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Jind News: सरस्वती तट पर महाभारत काल से आ रहे विदेशी मेहमान
Fri, 13 Mar 2026 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 13 Mar 2026 12:12 AM IST
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12जेएनडी13: हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह प्राचीन कपिलेश्वर ती
नरवाना। हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच ने कालवान गांव स्थित प्राचीन कपिलेश्वर तीर्थ का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि युगों-युगों से विदेशी प्रवासी पक्षियों की पसंदीदा शरणस्थली रही है।
धूमन सिंह किरमच ने कहा कि सेंट्रल एशिया, साइबेरिया, मंगोलिया और दक्षिण यूरोप जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी पक्षी सरस्वती नदी के किनारे बने तीर्थों पर विश्राम करते हैं। एक शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इन पक्षियों का यहां आना पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है।
महाभारत काल से ही सरस्वती और सिंधु घाटी के बीच पनपी सभ्यताओं के समय से ये पक्षी यहां के पानी और चारे की उपलब्धता के कारण आकर्षित होते रहे हैं। आदिबद्री, कपालमोचन, कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर से लेकर कलायत के कपिल मुनि तीर्थ और कालवान तक, ये सभी स्थल इन पक्षियों के मुख्य पड़ाव हैं।
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उपाध्यक्ष ने बताया कि सरस्वती बोर्ड इन सभी तीर्थ स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। हाल ही में सियोसर जंगल में जलाश्य बनाने की शुरुआत इसी उद्देश्य से की गई है ताकि जल स्तर बढ़े, पशु-पक्षियों के लिए पानी उपलब्ध हो और क्षेत्र का इको सिस्टम बेहतर हो सके। बोर्ड अब इन विचित्र पक्षियों के लिए विशेष शेल्टर बनाने की दिशा में भी कार्य कर रहा है, ताकि यहा बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी और पर्यटक पहुंच सकें।
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धूमन सिंह किरमच ने कहा कि सेंट्रल एशिया, साइबेरिया, मंगोलिया और दक्षिण यूरोप जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी पक्षी सरस्वती नदी के किनारे बने तीर्थों पर विश्राम करते हैं। एक शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इन पक्षियों का यहां आना पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है।
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महाभारत काल से ही सरस्वती और सिंधु घाटी के बीच पनपी सभ्यताओं के समय से ये पक्षी यहां के पानी और चारे की उपलब्धता के कारण आकर्षित होते रहे हैं। आदिबद्री, कपालमोचन, कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर से लेकर कलायत के कपिल मुनि तीर्थ और कालवान तक, ये सभी स्थल इन पक्षियों के मुख्य पड़ाव हैं।
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उपाध्यक्ष ने बताया कि सरस्वती बोर्ड इन सभी तीर्थ स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। हाल ही में सियोसर जंगल में जलाश्य बनाने की शुरुआत इसी उद्देश्य से की गई है ताकि जल स्तर बढ़े, पशु-पक्षियों के लिए पानी उपलब्ध हो और क्षेत्र का इको सिस्टम बेहतर हो सके। बोर्ड अब इन विचित्र पक्षियों के लिए विशेष शेल्टर बनाने की दिशा में भी कार्य कर रहा है, ताकि यहा बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी और पर्यटक पहुंच सकें।