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Jind News: जुलाना में रैली कर सियासी पुनर्जन्म की तलाश में जुटी जजपा

Tue, 18 Nov 2025 12:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Tue, 18 Nov 2025 12:56 AM IST
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JJP seeks political rebirth by holding rally in Julana
17जेएनडी31-दुष्यंत चौटाला
जींद। जननायक जनता पार्टी (जजपा) अपने गढ़ रहे जुलाना में बड़ी रैली करके सियासी पुनर्जन्म की कोशिश में जुटी है। सत्ता से दूर होने के बाद सात दिसंबर को पार्टी की यह पहली बड़ी रैली होगी। 2019 में जींद की तीन सीटें जीतने से ऐसे समीकरण बने थे कि दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम तक बन गए थे।
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जजपा का गठन भी जींद के ही जज्बे से हुआ था। एक नई सोच, नई दिशा और नई राजनीतिक पारी की शुरुआत के रूप में 2019 के चुनाव में जजपा ने 10 सीटें जीतकर प्रदेश की सियासत में तहलका मचा दिया था। इसमें जींद ने ही सबसे बड़ा साथ दिया था।
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जजपा ने जींद की जुलाना, नरवाना और उचाना सीटें जीती थी। दुष्यंत चौटाला उचाना से बड़े अंतर से जीते थे। इसी जीत के बूते सियासी समीकरण कुछ ऐसे बने कि दुष्यंत चौटाला के साथ भाजपा ने गठबंधन सरकार बनाई और उन्हें डिप्टी सीएम भी बनने का मौका मिल गया।
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कांग्रेस के सफीदों से सुभाष देशवाल और भाजपा के जींद से कृष्ण मिड्ढा ही जीत सके। 2024 में सारे समीकरण बदल गए। भाजपा का साथ छोड़ने के बावजूद दुष्यंत तो बुरी तरह से हारे ही, पार्टी का भी सफाया हो गया। जजपा जिस जाट वोट से फली-फूली थी, वह फिर कांग्रेस में चला गया।
कांग्रेस को इसका फायदा सिर्फ जुलाना सीट पर विनेश फोगाट की जीत के रूप में मिला। बाकी चार सीटों पर कांग्रेस को पराजय ही झेलनी पड़ी। चुनावी हार के बाद सात दिसंबर को बड़ी रैली के जरिये जजपा खुद को खड़ा करने की कोशिश में है।
पार्टी नेतृत्व भी रैली को ऐतिहासिक बता रहा है। जुलाना में होने वाली यह रैली पार्टी के राजनीतिक पुनर्जन्म की घोषणा भी कही जा रही है। इस रैली में संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने के लिए बड़े बदलाव भी हो सकते हैं। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
आयोजन स्थल पर बड़ा पंडाल, मंच और पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। इसमें हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा भी हो रहा है। खुद दुष्यंत चौटाला भी सोशल मीडिया पर इसका प्रचार कर रहे हैं।
जमीनी मुद्दे उठाकर पहचान बनाने की कोशिश
सियासी जानकारों का कहना है कि जजपा ने जिस तरह युवाओं, किसानों और ग्रामीणों के मुद्दे उठाकर अपनी पहचान बनाई थी, उसे फिर धार मिलेगी। जुलाना की रैली उसी राजनीतिक संदेश को दोहराएगी कि जज्बा जब भी कुछ करता है, बदलाव लेकर आता है।

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...तो इसलिए चुना है जुलाना को
जजपा को लगता है कि जाट अस्मिता का सवाल उठाकर पार्टी फिर से जाट समाज को आकर्षित कर सकती है। जजपा की जीत के वक्त तीनों विधायक जाट ही थे। अब सिर्फ कांग्रेस की विनेश फोगाट हैं। विनेश भी क्षेत्र में बहुत कम सक्रिय हैं। उनके गायब रहने के पोस्टर तक लग चुके हैं। ऐसे में जजपा को लगता है कि यहां सक्रियता बढ़ाकर सीट फिर जीती जा सकती है।







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