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जुलाना के विधायक परमेंद्र सिंह ढुल ने साधा सीएम पर निशाना
jind/bureau
Updated Tue, 24 May 2016 11:51 PM IST
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जुलाना के विधायक परमेंद्र सिंह ढुल ने साधा सीएम पर निशाना
- फोटो : bureau
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जुलाना से इनेलो विधायक परमेंद्र सिंह ढुल ने जुलाना के दौरे को लेकर सीएम मनोहर लाल पर निशाना साधते हुए कहा कि सीएम का जुलाना दौरा खोदा पहाड़ निकली चुहिया के समान है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं से प्रतीत होता है कि वे सभी हलकों में रैली करने की नीयत से जुलाना में महज औपचारिकता पूरी करने आए थे।
इनेलो कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान ढुल ने मुख्यमंत्री से विकास से जुड़े दस महत्वपूर्ण सवाल भी किए। उन्होंने कहा की पिछले एक साल से ज्यादा समय से विधानसभा के अंदर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार की तरफ से मिले आश्वासनों पर आने वाले खर्च को यदि जोड़ा जाए, तो कुल 1000 करोड़ रुपये के लगभग बनता है।
मगर इसके विपरीत जुलाना रैली में हुई घोषणा 100 करोड़ भी नहीं है। इनमें से अधिकांश काम नियमित बंधे बंधाए प्रशासनिक काम हैं, जिन्हें घोषणा के नाम पर पेश किया गया है। घोषणाओं में जुलाना को उप मंडल बनाया जाना, नहरी पानी वितरण का जुलाना में पुनर्गठन, पेयजल किल्लत को दूर करने के ठोस आधारभूत सरकारी योजनाएं खेती के पानी की व्यापक उपलब्धता, टेल पर पानी, सूखे जलघर में पानी पहुंचाना जैसे अहम मुद्दों का कोई जिक्र तक नहीं किया गया।
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हैरानी की बात है कि गर्ल्स कॉलेज तक को भी स्वीकृति नहीं दी गई, बल्कि उसे भी मैपिंग के दरमियान बताया गया। प्रदेश सरकार ने रैली में कुर्सियां भरने के लिए पंचों, सरपंचों व पार्षदों को विकास के लिए ग्रांट देने के नाम पर बुलाया, लेकिन ग्रांट के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं दी।
पीपली लाइव के नत्था बन गए निडाना के गरीब
विधायक ढुल ने कहा कि निडाना हादसे के बाद पीड़ितों से मिलना तो दूर मुख्यमंत्री ने उन्हें राहत प्रदान करने तक की घोषणा नहीं की। निडाना के गरीब पीपली लाइव के नत्था बन गए हैं। हैरानी की बात है कि इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी प्रदेश सरकार ने हलके में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।
वर्ल्ड बैंक द्वारा समर्थित व प्रायोजित क्लस्टर योजना पर भी कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। प्रदेश सरकार के पास मौाका था कि वह आमजन का सरकारी व्यवस्था में पुन: विश्वास कायम करती, लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार को विकास से कोई सरोकार नहीं, अपितु सामाजिक तानाबाना बिगाड़ने से है।
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इनेलो कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान ढुल ने मुख्यमंत्री से विकास से जुड़े दस महत्वपूर्ण सवाल भी किए। उन्होंने कहा की पिछले एक साल से ज्यादा समय से विधानसभा के अंदर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार की तरफ से मिले आश्वासनों पर आने वाले खर्च को यदि जोड़ा जाए, तो कुल 1000 करोड़ रुपये के लगभग बनता है।
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मगर इसके विपरीत जुलाना रैली में हुई घोषणा 100 करोड़ भी नहीं है। इनमें से अधिकांश काम नियमित बंधे बंधाए प्रशासनिक काम हैं, जिन्हें घोषणा के नाम पर पेश किया गया है। घोषणाओं में जुलाना को उप मंडल बनाया जाना, नहरी पानी वितरण का जुलाना में पुनर्गठन, पेयजल किल्लत को दूर करने के ठोस आधारभूत सरकारी योजनाएं खेती के पानी की व्यापक उपलब्धता, टेल पर पानी, सूखे जलघर में पानी पहुंचाना जैसे अहम मुद्दों का कोई जिक्र तक नहीं किया गया।
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हैरानी की बात है कि गर्ल्स कॉलेज तक को भी स्वीकृति नहीं दी गई, बल्कि उसे भी मैपिंग के दरमियान बताया गया। प्रदेश सरकार ने रैली में कुर्सियां भरने के लिए पंचों, सरपंचों व पार्षदों को विकास के लिए ग्रांट देने के नाम पर बुलाया, लेकिन ग्रांट के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं दी।
पीपली लाइव के नत्था बन गए निडाना के गरीब
विधायक ढुल ने कहा कि निडाना हादसे के बाद पीड़ितों से मिलना तो दूर मुख्यमंत्री ने उन्हें राहत प्रदान करने तक की घोषणा नहीं की। निडाना के गरीब पीपली लाइव के नत्था बन गए हैं। हैरानी की बात है कि इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी प्रदेश सरकार ने हलके में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।
वर्ल्ड बैंक द्वारा समर्थित व प्रायोजित क्लस्टर योजना पर भी कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। प्रदेश सरकार के पास मौाका था कि वह आमजन का सरकारी व्यवस्था में पुन: विश्वास कायम करती, लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार को विकास से कोई सरोकार नहीं, अपितु सामाजिक तानाबाना बिगाड़ने से है।