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सरकार की तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे किसान व मजदूर: कपूर सिंह

Thu, 13 May 2021 12:22 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 13 May 2021 12:22 AM IST
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Farmers and laborers will not tolerate government dictatorship: Kapoor Singh
जींद। सीटू के जिला सचिव कपूर सिंह व सहसचिव संदीप जाजवान ने कहा कि चीनी मिल के सामने चल रहे लंगर को पांच महीने हो गए। इसमें जिलेभर के गांवों से सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छह माह से दिल्ली सीमा पर किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। जब तक आंदोलन जारी रहेगा, तब तक यह लंगर चलता रहेगा। किसान और मजदूर केंद्र सरकार की तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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उन्होंने कहा कि ऐसे में दिल्ली के मुख्यमंत्री किसानों से अपील करने की बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करें और कृषि कानूनों तथा लेबर कोड्स को रद्द करवाएं। अगर सरकार ने दमन का रास्ता अपनाया तो किसान, मजदूर व कर्मचारी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। केंद्र सरकार अपनी हठधर्मिता को छोड़कर बातचीत का रास्ता निकालें, क्योंकि बातचीत से ही रास्ते निकलते हैं। वहीं केंद्र सरकार ने बातचीत के रास्ते बंद कर दिए हैं। बगैर बातचीत के आंदोलन को खत्म नहीं किया जा सकता। जब तक कृषि कानून और लेबर कोड्स रद्द नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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किसानों को आढ़ती एसोसिएशन ने दी पानी की दो टंकी व साबुन की पेटी
उचाना। खटकड़ टोल के पास धरना दे रहे किसानों को हैंडवॉश के लिए 500-500 लीटर पानी की टंकी व एक साबुन की पेटी आढ़ती एसोसिएशन की तरफ से दी गई है। द फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन प्रधान बलराज श्योकंद, आढ़ती एवं सर्व जातीय दाडन खाप चबूतरा पालवां प्रधान दलबीर श्योकंद ने बताया कि इससे पहले भी एसोसिएशन द्वारा एक हजार मास्क धरने पर किसानों को लिए दिए थे। कोरोना संक्रमण के चलते किसान सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवॉश व मास्क पहनने सहित जो भी नियम हैं, उनका पालन करें। खेड़ा खाप प्रधान सतबीर पहलवान, बिजेंद्र सिंधु व शीशपाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जो भी डब्ल्यूएचओ की हिदायते हैं, उनका पालन किसान कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर हर रोज सुबह धरना स्थल को सैनिटाइज किया जाता है। किसान मास्क पहन कर धरने पर आते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल भी धरने पर बैठने के दौरान रखा जाता है।संवाद
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तूफान और बारिश से नहीं टूटे किसानों के हौंसले : पालवां
उचाना। खटकड़ टोल पर बारिश व तेज तूफान भी किसानों के हौंसलों को नहीं तोड़ पा रहा हैं। किसानों का धरना पहले खटकड़ टोल से कुछ दूरी पर चलता था। दो दिन पहले आए तूफान से यहां लोहे की चादर से शेड बनाया गया, वह उखड़ गया था। यहां से अब किसानों ने टोल के पास लोहे की चादर से शेड बना लिया है। उक्त बातें किसान नेता आजाद पालवां ने कहीं हैं। उन्होंने बताया कि बारिश से शेड बेशक टूट गया हो, लेकिन किसानों के हौंसले नहीं टूटे हैं।

उन्होंने कहा कि अब टोल के पास कई घंटे मेहनत करके लोहे की चादर से शेड फिर से तैयार कर दिया गया है। इतना लंबा आंदोलन देश की आजादी के बाद पहली बार हुआ है। संयम व अनुशासन दोनों इस आंदोलन की सफलता की सबसे बड़ी कड़ी हैं। किसानों को षड्यंत्र के तहत बदनाम करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई कोशिश सफल नहीं हुई। संवाद
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