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बधाना गांव में 86 एकड़ जमीन की दो लोगों ने लगाई 100 रुपये प्रति एकड़ दी बोली
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Wed, 26 Apr 2017 12:37 AM IST
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बधाना गांव में जमीन की बोली करवाने पहुंची एडीसी व अन्य अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बधाना गांव में 86 एकड़ पंचायती जमीन पर पिछले 25 साल से हो रहे कब्जे को हटवाने के लिए एडीसी आमना तस्नीम के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला इस जमीन की बोली करवाने पहुंचा, लेकिन ग्रामीणों की बेरुखी के चलते जमीन की बोली नहीं हो सकी। अब प्रशासन जमीन का कलेक्टर रेट तय करने की तैयारी कर रहा है।
दरअसल, बधाना गांव में 126 एकड़ पंचायती जमीन है। इसमें से 40 एकड़ जमीन पंचायत ने बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर के लिए दी है। शेष बची भूमि को खुली बोली से ठेके पर देने के लिए मंगलवार को एडीसी आमना तस्नीम सहित बीडीपीओ और अन्य अमला भी पहुंचा। इस दौरान एडीसी ने अलग-अलग रास्तों पर स्थित काश्त भूमि के प्लाटों की बोली के लिए पांच हजार रुपये प्रति बोलीदाता सिक्योरिटी जमा कराने को कहा। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद भी किसी ने सिक्योरिटी राशि जमा नहीं करवाई।
इस पर एडीसी ने अनुरोध किया तो सामान्य वर्ग के सतीश कुमार ने बोली लगाने के लिए सिक्योरिटी जमा कराने के बाद प्रति एकड़ एक 100 रुपये तक की बोली लगाई। इसके कुछ देर बाद ही एससी कोटे की लगभग 28 एकड़ काश्त भूमि की बोली लगाने के लिए गांव के ही एससी वर्ग के कर्मबीर ने सिक्योरिटी जमा कराने के बाद प्रति एकड़ 100 रुपये ही बोली लगाई। इसके अलावा बीसी वर्ग व स्वतंत्रता सेनानी के लिए आरक्षित भूमि से कोई भी बोलीदाता बोली लगाने के लिए सिक्योरिटी जमा कराने के लिए आगे नहीं आया।
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कब्जों के कारण नहीं आई बोली
गांव में अलग-अलग जमीन के हिसाब से प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये तक एक साल का ठेका छूटता है, लेकिन पंचायती जमीन को महज 100 रुपये प्रति एकड़ का रेट मिला है। ऐसे में लोगों का माना है कि यहां करीब दो दर्जन परिवारों ने कब्जा किया है, जिसके कारण लोगों ने बोली लगाने में रुचि नहीं दिखाई। गौरतलब है कि यह मामला गांव के लोगों ने परिवेदना समिति उठाया था। इस पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन जमीन से कब्जा छुटवा रहा है।
कोने में बैठी सरपंच, पटवारी नहीं पहुंचा, एडीसी लगाई फटकार
जिस समय बोली की प्रक्रिया शुरू हुई, एडीसी ने गांव की सरपंच के बारे में पूछा। लोगों ने बताया कि सरपंच वहां बैठी हैं। इस पर एडीसी ने कहा कि सरपंच आगे बैठें और भविष्य में मौके पर मिलें। इसी दौरान एडीसी ने पंचायत सचिव को फटकार लगाते हुए कार्यप्रणाली सुधारने को कहा। जब पटवारी की जरूरत पड़ी तो वह भी मौके पर नहीं मिला। इस पर एडीसी ने अधिकारियों को फटकार लगाई।
जमीन की बोली बहुत ही कम लगाई गई है। ऐसे में अब इस जमीन का कलेक्टर रेट तय किया जाएगा। यदि कलेक्टर रेट पर भी कोई जमीन को ठेके पर नहीं लेता तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। पंचायती जमीन से अवैध कब्जा हर हाल में हटवाया जाएगा। -आमना तस्नीम, एडीसी।
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दरअसल, बधाना गांव में 126 एकड़ पंचायती जमीन है। इसमें से 40 एकड़ जमीन पंचायत ने बागवानी विश्वविद्यालय के रीजनल सेंटर के लिए दी है। शेष बची भूमि को खुली बोली से ठेके पर देने के लिए मंगलवार को एडीसी आमना तस्नीम सहित बीडीपीओ और अन्य अमला भी पहुंचा। इस दौरान एडीसी ने अलग-अलग रास्तों पर स्थित काश्त भूमि के प्लाटों की बोली के लिए पांच हजार रुपये प्रति बोलीदाता सिक्योरिटी जमा कराने को कहा। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद भी किसी ने सिक्योरिटी राशि जमा नहीं करवाई।
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इस पर एडीसी ने अनुरोध किया तो सामान्य वर्ग के सतीश कुमार ने बोली लगाने के लिए सिक्योरिटी जमा कराने के बाद प्रति एकड़ एक 100 रुपये तक की बोली लगाई। इसके कुछ देर बाद ही एससी कोटे की लगभग 28 एकड़ काश्त भूमि की बोली लगाने के लिए गांव के ही एससी वर्ग के कर्मबीर ने सिक्योरिटी जमा कराने के बाद प्रति एकड़ 100 रुपये ही बोली लगाई। इसके अलावा बीसी वर्ग व स्वतंत्रता सेनानी के लिए आरक्षित भूमि से कोई भी बोलीदाता बोली लगाने के लिए सिक्योरिटी जमा कराने के लिए आगे नहीं आया।
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कब्जों के कारण नहीं आई बोली
गांव में अलग-अलग जमीन के हिसाब से प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये तक एक साल का ठेका छूटता है, लेकिन पंचायती जमीन को महज 100 रुपये प्रति एकड़ का रेट मिला है। ऐसे में लोगों का माना है कि यहां करीब दो दर्जन परिवारों ने कब्जा किया है, जिसके कारण लोगों ने बोली लगाने में रुचि नहीं दिखाई। गौरतलब है कि यह मामला गांव के लोगों ने परिवेदना समिति उठाया था। इस पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन जमीन से कब्जा छुटवा रहा है।
कोने में बैठी सरपंच, पटवारी नहीं पहुंचा, एडीसी लगाई फटकार
जिस समय बोली की प्रक्रिया शुरू हुई, एडीसी ने गांव की सरपंच के बारे में पूछा। लोगों ने बताया कि सरपंच वहां बैठी हैं। इस पर एडीसी ने कहा कि सरपंच आगे बैठें और भविष्य में मौके पर मिलें। इसी दौरान एडीसी ने पंचायत सचिव को फटकार लगाते हुए कार्यप्रणाली सुधारने को कहा। जब पटवारी की जरूरत पड़ी तो वह भी मौके पर नहीं मिला। इस पर एडीसी ने अधिकारियों को फटकार लगाई।
जमीन की बोली बहुत ही कम लगाई गई है। ऐसे में अब इस जमीन का कलेक्टर रेट तय किया जाएगा। यदि कलेक्टर रेट पर भी कोई जमीन को ठेके पर नहीं लेता तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। पंचायती जमीन से अवैध कब्जा हर हाल में हटवाया जाएगा। -आमना तस्नीम, एडीसी।