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Jind News: 39 साल की सेवा के बाद जिला स्वास्थ्य निरीक्षक राममेहर वर्मा सेवानिवृत्त
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फोटो 30जेएनडी12-नागरिक अस्पताल में तैनात निरीक्षक राममेहर वर्मा के सेवानिवृत होने पर उन्हें सम्
- फोटो : Archive
जींद। जिला स्वास्थ्य निरीक्षक राममेहर वर्मा शुक्रवार को 39 वर्षों की सरकारी सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल परिसर में उनके सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके योगदान को याद किया।
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. अनिल बिरला ने कहा कि राममेहर वर्मा ने अपने सेवाकाल में जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर जनसेवा की। वर्ष 2016 में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत उन्होंने सहयोगियों के साथ कम लिंगानुपात वाले गांवों में घर-घर जाकर पांच लाख से अधिक लोगों को बेटी बचाने और पढ़ाने की शपथ दिलाई थी।
इस कार्य के लिए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने उन्हें सम्मानित किया था। समारोह में सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली, डॉ. जीडी शर्मा, डॉ. पालेराम कटारिया, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. रघुबीर पूनिया, डॉ. राजेश भोला भी मौजूद रहे।
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डॉ. बिरला ने कोरोना काल में उनके साहस और सेवाभाव की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने संक्रमित मरीजों के बीच रहकर टीम का नेतृत्व किया। घर-घर जाकर मरीजों की देखभाल की और कोरोना से मृत लोगों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाई। समारोह में सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे।
कर्मचारी हितों के लिए पांच बार गए जेल
राममेहर वर्मा ने जनसेवा के साथ कर्मचारी हितों की लड़ाई में भी अग्रणी भूमिका निभाई। सरकारी सेवा में आने के बाद 1991, 1993, 1996, 1998, 2002, 2004, 2008, 2013 और 2018 के कर्मचारी आंदोलनों में सक्रिय रहे। कर्मचारी अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए उन्हें पांच बार जेल जाना पड़ा और वर्ष 1993 में नौकरी से बर्खास्तगी का सामना भी करना पड़ा।
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स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. अनिल बिरला ने कहा कि राममेहर वर्मा ने अपने सेवाकाल में जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर जनसेवा की। वर्ष 2016 में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत उन्होंने सहयोगियों के साथ कम लिंगानुपात वाले गांवों में घर-घर जाकर पांच लाख से अधिक लोगों को बेटी बचाने और पढ़ाने की शपथ दिलाई थी।
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इस कार्य के लिए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने उन्हें सम्मानित किया था। समारोह में सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली, डॉ. जीडी शर्मा, डॉ. पालेराम कटारिया, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. रघुबीर पूनिया, डॉ. राजेश भोला भी मौजूद रहे।
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डॉ. बिरला ने कोरोना काल में उनके साहस और सेवाभाव की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने संक्रमित मरीजों के बीच रहकर टीम का नेतृत्व किया। घर-घर जाकर मरीजों की देखभाल की और कोरोना से मृत लोगों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाई। समारोह में सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे।
कर्मचारी हितों के लिए पांच बार गए जेल
राममेहर वर्मा ने जनसेवा के साथ कर्मचारी हितों की लड़ाई में भी अग्रणी भूमिका निभाई। सरकारी सेवा में आने के बाद 1991, 1993, 1996, 1998, 2002, 2004, 2008, 2013 और 2018 के कर्मचारी आंदोलनों में सक्रिय रहे। कर्मचारी अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए उन्हें पांच बार जेल जाना पड़ा और वर्ष 1993 में नौकरी से बर्खास्तगी का सामना भी करना पड़ा।