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Jind News: लोक संस्कृति हमारी पहचान, इसे सहेजना सबकी जिम्मेदारी
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फोटो 30जेएनडी05-संत शिरोमणि श्री सैन भगत राजकीय महाविद्यालय में बनाई गई 40 फीट की सांझी। स्रोत
जींद। संत शिरोमणि श्री सैन भगत राजकीय महाविद्यालय में शुक्रवार को सांझी कला व हरियाणवी लोक संस्कृति को समर्पित सांझी उत्सव आयोजित किया गया। उत्सव में हरियाणा की पारंपरिक लोककलाओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के ओएसडी गजेंद्र फोगाट मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की लोक संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान और गौरवशाली विरासत है। इसे सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कलाओं, लोकगीतों और रीति-रिवाजों में प्रदेश की मिट्टी की खुशबू और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ लोक कलाकारों को प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं।
उन्होंने लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। प्राचार्य सत्यवान मलिक ने कहा कि सांझी हमारी प्राचीन लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने गौतम सत्यराज की उपलब्धि को जिले और प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया।
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कार्यक्रम संयोजक प्रो. ज्योति श्योराण ने सांझी कला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्सव का उद्देश्य पारंपरिक लोककलाओं को पहचान दिलाना, कलाकारों को प्रोत्साहित करना और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा की लोक संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान और गौरवशाली विरासत है। इसे सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कलाओं, लोकगीतों और रीति-रिवाजों में प्रदेश की मिट्टी की खुशबू और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ लोक कलाकारों को प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं।
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उन्होंने लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। प्राचार्य सत्यवान मलिक ने कहा कि सांझी हमारी प्राचीन लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने गौतम सत्यराज की उपलब्धि को जिले और प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया।
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कार्यक्रम संयोजक प्रो. ज्योति श्योराण ने सांझी कला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्सव का उद्देश्य पारंपरिक लोककलाओं को पहचान दिलाना, कलाकारों को प्रोत्साहित करना और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।