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लिंगानुपात में आ रहा सुधार, बेटों के बराबर जन्म ले रही बेटियां

Fri, 31 Jan 2020 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2020 11:33 PM IST
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improvement in sex ratio, daughters taking  birth equal to sons
नागरिक अस्पताल में डिलिवरी केंद्र में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 2019 में बेटियों की जन्म दर बेटों के बराबर पहुंच गई है। यहां पर दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 314 बच्चों का जन्म हुआ, जिनमें 161 बेटों और 153 बेटियों ने जन्म लिया। 2018 में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार 340 बच्चों का जन्म हुआ, जिनमें से 184 बेटे और 156 बेटियां हैं। अब अभिभावकों भी बेटियों को बेटों से कम नहीं समझते। पहले बेटे के जन्म पर थाली बजाने व कुआं पूजन का रिवाज था जो आज बेटी के जन्म पर भी होने लगा है। समय के साथ-साथ बेटियों को लेकर लोगों की सोच बदली है। अब बेटों की तरह ही बेटियों को बराबर का दर्जा दिया जाने लगा है। शिक्षा से लेकर खेलों में भी बेटियां आगे बढ़ रही हैं। 2019 में सबसे कम मई में 8 बेटों का जन्म हुआ तो जून में सबसे कम 6 बेटियों का जन्म हुआ। सबसे अधिक अगस्त में 21 बेटों का जन्म हुआ। जनवरी में 19 बेटियों का जन्म हुआ। प्रशासन व पंचायत द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया गया तो कन्या भ्रूण हत्या को लेकर प्रशासन के सख्त होने का परिणाम अब सामने आने लगा है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लड़कियों को लेकर सुकन्या योजना सहित अनेक योजनाएं चलाई गई हैं। मनजीत, सुरेंद्र, धर्मबीर व पवन ने कहा कि पहले रूढ़िवादी सोच के चलते बेटा-बेटी में फर्क समझा जाता था। बेटे को कुल का वारिस माना जाता था, लेकिन समय के साथ-साथ अब लोगों की सोच में बदलवा आ रहा है। पहले की अपेक्षा अब बेटी के जन्म पर भी अभिभावक कुआं पूजा सहित अन्य कार्यक्रम करने लगे हैं। बेटी को अभिभावक अब बोझ नहीं मान कर बेटों के बराबर उनको शिक्षा व खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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अभिभावकों की बदल रही है सोच
पहले की अपेक्षा अब अभिभावक बेटी होने पर खुशी मनाते हैं। बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार दिए जाने लगे हैं। कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ भी सख्ती बरती गई है। सरकार द्वारा बेटियों के जन्म पर अनेकों प्रकार की योजनाएं भी शुरू की है। इससे समाज में काफी सुधार हुआ है। यह लड़कियों के लिए काफी अच्छी चीज है। लिंगानुपात में भी काफी सुधार आया है।
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डॉ. सुशील गर्ग, एसएमओ, नागरिक अस्पताल उचाना।
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