{"_id":"691635250c3d6351650328e5","slug":"even-after-two-months-water-has-not-receded-from-the-fields-of-budha-kheda-village-jind-news-c-199-1-jnd1010-143818-2025-11-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: बूढ़ा खेड़ा गांव के खेतों से दो माह बाद भी नहीं उतरा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: बूढ़ा खेड़ा गांव के खेतों से दो माह बाद भी नहीं उतरा पानी
Fri, 14 Nov 2025 01:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 14 Nov 2025 01:14 AM IST
विज्ञापन
13जेएनडी13 : बुढ़ा खेड़ा गांव के खेतों में खड़ा बरसाती पानी। संवाद
- फोटो : धरना स्थल पर मौजूद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व अन्य।
जुलाना। क्षेत्र के बूढ़ा खेड़ा गांव के किसानों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं। गांव के खेतों में दो माह बीत जाने के बाद भी बरसाती पानी नहीं उतरा है जिसके चलते दर्जनों एकड़ जमीन जलमग्न बनी हुई है। इससे किसानों की पिछली धान की फसल को भारी नुकसान हुआ, वहीं अब आने वाली गेहूं की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है।
किसान हरिओम ने बताया कि उसने करीब 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर जमीन लेकर धान की फसल उगाई थी, लेकिन लगातार जमा पानी के कारण लगभग 50 प्रतिशत फसल खराब हो गई।
अब खेतों में पानी भरा रहने से गेहूं की बिजाई भी संभव नहीं दिख रही, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण खेत दलदल में बदल चुके हैं। अगर जल्द ही पानी नहीं निकाला गया तो रबी सीजन की फसलें पूरी तरह प्रभावित होंगी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
हरिओम सहित कई अन्य किसानों ने सरकार और प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान के चलते उनका गुज़र-बसर मुश्किल हो गया है।
नुकसान की सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे दोबारा खेती कर सकें। अगर प्रशासन समय रहते ड्रेनेज की व्यवस्था कर दे तो खेतों से पानी की निकासी संभव हो सकती है और किसान अगली फसल की तैयारी कर पाएंगे। फिलहाल बुढ़ा खेड़ा गांव के खेतों में फैला पानी किसानों की चिंता और आर्थिक संकट का कारण बना हुआ है।
विज्ञापन
किसान हरिओम ने बताया कि उसने करीब 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर जमीन लेकर धान की फसल उगाई थी, लेकिन लगातार जमा पानी के कारण लगभग 50 प्रतिशत फसल खराब हो गई।
विज्ञापन
अब खेतों में पानी भरा रहने से गेहूं की बिजाई भी संभव नहीं दिख रही, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण खेत दलदल में बदल चुके हैं। अगर जल्द ही पानी नहीं निकाला गया तो रबी सीजन की फसलें पूरी तरह प्रभावित होंगी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
हरिओम सहित कई अन्य किसानों ने सरकार और प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान के चलते उनका गुज़र-बसर मुश्किल हो गया है।
नुकसान की सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे दोबारा खेती कर सकें। अगर प्रशासन समय रहते ड्रेनेज की व्यवस्था कर दे तो खेतों से पानी की निकासी संभव हो सकती है और किसान अगली फसल की तैयारी कर पाएंगे। फिलहाल बुढ़ा खेड़ा गांव के खेतों में फैला पानी किसानों की चिंता और आर्थिक संकट का कारण बना हुआ है।