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Jind News: सरकार ने किया नहरी सिंचाई का आबियाना बंद, 50 हजार किसानों का होगा फायदा
Sat, 24 Feb 2024 12:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 24 Feb 2024 12:31 AM IST
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जींद से बीच से गुजरती हांसी ब्रांच नहर, जो जिले के खेतों की करती हैं सिंचाई।
जींद। प्रदेश सरकार ने आबियाना बंद करने की घोषणा कर किसानों का राहत दी है। इससे जिले के किसानों को आर्थिक रूप से फायदा होगा। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को बजट जारी किया, इसमें नहरी सिंचाई के तौर पर मिलने वाले पानी के शुल्क (आबियाना) बंद करने की घोषणा की है। जींद में लगभग 90 हजार एकड़ में नहरी पानी से सिंचाई होती है और नहरी सिंचाई पर लगभग 50 हजार किसान आश्रित हैं।
अब किसानों को आबियाने के रूप में नहरी पानी के कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इससे पहले किसानों को साल में दो बार नहरी पानी की सिंचाई के लिए आबियाना देना पड़ता था। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता था। कई बार तो बारिश, ओलावृष्टि या कोई प्राकृतिक आपदा आने पर किसान की फसल नष्ट हो जाती थी। फिर भी उन्हें आबियाने के रूप में नंबरदार के माध्यम से सिंचाई विभाग को राशि जमा करवानी पड़ती थी। अब इससे किसानों को हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है। इस सिंचाई शुल्क को वसूलने के लिए जिले में तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और अन्य कर्मचारियों के के जरिए वसूली की जाती है। किसानों से नहर सिंचाई पानी शुल्क की वसूली गांव के नंबरदारों के माध्यम से होती है।
जिले में है 5.85 लाख एकड़ जमीन
जींद में पांच लाख 85 हजार एकड़ कृषि योग्य जमीन है। इस पर खेती होती हैं। इनमें से 90 हजार एकड़ जमीन ऐसी है, जिसमें नहरी पानी द्वारा सिंचाई की जाती है। जिले में चार लाख के करीब किसान हैं, जोकि खेती करते हैं। इनमें से करीब 50 हजार ही किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन तक नहरी पानी पहुंच पा रहा है। बाकी किसान ट्यूबवैल या अन्य किसी माध्यम से अपनी फसलों में सिंचाई कर पाते हैं। अब इन 50 हजार किसानों को प्रदेश सरकार ने राहत दी है। अब इन्हें नहरी पानी का शुल्क अदा नहीं करना पड़ेगा।
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प्रदेश सरकार ने नहरी सिंचाई के तौर पर मिलने वाली पानी के शुल्क के रूप में आबियाने को अब बंद करने की घोषणा की है। इससे जिले के 50 हजार से ज्यादा किसानों को फायदा होगा। उन्हें अब नहरी पानी के शुल्क को वहन नहीं करना पड़ेगा।
- राजेश बिश्नोई, अधीक्षक अभियंता, नहरी विभाग जींद
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अब किसानों को आबियाने के रूप में नहरी पानी के कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इससे पहले किसानों को साल में दो बार नहरी पानी की सिंचाई के लिए आबियाना देना पड़ता था। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता था। कई बार तो बारिश, ओलावृष्टि या कोई प्राकृतिक आपदा आने पर किसान की फसल नष्ट हो जाती थी। फिर भी उन्हें आबियाने के रूप में नंबरदार के माध्यम से सिंचाई विभाग को राशि जमा करवानी पड़ती थी। अब इससे किसानों को हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है। इस सिंचाई शुल्क को वसूलने के लिए जिले में तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और अन्य कर्मचारियों के के जरिए वसूली की जाती है। किसानों से नहर सिंचाई पानी शुल्क की वसूली गांव के नंबरदारों के माध्यम से होती है।
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जिले में है 5.85 लाख एकड़ जमीन
जींद में पांच लाख 85 हजार एकड़ कृषि योग्य जमीन है। इस पर खेती होती हैं। इनमें से 90 हजार एकड़ जमीन ऐसी है, जिसमें नहरी पानी द्वारा सिंचाई की जाती है। जिले में चार लाख के करीब किसान हैं, जोकि खेती करते हैं। इनमें से करीब 50 हजार ही किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन तक नहरी पानी पहुंच पा रहा है। बाकी किसान ट्यूबवैल या अन्य किसी माध्यम से अपनी फसलों में सिंचाई कर पाते हैं। अब इन 50 हजार किसानों को प्रदेश सरकार ने राहत दी है। अब इन्हें नहरी पानी का शुल्क अदा नहीं करना पड़ेगा।
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प्रदेश सरकार ने नहरी सिंचाई के तौर पर मिलने वाली पानी के शुल्क के रूप में आबियाने को अब बंद करने की घोषणा की है। इससे जिले के 50 हजार से ज्यादा किसानों को फायदा होगा। उन्हें अब नहरी पानी के शुल्क को वहन नहीं करना पड़ेगा।
- राजेश बिश्नोई, अधीक्षक अभियंता, नहरी विभाग जींद