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करसोला में ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध मछात्राओं की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

Sat, 27 Aug 2022 12:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 27 Aug 2022 12:09 AM IST
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Hunger strike of girl students continues for second day in protest against transfer policy in Karsola
करसोला गांव में धरना दे रहे छात्रों को समर्थन देती आप नेता कविता दलाल। संवाद - फोटो : Jind
जुलाना। करसोला गांव में रेशनेलाइजेशन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में छात्राओं की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। दूसरे दिन भी छात्राओं ने गेट का ताला नहीं खोला और गेट के बाहर धरना दिया। धरने को समर्थन करने के लिए आम आदमी पार्टी की पश्चिमी जोन की खेल प्रकोष्ठ की संयोजक कविता दलाल पहुंचीं और छात्राओं के आंदोलन का समर्थन किया।
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उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से शिक्षा का अधिकार छीन रही है। एक ओर तो प्रदेश की भाजपा सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने का ढोंग कर रही है तो दूसरी ओर स्कूलों से अध्यापकों के पदों को समाप्त कर शिक्षा को छीन रही है। भाजपा सरकार देश और प्रदेश को अशिक्षा के मार्ग पर लेकर जाने का काम कर रही है। प्रदेश की भाजपा सरकार को दिल्ली की सरकार द्वारा विकसित करवाए गए स्कूलों के मॉडल को देखना चाहिए। प्रदेश की सरकार नही चाहती की बच्चे शिक्षित हों क्योंकि शिक्षा के साथ बच्चों को उनके हकों के बारे में जानकारी मिलेगी और सरकार को भी रोजगार देना पड़ेगा तो सरकार ने इस तरह की पॉलिसी बनाकर शिक्षा और शिक्षक दोनेां को ही खत्म करने का काम किया है।
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छात्रों ने किया परीक्षा का बहिष्कार
करसोला गांव में धरना दे रहे छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया है। छात्रों ने कहा कि जब अध्यापक ही नहीं होंगे तो परीक्षा देकर क्या फायदा है। शुक्रवार को 11 वीं कक्षा की गणित की परीक्षा थी। 11 वीं कक्षा के चार छात्रों ने गणित के विषय को चुना है। चारों ही छात्रों ने परीक्षा देने से मना कर दिया। प्राचार्य के समझाने पर भ्री छात्राएं नहीं मानीं। छात्राओं का कहना है कि जब तक सरकार रेशनेलाइजेशन ट्रांसफर पॉलिसी को वापस नहीं लेती है, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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दूसरे दिन भी नहीं पहुंचा कोई अधिकारी या सरकार का नुमाइंदा
करसोला गांव में पांच छात्राएं दूसरे दिन भी भूख हड़ताल पर रही, लेकिन दूसरे दिन भी कोई भी अधिकारी या सरकार का कोई नुमाइंदा छात्राओं की से बातचीत के लिए नहीं पहुंचा। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है। वीरवार को सूचना पाकर खंड शिक्षा अधिकारी पहुंचे थे, लेकिन ज्ञापन लेने के बाद उन्होंने भी कोई सुध नहीं ली है।
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