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एडीजीपी आत्महत्या मामले की जांच सिटिंग जज से करवाए सरकार : संधू
Tue, 14 Oct 2025 11:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 14 Oct 2025 11:33 PM IST
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14जेएनडी12-पंचायत करते हुए माजरा खाप पंचायत प्रतिनिधि। स्रोत खाप
जींद। हैबतपुर सचिवालय में मंगलवार को प्रधान गुरविंदर सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई माजरा खाप की पंचायत ने आईपीएस वाई पूरण कुमार की मौत पर दुख व्यक्त किया। संधू ने कहा है कि सरकार एडीजीपी आत्महत्या मामले की जांच सिटिंग जज से करवाए।
पंचायत में आईपीएस की मौत को लेकर खाप ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार बताए वो इस मामले को सुलझाने के लिए किस बात का इंतजार कर रही है। ऐसे लगता है कि सरकार जातीय दंगें का इंतजार कर रही है ताकि मूल मुद्दे से ध्यान भटक जाए।
खाप पंचायतें व सभी समाज ऐसा नहीं होने देंगे। सचिव महेंद्र सिंह सहारण ने कहा कि जब मृतक अधिकारी अपने नोट में जो नाम लिखे गए हैं और अंतिम बयान उन्हें सरकार क्यों नहीं मान रही है जबकि कानून ऐसे मानता है। इस नोट में 15 अधिकारियों के अलावा दो मुख्यमंत्री, गृह मंत्री अनिल विज को भी लपेटा गया है। उनसे भी वाई पूरण कुमार ने फरियाद की है।
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एससी-एसटी आयोग से भी अपनी तकलीफ सांझा की थी। किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े अधिकारियों को बचाना चाहती है और एक छोटी मछली को बलि का बकरा बनाना चाहती है। एक सबसे बड़े व एक सबसे छोटे अधिकारी को फंसा कर सरकार साफ बचना चाहती है।
उन्होंने मांग की कि नोट में शामिल नामों की जांच करवाई जाए और जाति-पाति, धर्म, महजब से ऊपर उठ कर कार्रवाई करे। प्रवक्ता समुद्र सिंह फोर ने कहा कि सरकार ने जो एसआईटी का गठन किया है। यह सही नहीं है। जूनियर अधिकारी कैसे सीनियर अधिकारियों की जांच करेंगे।
यदि सरकार वास्तव में ईमानदारी से मामले का हल करना चाहती हैं तो सिटिंग जज की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करे और समय सीमा निर्धारित करे। खाप ने पंचायत कर भाईचारा बनाए रखने की अपील की है।
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पंचायत में आईपीएस की मौत को लेकर खाप ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार बताए वो इस मामले को सुलझाने के लिए किस बात का इंतजार कर रही है। ऐसे लगता है कि सरकार जातीय दंगें का इंतजार कर रही है ताकि मूल मुद्दे से ध्यान भटक जाए।
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खाप पंचायतें व सभी समाज ऐसा नहीं होने देंगे। सचिव महेंद्र सिंह सहारण ने कहा कि जब मृतक अधिकारी अपने नोट में जो नाम लिखे गए हैं और अंतिम बयान उन्हें सरकार क्यों नहीं मान रही है जबकि कानून ऐसे मानता है। इस नोट में 15 अधिकारियों के अलावा दो मुख्यमंत्री, गृह मंत्री अनिल विज को भी लपेटा गया है। उनसे भी वाई पूरण कुमार ने फरियाद की है।
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एससी-एसटी आयोग से भी अपनी तकलीफ सांझा की थी। किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े अधिकारियों को बचाना चाहती है और एक छोटी मछली को बलि का बकरा बनाना चाहती है। एक सबसे बड़े व एक सबसे छोटे अधिकारी को फंसा कर सरकार साफ बचना चाहती है।
उन्होंने मांग की कि नोट में शामिल नामों की जांच करवाई जाए और जाति-पाति, धर्म, महजब से ऊपर उठ कर कार्रवाई करे। प्रवक्ता समुद्र सिंह फोर ने कहा कि सरकार ने जो एसआईटी का गठन किया है। यह सही नहीं है। जूनियर अधिकारी कैसे सीनियर अधिकारियों की जांच करेंगे।
यदि सरकार वास्तव में ईमानदारी से मामले का हल करना चाहती हैं तो सिटिंग जज की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करे और समय सीमा निर्धारित करे। खाप ने पंचायत कर भाईचारा बनाए रखने की अपील की है।