फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Jat votes divided in Uchana, Brijendra lost to rebels and independents, first time Hooda had tried hard

उचाना में जाट वोट कटे: बागी व निर्दलीय से 'हारे' बृजेंद्र, पहली बार दीपेंद्र व भूपेंद्र हुड्डा ने लगाया था जोर

Thu, 10 Oct 2024 08:50 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Thu, 10 Oct 2024 08:50 AM IST
सार

उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र बीरेंद्र सिंह का गढ़ है। पहले बीरेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा आपस में एक-दूसरे की कभी मदद नहीं करते थे, बल्कि शब्दों के तीर छोड़ते थे। यह पहली बार था जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीरेंद्र सिंह को अपना भाई बोलते दिखे।

विज्ञापन
Jat votes divided in Uchana, Brijendra lost to rebels and independents, first time Hooda had tried hard
उचाना से कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह - फोटो : संवाद

विस्तार

जींद में उचाना कलां विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह की हार का सबसे बड़ा कारण निर्दलीय प्रत्याशी बने। यदि सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता तो बृजेंद्र सिंह बड़े मार्जिन से जीत दर्ज कर सकते थे। राजनीति के जानकारों का मानना है कि जाट वोट बंटने का सबसे बड़ा नुकसान बृजेंद्र सिंह को हुआ। जिले में वैसे भी भाजपा की जीत के सबसे बड़े कारण निर्दलीय प्रत्याशी ही बने हैं।

विज्ञापन


उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र बीरेंद्र सिंह का गढ़ है। यहां से खुद बीरेंद्र सिंह पांच बार विधायक बने हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी भी यहां से विधायक रह चुकी हैं। इस बार बेटे बृजेंद्र सिंह का नंबर था, लेकिन वह मात्र 32 वोट से हार गए। वैसे पहली बार बृजेंद्र सिंह के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने भी वोट मांगे, लेकिन इसके बावजूद बृजेंद्र सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन


इससे पहले बीरेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा आपस में एक-दूसरे की कभी मदद नहीं करते थे, बल्कि शब्दों के तीर छोड़ते थे। यह पहली बार था जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीरेंद्र सिंह को अपना भाई बोलते हुए कहा था कि बृजेंद्र हमारा प्रिय भतीजा है, इसलिए वोट इसको ही देना। उचाना कलां से निर्दलीय चुनाव लड़े वीरेंद्र घोघड़िया 31,456 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी विकास 13,456 और दिलबाग संडील 7373 वोट लाकर बृजेंद्र सिंह का बड़ा नुकसान कर गए। इन चारों में जाट वोट बंट गया और गैर जाट वोटों से देवेंद्र अत्री जीत गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

सफीदों विधानसभा में भी कांग्रेस की हार का कारण बने निर्दलीय

सफीदों विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष गांगोली 4037 वोटों से हारे हैं। इनकी हार का कारण भी निर्दलीय जाट प्रत्याशी ही बने। यहां से भाजपा से जसबीर देशवाल को टिकट नहीं मिला और वह निर्दलीय मैदान में कूद गए। जसबीर देशवाल ने 20114 वोट हासिल किए। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी बच्चन सिंह आर्य ने भी 8807 वोट लिए। यहां पर भी जाट वोट जसबीर देशवाल और सुभाष गांगोली में बंट गया और इसका लाभ रामकुमार गौतम को हुआ। सुभाष गांगोली इसी कारण 4037 वोटों से हार गए। सुभाष गांगोली पिछले विधानसभा चुनाव में पिल्लूखेड़ा ब्लॉक के गांवों से जीत हासिल करते थे, लेकिन इस बार यहां जसबीर देशवाल ने भी आधे से अधिक वोट हासिल कर लिए।

नरवाना विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की बागी बनी हार का कारण

नरवाना विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की हार का कारण उनकी ही बागी विद्या रानी बनीं। विद्यारानी ने इस बार इनेलो के टिकट पर किस्मत आजमाई और वह 46,303 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहीं। यहां पर भाजपा प्रत्याशी कृष्ण बेदी 11,499 वोट से जीत गए। विद्या रानी यहां से दो बार 2014 और 2019 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हार चुकी हैं। उनको कांग्रेस का टिकट नहीं मिला और वह इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़ीं। दो बार चुनाव हारने के कारण उनके साथ सहानुभूति भी अच्छी रही। इसी कारण कांग्रेस प्रत्याशी सतबीर दबलैन चुनाव हार गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed