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Jind News: दुविधा...ट्रैक के दोनों तरफ हैं झाड़ियां, बैठे रहते हैं लोग
Tue, 06 Jan 2026 12:47 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 06 Jan 2026 12:47 AM IST
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05जेएनडी08-हाइड्रोजन प्लांट के पास खड़ी ट्रेन। संवाद
जींद। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर बड़ी-बड़ी झाड़ियां हैं, जिससे विजिबिलिटी प्रभावित होती है। यही नहीं ट्रैक पर लोगों के बैठे रहने और पैदल आवागमन की समस्या भी है, जो किसी भी तरह की टेस्टिंग और नियमित रेल संचालन के लिए खतरा बन सकती है। सुबह-शाम ट्रैक पर बैठना, मोबाइल पर बात करना या पटरी पार करना आम बात है।
यह जानकारी लोको पायलटों व रेल कर्मियों ने सोनीपत रेलवे ट्रैक की स्थिति को लेकर लखनऊ से पहुंची टेस्टिंग टीम को निरीक्षण से पहले दी। बताया गया कि 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से टेस्टिंग के दौरान ट्रायल लेना जोखिम भरा हो सकता है। सुझाव दिया कि टेस्टिंग शुरू करने से पहले ट्रैक के आसपास साफ-सफाई व लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
टेस्टिंग टीम के अधिकारियों ने लोको पायलटों की बातों को गंभीरता से सुना और नोट किया और टीम के एक सदस्य ने बताया कि टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा सर्वोपरि होती है। ट्रैक के किनारे मौजूद झाड़ियों, अतिक्रमण और अनधिकृत आवागमन को लेकर संबंधित रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। इसके बाद ही टेस्टिंग की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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इसके अलावा टीम यह भी देखेगी कि ट्रैक पर बैलास्ट की स्थिति, स्लीपरों की मजबूती और रेल पटरियों का अलाइनमेंट में कुछ खामी तो नहीं है।
हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंची
सोनीपत रेलवे ट्रैक पर चलने के लिए हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली से जींद पहुंच चुकी है। अब इसके संचालन के लिए रेलवे ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। लखनऊ से आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन) की टीम जंक्शन पहुंच चुकी है और फिलहाल यह टीम प्लांट की मशीनों की टेस्टिंग कर रही है। टेस्टिंग का उद्देश्य भविष्य में ट्रेन संचालन को और सुरक्षित और सुगम बनाना है। यदि इस दौरान किसी भी तरह की कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के बाद ही आगे की अनुमति दी जाएगी।
रेलवे ट्रैक का चार बार होगा प्रशिक्षण
सोनीपत रेलवे ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन का चार बार प्रशिक्षण लिया जाएगा। ऐसे में दो-दो बार ट्रेन का आवागमन होगा। हालांकि अभी तक इसको लेकर अधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है जबकि रेलवे के बनाए शेड्यूल के अनुसार यह प्रशिक्षण लिया जाएगा।
सीटीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
दिल्ली से सड़क के रास्ते जींद पहुंचे सीटीएम (चीफ ट्रैफिक मैनेजर) राजेश अवस्थी ने हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने हाइड्रोजन गैस को बनते देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्लांट में हाईमास्क लाइट की कमी है। इसलिए प्लांट के स्टोर की तरफ से एक और हाईमास्क लाइट लगाई जाए। वह रविवार सुबह दस बजे पहुंच गए थे और उन्होंने एक बजे तक प्लांट के हर पहलू पर बारीकी से बातचीत की।
स्पेशल कोच में पहुंचा केबल का सामान
लखनऊ से स्पेशल काेच सोमवार को जींद पहुंचा। स्पेशल कोच में केबल का सामान आया है, जिसमें फिटिंग का काम किया जाएगा। इसके बाद ही ट्रायल लिया जाएगा। इसमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेस्टर लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और आक्सीजन का उपयोग किया जाएगा। आक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी, जिससे बिजली पैदा होगी।
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यह जानकारी लोको पायलटों व रेल कर्मियों ने सोनीपत रेलवे ट्रैक की स्थिति को लेकर लखनऊ से पहुंची टेस्टिंग टीम को निरीक्षण से पहले दी। बताया गया कि 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से टेस्टिंग के दौरान ट्रायल लेना जोखिम भरा हो सकता है। सुझाव दिया कि टेस्टिंग शुरू करने से पहले ट्रैक के आसपास साफ-सफाई व लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
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टेस्टिंग टीम के अधिकारियों ने लोको पायलटों की बातों को गंभीरता से सुना और नोट किया और टीम के एक सदस्य ने बताया कि टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा सर्वोपरि होती है। ट्रैक के किनारे मौजूद झाड़ियों, अतिक्रमण और अनधिकृत आवागमन को लेकर संबंधित रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। इसके बाद ही टेस्टिंग की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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इसके अलावा टीम यह भी देखेगी कि ट्रैक पर बैलास्ट की स्थिति, स्लीपरों की मजबूती और रेल पटरियों का अलाइनमेंट में कुछ खामी तो नहीं है।
हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंची
सोनीपत रेलवे ट्रैक पर चलने के लिए हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली से जींद पहुंच चुकी है। अब इसके संचालन के लिए रेलवे ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। लखनऊ से आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन) की टीम जंक्शन पहुंच चुकी है और फिलहाल यह टीम प्लांट की मशीनों की टेस्टिंग कर रही है। टेस्टिंग का उद्देश्य भविष्य में ट्रेन संचालन को और सुरक्षित और सुगम बनाना है। यदि इस दौरान किसी भी तरह की कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के बाद ही आगे की अनुमति दी जाएगी।
रेलवे ट्रैक का चार बार होगा प्रशिक्षण
सोनीपत रेलवे ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन का चार बार प्रशिक्षण लिया जाएगा। ऐसे में दो-दो बार ट्रेन का आवागमन होगा। हालांकि अभी तक इसको लेकर अधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है जबकि रेलवे के बनाए शेड्यूल के अनुसार यह प्रशिक्षण लिया जाएगा।
सीटीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
दिल्ली से सड़क के रास्ते जींद पहुंचे सीटीएम (चीफ ट्रैफिक मैनेजर) राजेश अवस्थी ने हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने हाइड्रोजन गैस को बनते देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्लांट में हाईमास्क लाइट की कमी है। इसलिए प्लांट के स्टोर की तरफ से एक और हाईमास्क लाइट लगाई जाए। वह रविवार सुबह दस बजे पहुंच गए थे और उन्होंने एक बजे तक प्लांट के हर पहलू पर बारीकी से बातचीत की।
स्पेशल कोच में पहुंचा केबल का सामान
लखनऊ से स्पेशल काेच सोमवार को जींद पहुंचा। स्पेशल कोच में केबल का सामान आया है, जिसमें फिटिंग का काम किया जाएगा। इसके बाद ही ट्रायल लिया जाएगा। इसमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेस्टर लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और आक्सीजन का उपयोग किया जाएगा। आक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी, जिससे बिजली पैदा होगी।