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नियम 134- ए के तहत दाखिलों में फर्जीवाड़ा
jind
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:01 AM IST
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नियम 134-ए के तहत दाखिलों में फर्जीवाड़े की बात सामने आ रही है। संपन्न परिवारों द्वारा फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर अपने बच्चों को 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने का आरोप है। डीसी विनय सिंह ने जिला शिक्षा विभाग से 134- ए के तहत दाखिले के लिए चयनित सभी विद्यार्थियों का रिकॉर्ड तलब किया है। पूरे मामले की जांच सीआईडी या अन्य सरकारी जांच एजेंसी से कराई जाएगी। फेडरेशन ऑफ प्राईवेट स्कूल हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष कुल भूषण शर्मा व अन्य निजी स्कूल संचालकों ने सरकार व शिक्षा विभाग के समक्ष नियम 134- ए के तहत दाखिलों में आय का गलत प्रमाण पत्र देकर लाभ उठाने का आरोप लगाया था। जिले में इस बार नियम 134- ए के तहत दाखिलों के लिए प्रथम मेरिट लिस्ट में 850 से ज्यादा विद्यार्थियों का चयन हुआ था।
आय प्रमाण पत्र देने वालों पर शक की सूई
नियम 134- ए के तहत बीपीएल परिवार या जिसकी सालाना आय दो लाख रुपये से कम है, उसी परिवार का बच्चा दाखिला ले सकता है। बीपीएल कार्ड एडीसी की देखरेख में कमेटी द्वारा पूरी जांच-पड़ताल के बाद बनाया जाता है, लेकिन आय प्रमाण पत्र गांव में सरपंच व पटवारी और शहर में पार्षद की शिनाख्त के बाद तहसीलदार की मोहर लगती है। अब सबसे ज्यादा शक की सुई आवेदन में आय प्रमाण पत्र देने वालों पर है। जांच एजेंसी घर-घर जाकर आय व संपत्ति से संबंधित मामले की पूरी जांच करेगी।
गरीबों के हक पर डाला जा रहा डाका
निजी स्कूलों का आरोप है कि शहर में पार्षद आय के सर्टिफिकेट पर बगैर देखे ही मोहर लगा देते हैं और इसके बाद तहसील कार्यालयों के बाहर बैठे दलाल पैसे लेकर तहसीलदार की मुहर लगवा देते हैं। इससे आय का सही आकलन नहीं होता है और गरीब परिवारों के बच्चे लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में पार्षद, पटवारी व सरपंचों के अलावा तहसील में बैठे कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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गाड़ियों में बच्चों को स्कूल छोड़ने पहुंचे अभिभावक
दाखिला प्रक्रिया के दौरान यह भी खूब चर्चा रही कि कई अभिभावक अपने बच्चों को खुद की गाड़ियों में बैठाकर स्कूलों में छोड़ने जाते हैं। इन दाखिलों का लाभ पाने वाले काफी लोग पॉश कॉलोनियों में रहते हैं।
फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर संपन्न लोग उठा रहे फायदा
पार्षद बगैर देखे ही आय के प्रमाण पत्र पर मोहर लगा देते हैं और इसके बाद दलाल पैसे लेकर तहसीलदार की मुहर लगवा देते हैं। संपन्न लोग फर्जी आय के सर्टिफिकेट के आधार पर लाभ उठा लेते हैं और गरीब अपने हक से वंचित रह जाता है। सरकार से हमारी लड़ाई केवल गरीब बच्चों को उनका हक दिलवाने की है। अब जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
कुलभूषण शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष
फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल, हरियाणा।
सीआईडी या अन्य एजेंसी से करवाई जाएगी जांच
जिला शिक्षा विभाग से रिकॉर्ड तलब किया गया है। निदेशालय ने कहा है कि मामले की जांच करवाई जाए। पूरे मामले की जांच सीआईडी या अन्य जांच एजेंसी से करवाई जाएगी। फिलहाल जाट आरक्षण आंदोलन का मामला चल रहा है। इसके बाद जांच होगी।
- विनय सिंह, डीसी जींद।
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आय प्रमाण पत्र देने वालों पर शक की सूई
नियम 134- ए के तहत बीपीएल परिवार या जिसकी सालाना आय दो लाख रुपये से कम है, उसी परिवार का बच्चा दाखिला ले सकता है। बीपीएल कार्ड एडीसी की देखरेख में कमेटी द्वारा पूरी जांच-पड़ताल के बाद बनाया जाता है, लेकिन आय प्रमाण पत्र गांव में सरपंच व पटवारी और शहर में पार्षद की शिनाख्त के बाद तहसीलदार की मोहर लगती है। अब सबसे ज्यादा शक की सुई आवेदन में आय प्रमाण पत्र देने वालों पर है। जांच एजेंसी घर-घर जाकर आय व संपत्ति से संबंधित मामले की पूरी जांच करेगी।
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गरीबों के हक पर डाला जा रहा डाका
निजी स्कूलों का आरोप है कि शहर में पार्षद आय के सर्टिफिकेट पर बगैर देखे ही मोहर लगा देते हैं और इसके बाद तहसील कार्यालयों के बाहर बैठे दलाल पैसे लेकर तहसीलदार की मुहर लगवा देते हैं। इससे आय का सही आकलन नहीं होता है और गरीब परिवारों के बच्चे लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में पार्षद, पटवारी व सरपंचों के अलावा तहसील में बैठे कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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गाड़ियों में बच्चों को स्कूल छोड़ने पहुंचे अभिभावक
दाखिला प्रक्रिया के दौरान यह भी खूब चर्चा रही कि कई अभिभावक अपने बच्चों को खुद की गाड़ियों में बैठाकर स्कूलों में छोड़ने जाते हैं। इन दाखिलों का लाभ पाने वाले काफी लोग पॉश कॉलोनियों में रहते हैं।
फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर संपन्न लोग उठा रहे फायदा
पार्षद बगैर देखे ही आय के प्रमाण पत्र पर मोहर लगा देते हैं और इसके बाद दलाल पैसे लेकर तहसीलदार की मुहर लगवा देते हैं। संपन्न लोग फर्जी आय के सर्टिफिकेट के आधार पर लाभ उठा लेते हैं और गरीब अपने हक से वंचित रह जाता है। सरकार से हमारी लड़ाई केवल गरीब बच्चों को उनका हक दिलवाने की है। अब जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
कुलभूषण शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष
फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल, हरियाणा।
सीआईडी या अन्य एजेंसी से करवाई जाएगी जांच
जिला शिक्षा विभाग से रिकॉर्ड तलब किया गया है। निदेशालय ने कहा है कि मामले की जांच करवाई जाए। पूरे मामले की जांच सीआईडी या अन्य जांच एजेंसी से करवाई जाएगी। फिलहाल जाट आरक्षण आंदोलन का मामला चल रहा है। इसके बाद जांच होगी।
- विनय सिंह, डीसी जींद।