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Jind News: लिंगानुपात की दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की सख्ती
Sun, 20 Jul 2025 01:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 20 Jul 2025 01:52 AM IST
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जींद। जिले में लिंगानुपात की दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार ठोस कदम उठा रहा है, पिछले महीने में लिंगानुपात के मामले में जिले का रेशो कम था। अब इसको देखते हुए जिले में किसी भी प्रत्यारोपण-पूर्व भ्रूण में आनुवंशिक दोषों को पता लगाने के लिए चिकित्सक खुद फैसला नहीं लेंगे। अगर कोई ऐसा करता पाया गया तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
इसमें किसी भी तरह की जांच कराने से पहले जिला उपयुक्त प्राधिकारी की अनुमति लेनी होगी। इसके चेयरपर्सन जिला के डीसी होंगे। इसका उद्देश्य केसों का अवलोकन करते हुए इन तकनीक का प्रयोग लिंगचयन में न हो इस बारे में सुनिश्चित किया जा सके। प्रत्यारोपण-पूर्व आनुवंशिक निदान का अर्थ है आनुवांशिक निदान जब एक या दोनों आनुवांशिक माता-पिता में कोई असामान्यता हो और भ्रूण पर परीक्षण किया जाता है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उसमें भी कोई आनुवंशिक असामान्यता है या नहीं। प्रत्यारोपण-पूर्व आनुवंशिक परीक्षण में गर्भावस्था से पहले इन-विट्रो निषेचन के माध्यम से निर्मित भ्रूण में आनुवंशिक दोषों की पहचान करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।
बिना पंजीकरण कार्य करने पर होगी कार्रवाई
अब किसी भी अस्पताल को एआरटी बैंक या एआरटी क्लिनिक में पंजीकरण के लिए एआरटी एक्ट 2021 के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है। यदि कोई भी अस्पताल बिना पंजीकरण के इन दोनों में से कोई भी कार्य करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जिले के सभी चिकित्सकों को प्रत्यारोपण पूर्व भ्रूण में आनुवांशिक दोषों की जांच अपने स्तर पर नहीं करनी है। इसके लिए सभी को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि जिले का लिंगानुपात सुधारा जा सके। यह जांच अनिवार्य हो तो उपयुक्त प्राधिकारी से मंजूरी जरूर लें।
-डॉ. सुमन कोहली, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल जींद।
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इसमें किसी भी तरह की जांच कराने से पहले जिला उपयुक्त प्राधिकारी की अनुमति लेनी होगी। इसके चेयरपर्सन जिला के डीसी होंगे। इसका उद्देश्य केसों का अवलोकन करते हुए इन तकनीक का प्रयोग लिंगचयन में न हो इस बारे में सुनिश्चित किया जा सके। प्रत्यारोपण-पूर्व आनुवंशिक निदान का अर्थ है आनुवांशिक निदान जब एक या दोनों आनुवांशिक माता-पिता में कोई असामान्यता हो और भ्रूण पर परीक्षण किया जाता है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उसमें भी कोई आनुवंशिक असामान्यता है या नहीं। प्रत्यारोपण-पूर्व आनुवंशिक परीक्षण में गर्भावस्था से पहले इन-विट्रो निषेचन के माध्यम से निर्मित भ्रूण में आनुवंशिक दोषों की पहचान करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।
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बिना पंजीकरण कार्य करने पर होगी कार्रवाई
अब किसी भी अस्पताल को एआरटी बैंक या एआरटी क्लिनिक में पंजीकरण के लिए एआरटी एक्ट 2021 के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है। यदि कोई भी अस्पताल बिना पंजीकरण के इन दोनों में से कोई भी कार्य करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जिले के सभी चिकित्सकों को प्रत्यारोपण पूर्व भ्रूण में आनुवांशिक दोषों की जांच अपने स्तर पर नहीं करनी है। इसके लिए सभी को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि जिले का लिंगानुपात सुधारा जा सके। यह जांच अनिवार्य हो तो उपयुक्त प्राधिकारी से मंजूरी जरूर लें।
-डॉ. सुमन कोहली, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल जींद।