{"_id":"6918d141a6aac4b7c90c0bc7","slug":"following-the-rules-the-sdm-extinguished-the-stubble-fire-jind-news-c-199-1-jnd1010-143941-2025-11-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: नियमों के पर जाकर एसडीएम ने बुझाई पराली में लगी आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: नियमों के पर जाकर एसडीएम ने बुझाई पराली में लगी आग
विज्ञापन
15जेएनडी21 : खेत में धान के अवशेषों को जला रहे किसान। स्रोत प्रशासन।
नरवाना। एसडीएम जगदीश चंद्र ने शनिवार को दर्जनभर गांवों में किसानों से मुलाकात कर पराली न जलाने की अपील की। वही इस दौरान कई गांव में खेतों में आग लग रहे किसानों को भी एसडीम नियमों के पर जाकर आग को बुझवाया।
इस दौरान किसानों को उन्होंने कहा कि धान अवशेष जलाना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि इससे जमीन की उर्वरा शक्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। धुएं से आमजन और पशुधन में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जबकि बार-बार की आग से भूमि बंजर होने लगती है।
एसडीएम अधिकारियों की टीम के साथ बेलरखा, उझाना, पीपलथा, गढ़ी, ढाबी टेक सिंह, रसीदां, खरल, धमतान साहिब, फुलियां कलां, फुलियां खुर्द, कर्मगढ़, कान्हा खेड़ा और धरोदी सहित कई गांवों के खेतों में पहुंचे। उन्होंने किसानों को अवशेष प्रबंधन के लाभ समझाते हुए कहा कि इससे जमीन की सेहत सुधरती है और किसान मानवता के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि गेहूं बिजाई को लेकर जल्दबाजी न करें और कृषि संयंत्र उपलब्धता के लिए विभागीय किसान सहायता केंद्रों से संपर्क करें। एसडीएम ने बताया कि अवशेष प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है, जबकि पराली जलाने पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ी है जो सुखद संकेत है।
विज्ञापन
इस दौरान किसानों को उन्होंने कहा कि धान अवशेष जलाना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि इससे जमीन की उर्वरा शक्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। धुएं से आमजन और पशुधन में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जबकि बार-बार की आग से भूमि बंजर होने लगती है।
विज्ञापन
एसडीएम अधिकारियों की टीम के साथ बेलरखा, उझाना, पीपलथा, गढ़ी, ढाबी टेक सिंह, रसीदां, खरल, धमतान साहिब, फुलियां कलां, फुलियां खुर्द, कर्मगढ़, कान्हा खेड़ा और धरोदी सहित कई गांवों के खेतों में पहुंचे। उन्होंने किसानों को अवशेष प्रबंधन के लाभ समझाते हुए कहा कि इससे जमीन की सेहत सुधरती है और किसान मानवता के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि गेहूं बिजाई को लेकर जल्दबाजी न करें और कृषि संयंत्र उपलब्धता के लिए विभागीय किसान सहायता केंद्रों से संपर्क करें। एसडीएम ने बताया कि अवशेष प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है, जबकि पराली जलाने पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ी है जो सुखद संकेत है।

15जेएनडी21 : खेत में धान के अवशेषों को जला रहे किसान। स्रोत प्रशासन।