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Jind News: 20 दिन बाद शकूरबस्ती से जींद लौटी हाइड्रोजन ट्रेन, 24 जून से शुरू होगा हाई-स्पीड ट्रायल
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फोटो 21जेएनडी26-हाइड्रोजन ट्रेन, जिसका अब 120 किमी. रफ्तार से ट्रायल लिया जाएगा। संवाद
जींद। देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के ट्रायल को लेकर तैयारियां फिर तेज हो गई हैं। तकनीकी जांच और जरूरी सुधारों के लिए हाइड्रोजन ट्रेन लगभग 20 दिनों तक दिल्ली के शकूरबस्ती रेलवे वर्कशॉप में रही। रविवार को ट्रेन को वापस जींद लाया गया है।
24 जून से अगले चरण में हाइड्रोजन ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल किया जाएगा, जोकि 15 दिन चलेगा। इस महत्वपूर्ण परीक्षण के दौरान रेलवे डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की विशेषज्ञ टीम लखनऊ से जींद पहुंचेगी और पूरे ट्रायल की निगरानी करेगी।
इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफल परीक्षण किया जा चुका है। शुरुआती परीक्षण के सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसकी गति बढ़ाकर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाई जाएगी।
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ट्रायल में ट्रेन के कई अहम पहलुओं की गहन जांच होगी। इसमें ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, हाइड्रोजन फ्यूल सेल की कार्यप्रणाली, नियंत्रण प्रणाली, कंपन का स्तर, ट्रैक पर स्थिरता और सुरक्षा उपकरणों का प्रदर्शन शामिल है। आरडीएसओ के विशेषज्ञों की मौजूदगी में हर तकनीकी डेटा को रिकॉर्ड कर उसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उच्च गति परीक्षण के सफल होने के बाद आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। ट्रायल के दौरान सुरक्षा मानकों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और प्रत्येक चरण का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा।
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24 जून से अगले चरण में हाइड्रोजन ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल किया जाएगा, जोकि 15 दिन चलेगा। इस महत्वपूर्ण परीक्षण के दौरान रेलवे डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की विशेषज्ञ टीम लखनऊ से जींद पहुंचेगी और पूरे ट्रायल की निगरानी करेगी।
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इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफल परीक्षण किया जा चुका है। शुरुआती परीक्षण के सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसकी गति बढ़ाकर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाई जाएगी।
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ट्रायल में ट्रेन के कई अहम पहलुओं की गहन जांच होगी। इसमें ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, हाइड्रोजन फ्यूल सेल की कार्यप्रणाली, नियंत्रण प्रणाली, कंपन का स्तर, ट्रैक पर स्थिरता और सुरक्षा उपकरणों का प्रदर्शन शामिल है। आरडीएसओ के विशेषज्ञों की मौजूदगी में हर तकनीकी डेटा को रिकॉर्ड कर उसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उच्च गति परीक्षण के सफल होने के बाद आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। ट्रायल के दौरान सुरक्षा मानकों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और प्रत्येक चरण का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा।