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कबाड़खाना : नागरिक अस्पताल में दो साल से जंग खा रहीं कंडम घोषित 23 एंबुलेंस
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नागरिक अस्पताल में खड़ी कंडम घोषित हुई एंबुलेंस। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। नागरिक अस्पताल प्रशासन कंडम घोषित 23 एंबुलेंस और अन्य सामान की बोली करवाने के लिए जिला प्रशासन को 2018 से पत्र लिख रहा है, लेकिन आज तक बोली की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। यदि इन वाहनों की समय पर बोली हो जाती तो इनकी अच्छी कीमत अस्पताल प्रशासन को मिल सकती थी, लेकिन अब दो साल से खड़े वाहनों को जंग खा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग को अपने कंडम वाहनों की बोली करवाने के लिए जिला कंडमनेशन बोर्ड को पत्र लिखना होता है। इस बोर्ड के चेयरमैन एडीसी होते हैं। फिलहाल जिले में एडीसी का पद रिक्त पड़ा है। नागरिक अस्पताल प्रशासन ने अपने कंडम वाहनों व सामान की बोली करवाने के लिए 2018 से अब तक 12 बार जिला कंडमनेशन बोर्ड को स्मरण पत्र लिखे लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिस समय 2018 में पहला पत्र लिखा गया, उस समय अस्पताल की 12 एंबुलेंस कंडम घोषित हो चुकी थी। अब धीरे-धीरे इनकी संख्या 23 पहुंच चुकी है। अब जितनी देरी से इन वाहनों की बोली होगी, उतना ही इनकी कीमत कम मिलेगी।
समय या किलोमीटर के आधार पर कंडम घोषित होते हैं वाहन
किसी भी एंबुलेंस को कंडम घोषित करने के लिए समय और किलोमीटर को आधार बनाया जाता है। इसमें दस साल या तीन लाख किलोमीटर को माना जाता है। यदि कोई एंबुलेंस दस साल पुरानी हो जाए चाहे वह कितने ही किलोमीटर क्यों न चली हो, कंडम घोषित की जाती है। इसके अलावा यदि वह तीन लाख किलोमीटर चल जाए, उसे कंडम घोषित किया जाता है। अभी तक जितनी भी एंबुलेंस कंडम घोषित हुई हैं, वह सब तीन लाख किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं।
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नागरिक अस्पताल में इस समय 23 एंबुलेंस कंडम घोषित की जा चुकी हैं। इनकी बोली के लिए कंडमनेशन बोर्ड को कई बार पत्र लिख चुके हैं। जिले में इस समय एडीसी का पद खाली है। एडीसी ही कंडमनेशन बोर्ड के चेयरमैन होते हैं। उम्मीद है नए एडीसी के आते ही इन वाहनों की बोली हो जाएगी। - डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस।
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स्वास्थ्य विभाग को अपने कंडम वाहनों की बोली करवाने के लिए जिला कंडमनेशन बोर्ड को पत्र लिखना होता है। इस बोर्ड के चेयरमैन एडीसी होते हैं। फिलहाल जिले में एडीसी का पद रिक्त पड़ा है। नागरिक अस्पताल प्रशासन ने अपने कंडम वाहनों व सामान की बोली करवाने के लिए 2018 से अब तक 12 बार जिला कंडमनेशन बोर्ड को स्मरण पत्र लिखे लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिस समय 2018 में पहला पत्र लिखा गया, उस समय अस्पताल की 12 एंबुलेंस कंडम घोषित हो चुकी थी। अब धीरे-धीरे इनकी संख्या 23 पहुंच चुकी है। अब जितनी देरी से इन वाहनों की बोली होगी, उतना ही इनकी कीमत कम मिलेगी।
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समय या किलोमीटर के आधार पर कंडम घोषित होते हैं वाहन
किसी भी एंबुलेंस को कंडम घोषित करने के लिए समय और किलोमीटर को आधार बनाया जाता है। इसमें दस साल या तीन लाख किलोमीटर को माना जाता है। यदि कोई एंबुलेंस दस साल पुरानी हो जाए चाहे वह कितने ही किलोमीटर क्यों न चली हो, कंडम घोषित की जाती है। इसके अलावा यदि वह तीन लाख किलोमीटर चल जाए, उसे कंडम घोषित किया जाता है। अभी तक जितनी भी एंबुलेंस कंडम घोषित हुई हैं, वह सब तीन लाख किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं।
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नागरिक अस्पताल में इस समय 23 एंबुलेंस कंडम घोषित की जा चुकी हैं। इनकी बोली के लिए कंडमनेशन बोर्ड को कई बार पत्र लिख चुके हैं। जिले में इस समय एडीसी का पद खाली है। एडीसी ही कंडमनेशन बोर्ड के चेयरमैन होते हैं। उम्मीद है नए एडीसी के आते ही इन वाहनों की बोली हो जाएगी। - डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस।