{"_id":"684c6e7bee003bbc070e3bec","slug":"gurmat-samagam-on-the-occasion-of-prakashotsav-of-guru-hargobind-singh-sukhmani-sahib-recited-jind-news-c-199-1-jnd1002-136242-2025-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: गुरु हरगोबिंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर्व पर गुरमत समागम, सुखमनी साहिब का किया जाप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: गुरु हरगोबिंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर्व पर गुरमत समागम, सुखमनी साहिब का किया जाप
Sat, 14 Jun 2025 12:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 14 Jun 2025 12:01 AM IST
विज्ञापन
13जेएनडी04-बीबी कंवलजीत कौर शाहाबाद का रागी जत्था गुरुबाणी गायन करते हुए। संवाद
जींद। मीरी पीरी के बादशाह छठी पातशाही गुरु हरगोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व स्थानीय ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में मनाया गया। गुरु घर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह के अनुसार गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक दीवान सजाया गया है। इसमें सबसे पहले गुरुद्वारा साहिब के रागी जसबीर सिंह रमदसिया के रागी जत्थे ने गुरुबाणी शब्द गायन किए।
इसके बाद गुरुद्वारा साहिब के हेड ग्रंथी व प्रसिद्ध कथावाचक गुरविंदर सिंह रत्तक ने गुरु हरगोबिंद सिंह के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु हरगोबिंद सिंह ने गुरु गद्दी संभालने के बाद दो तलवारें धारण की थी। इन तलवारों को मीरी-पीरी का नाम दिया गया। मीरी नामक तलवार भौतिक संसार पर विजय पाने युद्ध का प्रतीक थी।
वहीं पीरी नामक तलवार आध्यात्मिक ज्ञान पर विजय पाने धर्म व संस्कृति की रक्षा करने की प्रतीक थी। इन दोनों तलवारों में से गुरु साहिब ने पीरी को श्रेष्ठ माना था।
विज्ञापन
इसके बाद शाहाबाद मारकंडा से आए बीबी कंवलजीत कौर के नेतृत्व में बीबियों के जत्थे ने गुरु हरगोबिंद सिंह की जीवनी से संबंधित गुरुबाणी शब्दों का व्याख्यान करके संगतों का मन मोह लिया।
गुरु घर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने बताया कि गुरु हरगोबिंद की शिक्षाओं में एक धार्मिक और ईमानदार जीवन जीने के महत्व पर जोर दिया गया। साथ ही समाज में सक्रिय रूप से योगदान देने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया, भेदभाव की निंदा की और सिखों को निस्वार्थ सेवा और दान में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी शिक्षाएं दुनियाभर में लाखों लोगों को ईमानदारी, करुणा और मानवता की सेवा का जीवन जीने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
गुरुघर प्रवक्ता बलविंद्र सिंह ने कहा कि गुरु हरगोबिंद के जीवन की सबसे उल्लेखनीय घटनाओं में से एक सम्राट जहांगीर की ओर से उन्हें ग्वालियर के किले में कैद करना था। कैद में रहने के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय उस अवसर का उपयोग साथी कैदियों तक अपनी शिक्षाओं को फैलाने के लिए किया। इससे उनके दिलों में आशा और लचीलापन पैदा हुआ।
गुरु हरगोबिंद के जीवन का एक और निर्णायक क्षण अमृतसर की लड़ाई थी, जहां उन्होंने सिखों को मुगल सेना के खिलाफ निर्णायक जीत दिलाई। इस जीत ने न केवल सिखों की सैन्य शक्ति को प्रदर्शित किया, बल्कि उनके अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के प्रमाण के रूप में भी काम किया।
उधर शहर के झांझ गेट गुरुद्वारा सिंह सभा में गुरु हरगोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व की खुशी में गुरदित्त सिंह व सिंह सभा गुरुद्वारा रेलवे जंक्शन पर जसवंत सिंह व संतोख सिंह के रागी जत्थे की ओर से शब्द कीर्तन गायन किया गया और लंगर संगतों में बरताया गया।
इस मौके पर गुरुद्वारा मैनेजर गुरविंदर सिंह चौगामा, जत्थेदार गुरजिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, जोगेंद्र सिंह पाहवा, हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की पूर्व सदस्य बीबी परमिंदर कौर, जसकरण सिंह, अशोक खुराना, कमल चुघ, विजेंद्र गुंबर, सतनाम सिंह व लक्की सिंह उपस्थित रहे।
विज्ञापन
इसके बाद गुरुद्वारा साहिब के हेड ग्रंथी व प्रसिद्ध कथावाचक गुरविंदर सिंह रत्तक ने गुरु हरगोबिंद सिंह के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु हरगोबिंद सिंह ने गुरु गद्दी संभालने के बाद दो तलवारें धारण की थी। इन तलवारों को मीरी-पीरी का नाम दिया गया। मीरी नामक तलवार भौतिक संसार पर विजय पाने युद्ध का प्रतीक थी।
विज्ञापन
वहीं पीरी नामक तलवार आध्यात्मिक ज्ञान पर विजय पाने धर्म व संस्कृति की रक्षा करने की प्रतीक थी। इन दोनों तलवारों में से गुरु साहिब ने पीरी को श्रेष्ठ माना था।
विज्ञापन
इसके बाद शाहाबाद मारकंडा से आए बीबी कंवलजीत कौर के नेतृत्व में बीबियों के जत्थे ने गुरु हरगोबिंद सिंह की जीवनी से संबंधित गुरुबाणी शब्दों का व्याख्यान करके संगतों का मन मोह लिया।
गुरु घर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने बताया कि गुरु हरगोबिंद की शिक्षाओं में एक धार्मिक और ईमानदार जीवन जीने के महत्व पर जोर दिया गया। साथ ही समाज में सक्रिय रूप से योगदान देने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया, भेदभाव की निंदा की और सिखों को निस्वार्थ सेवा और दान में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी शिक्षाएं दुनियाभर में लाखों लोगों को ईमानदारी, करुणा और मानवता की सेवा का जीवन जीने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
गुरुघर प्रवक्ता बलविंद्र सिंह ने कहा कि गुरु हरगोबिंद के जीवन की सबसे उल्लेखनीय घटनाओं में से एक सम्राट जहांगीर की ओर से उन्हें ग्वालियर के किले में कैद करना था। कैद में रहने के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय उस अवसर का उपयोग साथी कैदियों तक अपनी शिक्षाओं को फैलाने के लिए किया। इससे उनके दिलों में आशा और लचीलापन पैदा हुआ।
गुरु हरगोबिंद के जीवन का एक और निर्णायक क्षण अमृतसर की लड़ाई थी, जहां उन्होंने सिखों को मुगल सेना के खिलाफ निर्णायक जीत दिलाई। इस जीत ने न केवल सिखों की सैन्य शक्ति को प्रदर्शित किया, बल्कि उनके अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के प्रमाण के रूप में भी काम किया।
उधर शहर के झांझ गेट गुरुद्वारा सिंह सभा में गुरु हरगोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व की खुशी में गुरदित्त सिंह व सिंह सभा गुरुद्वारा रेलवे जंक्शन पर जसवंत सिंह व संतोख सिंह के रागी जत्थे की ओर से शब्द कीर्तन गायन किया गया और लंगर संगतों में बरताया गया।
इस मौके पर गुरुद्वारा मैनेजर गुरविंदर सिंह चौगामा, जत्थेदार गुरजिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, जोगेंद्र सिंह पाहवा, हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की पूर्व सदस्य बीबी परमिंदर कौर, जसकरण सिंह, अशोक खुराना, कमल चुघ, विजेंद्र गुंबर, सतनाम सिंह व लक्की सिंह उपस्थित रहे।

13जेएनडी04-बीबी कंवलजीत कौर शाहाबाद का रागी जत्था गुरुबाणी गायन करते हुए। संवाद