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एसिड अटैक पीड़िता को प्रदान की अंतरिम मुआवजा राशि: सीजेएम
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जींद। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रेखा ने कहा कि यदि आप किसी अपराध जैसे एसिड अटैक, दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न से पीड़ित हैं तो आप हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना 2020 तक हरियाणा यौन शोषण अथवा अन्य अपराधों से पीड़ित महिला के लिए मुआवजा योजना 2020 के तहत वर्णित मुआवजा पाने के हकदार हैं।
प्राधिकरण सचिव ने कहा कि अपराध में दोषी को सजा की बात तो सभी जानते हैं। लेकिन पीड़ित को मुआवजे की जानकारी के संबंध में कम लोग जानकारी रखते हैं। इस कारण पीड़ितों द्वारा मुआवजे के लिए बहुत कम आवेदन आते हैं। प्राधिकरण सचिव ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान में पिछले दिनों एक ऐसा ही मामला आया था, जिसमें एसिड अटैक के अंतर्गत मामले का संज्ञान लेते हुए एसिड अटैक पीड़िता को एक लाख रुपये अंतरिम राहत देने का आदेश पारित किया गया।
पीड़िता को अंतरिम मुआवजा राशि सीधे उसके बैंक खाते में जमा करवा दी गई। सचिव ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे केसों में मुआवजे का भुगतान तभी करती है जब पीड़िता को अन्य किसी योजना या सरकारी संस्थान से मुआवजा नहीं मिला हो। अनुसंधान अधिकारियों को चाहिए कि इस प्रकार का कोई भी मामला उनके संज्ञान में आता है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मामले की सूचना से अवगत करवाएं ताकि प्राधिकरण द्वारा पीड़ित व्यक्ति/महिला को कानूनी सहायता व मुआवजे की राशि प्रदान की जा सके।
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प्राधिकरण सचिव ने कहा कि अपराध में दोषी को सजा की बात तो सभी जानते हैं। लेकिन पीड़ित को मुआवजे की जानकारी के संबंध में कम लोग जानकारी रखते हैं। इस कारण पीड़ितों द्वारा मुआवजे के लिए बहुत कम आवेदन आते हैं। प्राधिकरण सचिव ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान में पिछले दिनों एक ऐसा ही मामला आया था, जिसमें एसिड अटैक के अंतर्गत मामले का संज्ञान लेते हुए एसिड अटैक पीड़िता को एक लाख रुपये अंतरिम राहत देने का आदेश पारित किया गया।
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पीड़िता को अंतरिम मुआवजा राशि सीधे उसके बैंक खाते में जमा करवा दी गई। सचिव ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे केसों में मुआवजे का भुगतान तभी करती है जब पीड़िता को अन्य किसी योजना या सरकारी संस्थान से मुआवजा नहीं मिला हो। अनुसंधान अधिकारियों को चाहिए कि इस प्रकार का कोई भी मामला उनके संज्ञान में आता है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मामले की सूचना से अवगत करवाएं ताकि प्राधिकरण द्वारा पीड़ित व्यक्ति/महिला को कानूनी सहायता व मुआवजे की राशि प्रदान की जा सके।
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