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14 अनाज मंडियों में चार एजेंसियां खरीदेंगी धान
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जींद अनाज मंडी में बिकने के लिए आया धान।
- फोटो : Jind
जिले की 14 अनाज मंडियों में एक अक्तूबर से धान खरीदा जाएगा। एक-एक दाना सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी पर खरीदा जाएगा। किसानों को कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए। अनाज मंडियों में एक लाख मास्क भी जल्द भिजवाएं जाएं। यह निर्देश डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने अधिकारियों के साथ हुई बैठक में दी।
उन्होंने कहा कि अनाज मंडी की सफाई व अन्य सभी प्रकार के प्रबंध होने चाहिए। अनाज मंडियों में बिजली, पीने का पानी, शौचालय, बारदाना व अन्य आवश्यक प्रबंध हर हाल में पूरे होने चाहिए। अनाज मंडियों में पुलिस कर्मियों की दिन-रात ड्यूटी होनी चाहिए। समय-समय पर पुलिस की राइडर भी अनाज मंडी में गश्त करती रहेगी। डीसी ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए अनाज मंडी में एक लाख मास्क उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने बताया कि अलेवा, बरटा, धमतान, धनौरी, गढ़ी, जींद, जुलाना, उचाना, खरल, नगूरां, नरवाना, सफीदों, पिल्लूखेड़ा तथा मंगलपुर में खरीद का कार्य शुरू होगा तथा फूड सप्लाई, हैफेड, एफसीआई तथा एचडब्ल्यूसी एजेंसियां धान की खरीद का कार्य शुरू करेंगी।
मंडी खुलने के दूसरे दिन बाद पहली बार बिका 810 क्विंटल धान
जींद अनाज मंडी खुलने के दूसरे दिन सोमवार को पहले दिन 810 क्विंटल धान खरीदा गया। मंडी में छह किसान धान लेकर आए। किसानों को धान बेचने के लिए दोपहर एक बजे तक खरीदारों का इंतजार करना पड़ा। दोपहर में एक बजे अधिकारी मंडी में आए और धान की बोली हुई। मार्केट कमेटी सचिव ने कहा कि मंडी में सभी तैयारियां कर ली गई हैं। मंडी के गेट पर कांटे से लेकर कैमरे तक की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाई गई है। किसानों को धान बेचने से पहले गेट पास लेना जरूरी है। इसी दिन मंडी में 200 क्विंटल कपास की भी खरीद हुई।
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पिछले वर्ष से कम बिका 1509 धान
किसान सुरेंद्र ने कहा कि इस बार किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तो सरकार किसानों का अनाज व्यापारियों के हवाले करने का कानून बना रही है, दूसरा 1509 धान का भाव पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है। इससे उनका खर्च भी पूरा नहीं होगा। इस बार दो हजार रुपये क्विंटल के आसपास धान का भाव है। पिछले वर्ष यह 2650 रुपये तक था।
सुरेंद्र ।
पांच घंटे इंतजार करवाने के बाद आए खरीदार
मंडी में सुबह नौ बजे धान लेकर आ गया था। दोपहर दो बजे व्यापारियों द्वारा उसके धान की बोली लगाई गई। इसके लिए वह कामकाज छोड़कर लगभग पांच घंटे तक मंडी में खरीदारों का इंतजार करता रहा। इसके बावजूद भी धान का दाम पिछले साल से कम मिला है।
सुमेर।
मंडी में दो दिन से पड़ा धान आज बिका
मंडी में रविवार को धान लेकर आ गया था। रविवार को धान नहीं बिका, सोमवार को दोपहर के बाद खरीदार आया। सरकार किसानों को परेशान करने लगी है। सरकार को चाहिए की मंडी में आते ही किसान की फसल बिके। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए।
बंसी।
1509 धान की आवक शुरू, बीते साल से कम मिल रहा दाम
उचाना मंडी में बिकने के लिए 1509 धान आने लगा है, मगर पिछले साल से कम दाम मिल रहा है। सोमवार को 1989 रुपये प्रति क्विंटल में धान बिका, जबकि गत वर्ष 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिला था। किसान जोगिंद्र, बलवंत व सुरेंद्र ने कहा कि धान मंडी में आने लगा है। शुरुआत से ही दो हजार रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव मिल रहा है। इस बार बीमारी आने से धान पर खर्च अधिक आया है। इस बार जो भाव किसानों को मिल रहे हैं उससे उनका खर्च भी पूरा करना मुश्किल होगा। खरीदार संजय, हिमांशु व संदीप ने कहा कि चावल की मांग कम होने के कारण इस बार धान 1509 के दाम कम हैं। मार्केट कमेटी सचिव सतबीर सिंह ने कहा कि धान के भाव बीते साल से कम हैं।
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उन्होंने कहा कि अनाज मंडी की सफाई व अन्य सभी प्रकार के प्रबंध होने चाहिए। अनाज मंडियों में बिजली, पीने का पानी, शौचालय, बारदाना व अन्य आवश्यक प्रबंध हर हाल में पूरे होने चाहिए। अनाज मंडियों में पुलिस कर्मियों की दिन-रात ड्यूटी होनी चाहिए। समय-समय पर पुलिस की राइडर भी अनाज मंडी में गश्त करती रहेगी। डीसी ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए अनाज मंडी में एक लाख मास्क उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने बताया कि अलेवा, बरटा, धमतान, धनौरी, गढ़ी, जींद, जुलाना, उचाना, खरल, नगूरां, नरवाना, सफीदों, पिल्लूखेड़ा तथा मंगलपुर में खरीद का कार्य शुरू होगा तथा फूड सप्लाई, हैफेड, एफसीआई तथा एचडब्ल्यूसी एजेंसियां धान की खरीद का कार्य शुरू करेंगी।
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मंडी खुलने के दूसरे दिन बाद पहली बार बिका 810 क्विंटल धान
जींद अनाज मंडी खुलने के दूसरे दिन सोमवार को पहले दिन 810 क्विंटल धान खरीदा गया। मंडी में छह किसान धान लेकर आए। किसानों को धान बेचने के लिए दोपहर एक बजे तक खरीदारों का इंतजार करना पड़ा। दोपहर में एक बजे अधिकारी मंडी में आए और धान की बोली हुई। मार्केट कमेटी सचिव ने कहा कि मंडी में सभी तैयारियां कर ली गई हैं। मंडी के गेट पर कांटे से लेकर कैमरे तक की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाई गई है। किसानों को धान बेचने से पहले गेट पास लेना जरूरी है। इसी दिन मंडी में 200 क्विंटल कपास की भी खरीद हुई।
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पिछले वर्ष से कम बिका 1509 धान
किसान सुरेंद्र ने कहा कि इस बार किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तो सरकार किसानों का अनाज व्यापारियों के हवाले करने का कानून बना रही है, दूसरा 1509 धान का भाव पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है। इससे उनका खर्च भी पूरा नहीं होगा। इस बार दो हजार रुपये क्विंटल के आसपास धान का भाव है। पिछले वर्ष यह 2650 रुपये तक था।
सुरेंद्र ।
पांच घंटे इंतजार करवाने के बाद आए खरीदार
मंडी में सुबह नौ बजे धान लेकर आ गया था। दोपहर दो बजे व्यापारियों द्वारा उसके धान की बोली लगाई गई। इसके लिए वह कामकाज छोड़कर लगभग पांच घंटे तक मंडी में खरीदारों का इंतजार करता रहा। इसके बावजूद भी धान का दाम पिछले साल से कम मिला है।
सुमेर।
मंडी में दो दिन से पड़ा धान आज बिका
मंडी में रविवार को धान लेकर आ गया था। रविवार को धान नहीं बिका, सोमवार को दोपहर के बाद खरीदार आया। सरकार किसानों को परेशान करने लगी है। सरकार को चाहिए की मंडी में आते ही किसान की फसल बिके। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए।
बंसी।
1509 धान की आवक शुरू, बीते साल से कम मिल रहा दाम
उचाना मंडी में बिकने के लिए 1509 धान आने लगा है, मगर पिछले साल से कम दाम मिल रहा है। सोमवार को 1989 रुपये प्रति क्विंटल में धान बिका, जबकि गत वर्ष 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिला था। किसान जोगिंद्र, बलवंत व सुरेंद्र ने कहा कि धान मंडी में आने लगा है। शुरुआत से ही दो हजार रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव मिल रहा है। इस बार बीमारी आने से धान पर खर्च अधिक आया है। इस बार जो भाव किसानों को मिल रहे हैं उससे उनका खर्च भी पूरा करना मुश्किल होगा। खरीदार संजय, हिमांशु व संदीप ने कहा कि चावल की मांग कम होने के कारण इस बार धान 1509 के दाम कम हैं। मार्केट कमेटी सचिव सतबीर सिंह ने कहा कि धान के भाव बीते साल से कम हैं।