पहले ही आरोपी पक्ष ने अदालत में याचिका दायर कर अपने हिस्से की मांग कर दी। आरोप है कि इसको लेकर कई बार धमकी दी गई थी।
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चार पीढ़ी पहले था परिवार एक, अब तक चल रही थी सांझी खेवट
परिवार चार पीढ़ी पहले एक ही दादा के वंशज थे। जिनके अब ज्यादा परिवार बने हुए हैं। लेकिन उनकी खेवट अभी तक सांझी चल रही है। खेवट का बंटवारा नहीं होने के कारण और दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस हाईवे में आई जमीन के आने वाले मुआवजा राशि के लालच ने दोनों के मध्य विवाद पैदा कर दिया। जो जमीन हाईवे में आई है उस पर फिलहाल आरोपी पक्ष के लोगों का कब्जा था। लेकिन उसकी मुआवजा राशि मृतक के परिवार के लोगों ने जानी थी।
अदालत में चल रहा था केस
इस मामले में अदालत में केस चल रहा था। लेकिन आरोपी उनको अदालत से केस उठाने की लगातार धमकी दे रहे थे। केस में मुख्य मुद्दई कर्मबीर व हेमराज थे। इस रंजिश के कर्मबीर को गोली मारी गई है।
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मृतक के भतीजे प्रवीन ने बताया कि उसको तथा उसके चाचा को दो दिन पहले भी आरोपियों ने समझौता नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इस धमकी को उन्होंने नजरअंदाज करते हुए कहा था कि अदालत का जो फैसला होगा वह मान्य होगा। अगर उन्हें हत्या करने का अंदेशा होता तो वह पहले ही पुलिस को शिकायत देकर सुरक्षा का प्रबंध करते। प्रवीण ने बताया कि आरोपियों ने उसके चाचा को मरवाने के लिए सुपारी दी होगी। जबकि उनके पास लाइसेंसी हथियार नहीं था। इससे साफ है कि हत्या की साजिश पहले से रची जा रही थी। जिसके चलते उन्होंने अवैध हथियार से उसके चाचा की हत्या की है। कर्मबीर का बेटा आईटीबीपी में सिपाही है और बेटी बीए कर रही है।
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जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में आ चुकी थी राशि
परिजनों ने बताया कि पूरी राशि कर्मबीर के नाम से जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में आ चुकी थी। यह राशि कर्मबीर के खाते में डाली जानी थी। लेकिन इससे पहले ही आरोपी पक्ष ने अदालत में याचिका दायर कर अपने हिस्से की मांग कर दी। आरोप है कि इसको लेकर कई बार धमकी दी गई थी।
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चार पीढ़ी पहले था परिवार एक, अब तक चल रही थी सांझी खेवट
परिवार चार पीढ़ी पहले एक ही दादा के वंशज थे। जिनके अब ज्यादा परिवार बने हुए हैं। लेकिन उनकी खेवट अभी तक सांझी चल रही है। खेवट का बंटवारा नहीं होने के कारण और दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस हाईवे में आई जमीन के आने वाले मुआवजा राशि के लालच ने दोनों के मध्य विवाद पैदा कर दिया। जो जमीन हाईवे में आई है उस पर फिलहाल आरोपी पक्ष के लोगों का कब्जा था। लेकिन उसकी मुआवजा राशि मृतक के परिवार के लोगों ने जानी थी।
अदालत में चल रहा था केस
इस मामले में अदालत में केस चल रहा था। लेकिन आरोपी उनको अदालत से केस उठाने की लगातार धमकी दे रहे थे। केस में मुख्य मुद्दई कर्मबीर व हेमराज थे। इस रंजिश के कर्मबीर को गोली मारी गई है।