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वर्ष 2029 में प्रदेश में होगी इनेलो की सरकार : विजेंद्र सिंह
Wed, 08 Oct 2025 11:37 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 08 Oct 2025 11:37 PM IST
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08जेएनडी30-विजेंद्र सिंह रेढू।
जींद। इनेलो जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह रेढू ने कहा कि इनेलो की राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय बैठकों का बदलता हुआ माहोल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन करके ही रूकेगा। वर्ष 2029 में हरियाणा में इनेलो पार्टी की सरकार बनेगी और चौ. अभय सिंह चौटाला मुख्यमंत्री होंगे।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार से प्रदेश की जनता परेशान हो चुकी है। कांग्रेस इस समय अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परिस्थिति से गुजर रही है जहां एक तरफ वीरेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा आपसी मेल जोल और एकता का संदेश देने की कोशिश करती दिख रही है वहीं दूसरी ओर कुलदीप शर्मा की कड़वाहट, प्रो. संपत सिंह का तीखापन, कुमारी शैलजा की चुप्पी और रणदीप सुरजेवाला की निष्क्रियता पार्टी को भीतर से खोखला बना रही है।
वीरेंद्र सिंह की यात्रा जितनी सद्भाव की बात करती है उतनी ही यह अंदरूनी टूट को उजागर भी करती है, क्योंकि अधिकांश बड़े नेता इस यात्रा से दूरी बनाए हुए हैं। कुलदीप शर्मा खुले तौर पर हुड्डा खेमे पर हावी होने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाते हैं, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी अब भी हुड्डा बनाम बाकी के फॉर्मूले से मुक्त नहीं हुई है।
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संपत सिंह अपने तीखे तेवर और आलोचनात्मक रुख से विपक्ष के भीतर विपक्ष का चेहरा बन चुके हैं, जबकि कुमारी शैलजा की रहस्यमयी चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो उन्हें संगठन से किनारे कर दिया गया है या वे सही मौके की प्रतीक्षा में हैं। उधर रणदीप सुरजेवाला की निष्क्रियता और उनके व्यवहार में झलकता बड़प्पन जमीनी कार्यकर्ताओं के मन में दूरी और असंतोष पैदा कर रहा है। संवाद
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उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार से प्रदेश की जनता परेशान हो चुकी है। कांग्रेस इस समय अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परिस्थिति से गुजर रही है जहां एक तरफ वीरेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा आपसी मेल जोल और एकता का संदेश देने की कोशिश करती दिख रही है वहीं दूसरी ओर कुलदीप शर्मा की कड़वाहट, प्रो. संपत सिंह का तीखापन, कुमारी शैलजा की चुप्पी और रणदीप सुरजेवाला की निष्क्रियता पार्टी को भीतर से खोखला बना रही है।
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वीरेंद्र सिंह की यात्रा जितनी सद्भाव की बात करती है उतनी ही यह अंदरूनी टूट को उजागर भी करती है, क्योंकि अधिकांश बड़े नेता इस यात्रा से दूरी बनाए हुए हैं। कुलदीप शर्मा खुले तौर पर हुड्डा खेमे पर हावी होने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाते हैं, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी अब भी हुड्डा बनाम बाकी के फॉर्मूले से मुक्त नहीं हुई है।
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संपत सिंह अपने तीखे तेवर और आलोचनात्मक रुख से विपक्ष के भीतर विपक्ष का चेहरा बन चुके हैं, जबकि कुमारी शैलजा की रहस्यमयी चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो उन्हें संगठन से किनारे कर दिया गया है या वे सही मौके की प्रतीक्षा में हैं। उधर रणदीप सुरजेवाला की निष्क्रियता और उनके व्यवहार में झलकता बड़प्पन जमीनी कार्यकर्ताओं के मन में दूरी और असंतोष पैदा कर रहा है। संवाद