{"_id":"c502b7c039f1bc29c02eeb4ef9dfad56","slug":"higher-fees-charged-to-students-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विद्यार्थियों से वसूली जा रही अधिक फीस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विद्यार्थियों से वसूली जा रही अधिक फीस
जींद/ अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Fri, 06 Nov 2015 12:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शहर की सबसे प्राचीनतम और प्रतिष्ठित सनातम धर्म शिक्षण संस्था पर एक आरटीआई कार्यकर्ता और कुछ अभिभावकों ने निर्धारित से कई गुणा अधिक फीस वसूलने के आरोप लगाए हैं।
इन लोगों का कहना है कि आरटीआई से दी जानकारी में एसडी स्कूल ने बताया कि विद्यार्थियों से महज पांच से 12 रुपये मासिक फीस ली जाती है, जबकि अभिभावकों और विद्यार्थियों का कहना है उनसे 150 से 440 और इससे भी अधिक फीस ली जा रही है।
विज्ञापन
हैरानी की बात है कि जमा कराई जा रही फीस के बदले स्कूल द्वारा कोई रसीद भी नहीं दी जा रही है।
शहर के रामराये गेट निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नरेश कुमार ने सूचना के अधिकार के तहत स्कूल से पूछा कि स्कूल द्वारा नियम 134 के तहत तथा साधारण विद्यार्थियों से कितनी फीस ली जा रही है।
विज्ञापन
इसके तहत मिली जानकारी के अनुसार स्कूल ने बताया कि पहली से पांचवीं कक्षा तक की छात्राओं से एक रुपये वार्षिक एडमिशन फीस ली जाती है, जबकि पांच रुपये मासिक फीस ली जाती है। लड़कों से यह फीस प्रति माह 12 रुपये ली जाती है। कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं से एडमिशन फीस तीन रुपये और मासिक फीस दो रुपये ली जाती है। इसी श्रेणी में लड़कों से मासिक फीस 12 रुपये ली जाती है।
कक्षा नौ व दस में छात्राओं से एडमिशन फीस पांच रुपये व मासिक फीस दो रुपये ली जाती है। लड़कों से मासिक फीस 14 रुपये ली जाती है। वहीं नियम 134 के तहत आने वाले विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस नहीं ली जाती। इस सूरत में विद्यार्थियों से सिर्फ एडमिशन फीस ली जानी चाहिए। अब अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल निजी स्कूलों के बराबर ही उनसे फीस वसूल रहा है।
नहीं मिली रसीद
इस मामले में कुछ अभिभाव बृहस्पतिवार दोपहर फीस की रसीद लेने के लिए स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचे, लेकिन प्राचार्य रमेश शर्मा ने उन्हें बताया कि फीस एकत्रित करने का काम कक्षाओं के इंचार्ज करते हैं और वे उनसे पता कर स्थिति साफ कर देंगे।
क्या है नियम 134
प्रदेश में गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए अलग से नियम है। इसके तहत निजी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है। इनकी फीस माफ होती है।
440 रुपये भरती हूं फीस
रामराये गेट निवासी सातवीं कक्षा की छात्रा जानवी के अनुसार वह प्रति माह 440 रुपये फीस भरती है। इसके लिए उसे कोई रसीद भी नहीं दी जाती।
माफ होने के बाद भी 150 रुपये फीस
चौथी कक्षा की छात्रा अंजू के अनुसार वे दो बहन स्कूल में पढ़ती हैं। इसके चलते उसकी आधी फीस माफ है। फीस माफी के बाद भी उसे 150 रुपये फीस देनी पड़ती है। इसके लिए कोई रसीद उसे नहीं मिलती।
मामले की होगी जांच
मैंने करीब दो महीने पहले ही प्राचार्य का चार्ज लिया है। आरटीआई के तहत जो सूचना दी गई है, उसकी विस्तार से जानकारी नहीं है। आरटीआई का जवाब स्टाफ ने तैयार किया था, हो सकता है, उसमें कोई खामी हो।
फीस की व्यवस्था स्कूल में पहले से ही चली आ रही है। हमने कोई फीस नहीं बढ़ाई। पूरे मामले की जांच की जाएगी। यदि आरटीआई का जवाब देने में कोई गड़बड़ी हुई तो इसका भी पता लगाया जाएगा।
रमेश कुमार शर्मा, प्राचार्य एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय